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बीमा के दावों में छिपी हैं कई तरह की पेचीदगी
अदालती आईना
एम. जे. एंटनी /  October 07, 2009

बीमा मामलों के वकील जिन विभिन्न पेचीदा मुद्दों पर लगातार बहस करते हैं उनमें से एक मुद्दा बीमित घटना से जुड़े नजदीकी कारण से संबध्द है।

शासनादेश में इसे पारिभाषित नहीं किया गया है और भारत में इससे संबध्द केस लॉ बहुत कम हैं। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी बनाम जुआरी इंस्टीट्यूट लिमिटेड के मामले में हाल में आया उच्चतम न्यायालय का फैसला इस क्षेत्र का महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है।

बीमा की रकम का दावा करने वाले व्यक्ति को अनिवार्य रूप से साबित करना होता है कि उसे ऐसी घटना से नुकसान उठाना पड़ा, जो कि बीमित था। कारण और प्रभाव के बीच जुड़ाव होना चाहिए। यह उतना आसान सवाल नहीं है जितना कि यह दिख रहा है। आग, पानी, सड़क दुर्घटनाएं या समुद्री खतरे से होने वाले नुकसान पर पैदा होने वाला बीमा विवाद कारण व प्रभाव के अनुचित बहाने के इर्द-गिर्द घूमता है।

एक मशहूर मामले में जहाज पर चावल का कार्गो लदा हुआ था। चूहे ने वहां छेद कर दिया और फिर समुद्र का पानी घुस जाने की वजह से सामान क्षतिग्रस्त हो गया। सवाल उठा कि इसका सबसे नजदीकी कारण समुद्री खतरे से जुड़ा है या फिर चूहा। लॉर्ड हेल्सबरी ने कहा कि इस नुकसान के लिए चूहे को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

समुद्री बीमा अनुबंध के तहत यह समुद्री खतरे का मामला है। फैसले के मुताबिक, जहाज पर चूहे की मौजूदगी, उसके मजबूत दांत, गुरुत्वाकर्षण का सिध्दांत जिसकी वजह से चावल में पानी घुसा, जहाज तैर रहा था, कमजोर पाइप की वजह से इसे कुतरना आसान था.. पानी घुसने के कारणों में इनको बताया जा सकता है।

जुआरी इंडस्ट्रीज के मामले में 10 घटनाएं श्रृंखलाबध्द हुईं, जिसकी वजह से अंतत: नुकसान हुआ। गोवा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड से बिजली प्राप्त करने के लिए सब-स्टेशन में लगाए गए मुख्य स्विच बोर्ड में शॉर्ट सर्किट हो गया था। इसकी वजह से वहां अत्यधिक ताप उत्पन्न हो गया। पैनल बोर्ड का पेंट इस ताप को सह नहीं पाया और वहां धुआं उठने लगा। इसके बाद वहां एक छेद हो गया।

यह धुआं जेनरेटर कंपार्टमेंट तक फैल गया, वहां भी शॉर्ट सर्किट की वजह से जेनरेटर पावर ट्रिप हो गया। कुल मिलाकर परिणाम यह हुआ कि पूरे प्लांट में बिजली की सप्लाई ठप हो गई। श्रृंखलाबध्द घटना का अंत बॉयलर के क्षतिग्रस्त होने के साथ हुआ। फायर पॉलिसी के तहत जब कंपनी ने नुकसान की बाबत मुआवजे का दावा किया तो सर्वेयर की रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद बीमा करने वाले ने इसे अस्वीकार कर दिया।

उसका कहना था कि निकटस्थ कारण आग नहीं था, लिहाजा वह नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार नहीं है। इस दुर्घटना में कुछ स्वतंत्र चरण भी मौजूद थे, जिसकी वजह से बॉयलर को नुकसान पहुंचा। न्यायालय ने इस रुख को खारिज कर दिया और कहा कि निकटस्थ कारण आग था, जिसकी वजह से श्रृंखलाबध्द घटनाएं हुईं।

कानून यह है कि जरूरी नहीं है कि निकटस्थ कारण किसी समय या स्थान के सबसे नजदीक हो। यह चरणबध्द उपकरणों से संचालित हो सकता है, जैसा कि किसी श्रृंखला के अंत वाला सामान दूसरी ओर मौजूद सामान द्वारा लगाए गए बल से आगे बढ़ जाता है। अगर लगातार और बिना किसी रुकावट के घटनाएं हों तो फिर सामान्य रूप से इसके जुड़ाव के देखते हुए बीमा करने वाला अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता।

भारतीय फैसलों की अल्पता को देखते हुए ब्रिटेन के निदर्शी मामलों को सामने रखा जा सकता है। एक मामले में समुद्री बीमा नीति के तहत एक जहाज में खाल व तंबाकू एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया। समुद्री तूफान में खाल सड़ गई और और इसकेफ्लेवर ने तंबाकू को भी नष्ट कर दिया, जो बिक्री के उपयुक्त नहीं रह गया।

न्यायालय ने कहा कि तंबाकू के क्षतिग्रस्त होने की नजदीकी वजह समुद्री खतरे थे या फिर तूफान, न कि नुकसानग्रस्त खाल। बीमा कंपनी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया। सामान्य रूप से बीमा के कई दावों में इस सिध्दांत के लागू होने की क्षमता है। एक मामले में तेज गति वाले एक वाहन ने एक व्यक्ति को पानी में गिरा दिया। वह घबरा गया और सदमे की वजह से मर गया।

बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि सदमे की वजह से उसकी मौत हुई न कि दुर्घटना की वजह से। अदालत ने उसके नजरिये को अस्वीकार कर दिया। एक और व्यक्ति को वाहन ने टक्कर मार दी और फिर वह निमोनिया से पीड़ित हो गया। कोर्ट ने कहा कि निकटस्थ कारण दुर्घटना थी। इसी तरह दुर्घटना में घायल व्यक्ति की शल्य चिकित्सा के दौरान हुई मौत तो भी दुर्घटना में हुई मौत माना गया।

निकटस्थ कारण जरूरी नहीं है कि पहला या फिर अंतिम या नुकसान की पूर्ण वजह। यह काफी है अगर यह संचालनात्मक और प्रभावी कारण है। हालांकि घटनाओं की श्रृंखला को इतनी दूर तक नहीं खींचा जा सकता।

निकटस्थ कारण की बात करते हुए लॉर्ड बेकॉन ने काफी पहले कहा था - हमें तात्कालिक व निकटस्थ कारणों पर अनिवार्य रूप से ध्यान देना चाहिए और मेरी राय में अंतत: किसी व्यक्ति के जन्म की तरफ वापस जाना अव्यावहारिक है, इसके लिए वह कभी पैदा नहीं हुआ था कि कभी भी दुर्घटना नहीं होगी।

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