बिजनेस स?टैंडर?ड - भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में सुधार की दरकार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, December 08, 2022 10:13 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में सुधार की दरकार
पैनी नजर
सुनील जैन /  October 11, 2009

भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के निवेशक, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, इस क्षेत्र के नियमन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर रूप से चिंतित होंगे।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के प्रमुख जे. एस. सरमा ने बगैर सोच विचार के यह बयान दिया कि वह सभी दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए प्रति सेकंड की बिलिंग योजना को अनिवार्य बनाएंगे।

इस बयान के तुरंत बाद प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के शेयर में 15-20 फीसदी की गिरावट आ गई। सरमा ने यह बयान स्विटजरलैंड के जिनेवा शहर में दिया था जबकि इस संबंध में अनिवार्य परामर्श पत्र जारी नहीं किया गया। इससे यही संकेत मिला कि उन्हें इस इस बात की जानकारी नहीं थी कि भारत में पूरी दुनिया के मुकाबले टैरिफ की दर सबसे कम है।

हर सर्कल में सात ऑपरेटर हैं (7-8 नए को लाइसेंस दिया गया है), लिहाजा वहां पहले से ही काफी गलाकाट प्रतियोगिता है। इससे किसी तरह की मदद नहीं मिली क्योंकि ट्राई के प्रमुख का पदभार संभालने से पहले बतौर टीडीसैट के सदस्य सरमा ने सरकार के उस संदिग्ध फैसले को सही ठहराया था जिसमें नए ऑपरेटर को बारगेन बेसमेंट प्राइस के हिसाब से लाइसेंस देने की बात थी।

इनमें से कई ऑपरेटर फिलहाल इस स्थिति में हैं कि इन लाइसेंसों पर भारी प्रीमियम उगाह रहे हैं जो कि नए प्रति सेकंड या अन्य योजनाएं पेश कर रहे हैं। प्रति मिनट टैरिफ में आई गिरावट की बाबत (भारती एयरटेल के लिए यह गिरावट पिछले साल की पहली तिमाही में 65 पैसे प्रति मिनट से गिरकर इस साल पहली तिमाही में 58 पैसे रह गई है) इसे जोड़कर देखने पर पता चलता है कि प्रति व्यक्ति टॉक टाइम में गिरावट आई है और इसका असर और भी नाटकीय है।

इसी अवधि में भारती एयरटेल के लिए मासिक औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (एपीआरयू - एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) 350 रुपये से घटकर 278 पर आ गई है। रिलायंस के लिए प्रति मिनट टैरिफ में 12 फीसदी की गिरावट आई है और एपीआरयू में 25 फीसदी की। वोडाफोन के लिए यह क्रमश: 16 और 26 फीसदी है और आइडिया सेल्युलर के लिए 11 और 17 फीसदी।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल के दौरान पहली तिमाही के आधार पर भारत में एपीआरयू में 23 फीसदी की गिरावट आई है - पूरी दुनिया में यह सबसे बड़ी गिरावट है। जबकि दुनिया के दूसरे हिस्सों मसलन अमेरिका व ब्रिटेन से इसकी तुलना करें तो वहां 1 से 2 फीसदी की गिरावट आई है। इस मामले में चीन में 5 फीसदी की गिरावट आई है।

एसएमएस के क्षेत्र में दूरसंचार कंपनियों को महत्त्वपूर्ण रूप से काफी फायदा मिलता था, लेकिन अगर आप एक लाख एसएमएस खरीदते हैं तो अब यह 7-8 पैसे प्रति एसएमएस की दर से उपलब्ध है। आज के दौर में कुल एसएमएस में 30-40 फीसदी एसएमएस ऐसी ही सस्ती दर वाले एसएमएस हैं।

इसके बाद आश्चर्य नहीं होता कि भारती जैसी कंपनी को मैक्वेरी जैसे विशेषज्ञ ने कुछ दिन पहले अंडरपरफॉर्मर की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। सरमा के पास कुछ और मसले लंबित पड़े हुए हैं, इसका काफी महत्त्व है क्योंकि लगता है कि वह कम महत्त्वपूर्ण चीजों के बारे में ज्यादा चिंतन कर रहे हैं। इसके तहत मूलभूत टैरिफ को घटाने की बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

पोर्ट चार्जेज और सभी लाइसेंस के लिए एकसमान शुल्क जैसे मसले मौजूद हैं। लेकिन इस सूची में सबसे ऊपर सुबोध कुमार की वह रिपोर्ट है जिसमें कहा गया है कि ग्राहकों की संख्या के आधार पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने के मामले में सरकार को अपना कदम रोकना होगा।

इस सिफारिश के काफी गहरे निहितार्थ हैं। शून्य टैरिफ की पेशकश के जरिए कंपनियां लाखों ग्राहकों को अपनी तरफ खींच रही हैं और इन ग्राहकों की बदौलत वह अतिरिक्त स्पेक्ट्रम पाने की पात्रता हासिल कर रही हैं। कम दर पर उनकी पेशकश की वजह से निश्चित रूप से राजस्व में सरकारी हिस्सेदारी नगण्य जैसी होगी।

सुबोध कुमार की रिपोर्ट पर तत्परता से आगे नहीं बढ़ने से दूरसंचार मंत्रालय को कुछ पसंदीदा फर्मों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटित करने का मौका मुहैया हो जाएगा। जब विलय को हरी झंडी दिखाने की बात आती है तो इसे और भी ज्यादा विवेकाधिकार मिले हुए हैं।

यदि एकसमान लाइसेंस शुल्क की व्यवस्था नहीं की जाती है तो वे दूरसंचार कंपनियां कम लाइसेंस फीस देने के लिए अपनी आय के हिस्से को छुपा सकती हैं जिनकी नीयत ठीक नहीं है। सरमा का ट्रैक रिकॉर्ड अभी तक कमजोर रहा है। उन्हें इसे दुरुस्त करने की दरकार है, अपने लिए भी और दूरसंचार क्षेत्र के लिए भी।

Keyword: Need of reform in Indian telecom sector,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दरों में वृद्धि का चक्र अब थम जाएगा
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.