बिजनेस स्टैंडर्ड - किसान क्रेडिट कार्ड का सूखा
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किसान क्रेडिट कार्ड का सूखा
बतकही बिहार की
शिखा शालिनी /  September 20, 2009

राज्य में खेती करने वाले किसानों को किसान के्रडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये वित्तीय मदद मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार जो कवायद कर रही है वह अभी अपने लक्ष्य से कोसों दूर है।

राज्य सरकार इसे बेहतर तरीके से अमली जामा पहनाने की कोशिश में जुटी हुई है, लेकिन हाशिये पर जिंदगी गुजार रहे किसान कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ की मार के साथ ऐसी योजना के लाभ से महरूम नजर आ रहे हैं।

बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी का कहना है, 'किसान के्रडिट कार्ड की राह में कई चुनौतियां बरकरार है। केसीसी के तहत कर्ज की ऊपरी सीमा 3 लाख रुपये है। जबकि बैंक किसानों को औसतन 30 हजार रुपये से ज्यादा कर्ज नहीं देना चाहते। हमने इस सीमा को औसतन 50 हजार रुपये करने की गुजारिश की है।

राज्य के 20 फीसदी से ज्यादा बैंकों में कर्मचारियों की भारी कमी से भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी बनती है। वैसे पिछले साल मेगा शिविर के जरिये 8 लाख किसानों को नए केसीसी मिल चुके हैं और इस साल किसानों को 15 लाख केसीसी देने का लक्ष्य रखा गया है।'  केंद्र सरकार की कर्ज माफी योजना के तहत बिहार के 12 लाख किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिला जो केसीसी हासिल करने वाले दावेदार हो गए।

इस स्कीम के तहत सभी शाखाओं को कर्ज देना है लेकिन इस साल सूखे की वजह से लोग कर्ज कम ले रहे हैं। हालांकि सेंट्रल बैंक के आंचलिक प्रबंधक सीबी मिश्रा मानते हैं कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए पूरा सहयोग दिया जा रहा है। केसीसी के लिए जरूरी है कि भूमि अधिकार सर्टिफिकेट (एलपीसी) मिले। फिलहाल बिहार में भूमि का रिकॉर्ड अपडेट नहीं है।

ऐसे में भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जटिलताओं से लोगों को एलपीसी जल्दी नहीं मिल पाता है। कै मूर जिले के एक किसान योगेन्द्र सिंह का कहना है कि प्रखंड स्तर पर एलपीसी जल्दी नहीं मिल पाता और ऐसे में बैंक उन्हें कर्ज आसानी से नहीं देते। कई बार ऐसे किसान जो भूमि के मालिकों से जमीन लेकर खेती करते हैं उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।

मोदी का कहना है कि बैंक के दिशा निर्देश में भी एकरूपता नहीं है इसीलिए केसीसी का लाभ वास्तविक किसान को नहीं मिल पाता है। उनका कहना है कि इस साल सूखे की वजह से किसानों को कर्ज का भुगतान करने में दिक्कत आएगी।

हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज भुगतान की अवधि बढ़ा दी है और यह अगले साल 10 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से दिया जा सकता है। लेकिन इस साल केसीसी का लाभ पाने वालों को इस साल 7 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से ही कर्ज का भुगतान करना होगा जिसके लिए बैंकों को 3 फीसदी सब्सिडी भी केंद्र सरकार मुहैया कराएगी।

अगले साल उन्होंने 10 फीसदी ब्याज देना पड़ेगा जो उनके लिए काफी परेशानी का सबब बन सकता है। बिहार के सांस्थिक वित्त एवं कार्यान्वयन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्ड के जरिये 534 ब्लॉक में कैंप लगाकर पिछले साल 8 लाख 90 हजार लोगों को किसान के्रडिट कार्ड दिए गए जो इससे पहले वाले साल में 3.4 लाख तक थे।

बिहार में फिलहाल 1470 ग्रामीण बैंक की शाखाएं है जिसमें 4 ग्रामीण बैंक काम करते हैं। उपमुख्यमंत्री मोदी यह चाहते हैं कि के्रडिट कार्ड के लिए हर प्रखंड में एटीएम और सभी बैंकों की शाखाएं भी खुले। लेकिन वह यह मानते हैं कि यह लक्ष्य पूरा करने में वक्त लगेगा।

वर्ष 2008-09 में केसीसी के लिए बैंकों का लक्ष्य

बैंक                                केसीसी लक्ष्य (संख्या)                      केसीसी लक्ष्य (संख्या)
                                         2008-09 मौजूदा                             2008-09 समीक्षित
वाणिज्यिक बैंक                     5,40,000                                       8,61,429
सहकारी बैंक                          1,60,000                                       1,60,000
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक              30,00,000                                       4,78,571

Keyword: Drought of kisan credit card,
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