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तेल के खुदरा विक्रेता : उम्मीदों का सहारा
दिशासूचक
शोभना सुब्रमण्यन /  September 16, 2009

यह अनिश्चित है कि ऑटो ईंधन पर होने वाले का घाटे का कितना हिस्सा तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा वहन किया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह खाना पकाने वाली गैस के मामले में ओएमसी को होने वाले पूरे घाटे को वहन करेगी क्योंकि वे उत्पादन से कम कीमतों पर एलपीजी और केरोसीन बेचती हैं।

सरकार ने यह भी कहा है कि ऑटो ईंधन से होने वाला घाटा, जैसे कि पेट्रोल और केरोसीन, जिनकी खुदरा बिक्री उत्पादन लागत से कम पर की जाती है, बड़ी तेल कंपनियों ओएनजीसी और गेल तथा ओएमसी आपस में बांटेंगे। यह संकेत देती है कि निकट भविष्य में ईंधन की कीमतें शायद ही मुक्त की जाएं। हालांकि, बाजार इसकी उम्मीद लगाए बैठा है।

अब सब्सिडी की साझेदारी वास्तव में किस तरह की जाएगी यह अभी तक मालूम नहीं है लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनका मानना है कि वित्तीय दबावों को देखते हुए सरकार और ज्यादा आर्थिक बोझ नहीं उठाना चाहेगी।

इसके अतिरिक्त जैसा कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के अनुमान हैं, ऑटो ईंधन पर होने वाला घाटा बढ़ता जाएगा और अगर बडी क़ंपनियां इस मामले में सहारा नहीं देती तो तेल विपणन कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। अगर कच्चे तेल की कीमतें 55 से 70 डॉलर के बीच रहीं तो सब्सिडी ज्यादा नहीं बढ़ेगी।

हालांकि, बाजार उम्मीद कर रहा है कि सरकार तेल विपणन कंपनियों पर मेहरबान होगी और यही वजह है कि इन कंपनियों के शेयर की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ती देखी गई। एचपीसीएल और बीपीसीएल के शेयर की कीमतों में अगस्त के अंत से लगभग 10 दिनों में 17 से 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

यद्यपि पिछले सप्ताह इनके शेयर की कीमतों में कुछ गिरावट आई है। अगर सरकार सब्सिडी बिल के धिकांश हिस्से का वहन करती है और ऑयल बॉन्ड के जरिए ओएमसी की क्षतिपूर्ति करती है तो इन कंपनियों के शेयर मूल्यों में उछाल आएगी।

यह मानते हुए कि वे ऑटो ईंधन पर दिए जाने वाले सब्सिडी का लगभग 20 प्रतिशत साझा करेंगे, एचपीसीएल के शेयरों का कारोबार साल 2009-10 की अनुमानित आय के 6.1 गुना पर, बीपीसीएल का कारोबार 8 गुना पर 646 पर और आईओसीएल के शेयरों का कारोबार 6.8 गुना पर किया जा रहा है। एक तरफ जहां मूल्य ज्यादा महंगे नही लगते वहीं इस बात की संभावना अधिक है कि ओएमसी घाटे के एक बड़े हिस्से को वहन करेंगे।

यूनाइटेड स्पिरिट्स : ज्यादा खुशी नहीं

व्हाइट ऐंड मैके के खराब प्रदर्शन और विदेशी विनिमय के प्रतिकूल चलन से यूनाइटेड स्पिरिट्स के साल 2008-09 के समेकित आंकड़ों में स्पष्ट गिरावट देखी गई। शराब बनाने वाली इस कंपनी ने 410 करोड़ रुपये का शुध्द घाटा दर्ज किया है।

अपवादों का समायोजन करते हुए बाजार ने कीमतों में कम से कम 200 करोड़ रुपये का लाभ शामिल किया और घटा मात्र 28 करोड़ रुपये का रहा। अनुमान है कि व्हाइट ऐंड मैके का एबिटा में लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि कमजोर आर्थिक परिस्थितियों में स्कॉच की मांग घटी है और कच्चे मालों तथा विज्ञापन पर खर्च बढ़ा है।

समेकित एबिटा में व्हाइट ऐंड मैके की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत की है इसलिए अनुमानों से कहीं कमजोर प्रदर्शन चिंता का विषय है। यह देखते हुए कि कंपनी की उधारी का एक बड़ा ब्रिटिश पौंड में है, जिसमें रुपये के हिसाब से मजबूती नहीं आई है, पर डॉलर की मजबूती का जबरदस्त प्रभाव पड़ा है।

समेकित लाभ गैर-नकदी खर्चे जैसे फॉरेन एक्सचेंज टांसलेशनल घाटा और पेंशन के घाटों से प्रभावित हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि एक्चुरियल घाटा हो सकता है। हालांकि, यूनाइटेड स्पिरिट्स अपनी बैलेंस शीट का ज्यादा लाभ नहीं उठा रहा है।

जून तिमाही के अंत में कंपनी द्वारा लगभग 900 करोड़ रुपये का ट्रेजरी स्टॉक भुनाए जाने से समेकित ऋण अपेक्षाकृत कम लगभग 6,800 करोड रुपये का रहा। लगभग 890 करोड़ रुपये का इसने पुनर्भुगतान कर दिया है और इस प्रकार कंपनी को सालाना 150 से 160 लाख डॉलर की बचत ब्याज पर होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, जून की तिमाही में सालाना आधार पर शुध्द लाभ घटने के अनुमानों के बावजूद आंकड़े अच्छे थे।

आय 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,242 करोड़ रुपये रही। लाभ का एक हिस्सा शॉ वैलेस के विलय और अन्य परिचालनों से आता है। 888 रुपये की वर्तमान कीमतों पर कंपनी के शेयरों का कारोबार साल 2010-11 की अनुमानित आय के लगभग 22 गुना पर की जा रही है।

Keyword: Oil Retailers : hopes of expectations,
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