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विदेशी सुरताल से बदलेगा ताल
दुनिया के सबसे बड़े तालाब को बचाने की तैयारी
शशिकांत त्रिवेदी / भोपाल September 07, 2009

भोपाल में बड़े तालाब के नाम से विख्यात दुनिया की सबसे बड़ी मानव-निर्मित झील का अस्तित्व बचाए रखने के लिए मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर विदेशी मदद हासिल करने की संभावना तलाश रही है।

राज्य सरकार भोपाल के दो तालाबों - बड़ा तालाब और छोटा तालाब- के संरक्षण के लिए जल्द ही विश्व बैंक से कोष की मांग करेगी। दोनों ही तालाब तेजी से सूखते जा रहे हैं और अब वे अपना अस्तित्व खोने के कगार पर हैं। जापान सरकार ने पहले ही वित्तीय मदद की मंजूरी दे दी थी और बड़े तालाब के संरक्षण के लिए 300 करोड़ रुपये की रकम वितरित की गई थी।

स्थानीय स्व-शासन विभाग के प्रधान सचिव राघव चंद्रा ने कहा, '14 नालों के जरिये लगभग 5 करोड़ लीटर त्याज्य जल रोजाना तालाब में बहाया जाता है। हमें इस त्याज्य जल के संशोधन का कार्य पूरा करना है। जापान सरकार की मदद से चलने वाली 'भोज वेटलैंड प्रोजेक्ट' के तहत एक परियोजना का काम अभी बाकी है। हम इसके लिए विश्व बैंक से और कोष की मांग करेंगे।'

1100 पुरानी यह झील भोपाल के तत्कालीन शासक 'राजा भोज' द्वारा बनवाई गई थी। झील के पूर्वी किनारे पर दुनिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित कच्चा बांध बनवाया गया था। सेवानिवृत वरिष्ठ नौकरशाह और भोपाल के पूर्व महापौर एमएन बुच कहते हैं, 'मिट्टी के इस बांध पर तेजी से बढ़ती आवाजाही से इसके लिए खतरा पैदा हो गया है और इसका समाधान तलाशे जाने की सख्त जरूरत है। बढ़ता यातायात और अवैध गतिविधियां इस बांध के लिए खतरा बन गई हैं।'

मौजूदा समय में राज्य सरकार ने एक खाका तैयार किया है जिसके जरिये वह पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने के लिए झील के पास निर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करेगी। चंद्रा ने बताया कि उनके विभाग ने एक सस्पेंशन ब्रिज यानी झूलता पुल, एक बफर जोन, झील की परिधि में 60 किलोमीटर लंबा साइड-वॉक पाथ विकसित किए जाने और विभिन्न पर्यटन गतिविधियों को अंजाम दिए जाने की योजना तैयार की है।

लेकिन जाने-माने पत्रकार और समाजशास्त्री मदन मोहन जोशी झील के पास पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के विचार से सहमत नहीं हैं। वह कहते हैं, 'झील के संरक्षण के संदर्भ में पर्यटन हमारे लिए एक भयानक शब्द है। यह दुनिया में सबसे बड़ी झीलों में से एक है और पेयजल का एक अतिरिक्त स्रोत है। इस झील के पास पर्यटन विकास गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।'

इस झील के संरक्षण का एक विफल प्रयास 1995 में शुरू किया गया था। संरक्षण परियोजना को जापान बैंक फॉर इंटरनैशनल को-ऑपरेशन से प्राप्त 247.02 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से 2002 तक पूरा किया जाना था।

फिर मिलेगी खोई पहचान

राज्य सरकार तालाबों के लिए विश्व बैंक से लेगी वित्तीय मदद
जापान सरकार पहले ही दे चुकी है वित्तीय मदद की मंजूरी
1100 साल पुरानी इस झील को बनवाया था राजा भोज ने
1995 में शुरू किया गया संरक्षण कार्यक्रम नहीं हुआ था सफल

Keyword: Foreign aid will help to pond for improvement,
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