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कैसे ढहेगी स्विस दीवार
संपादकीय /  August 19, 2009

अमेरिकी सरकार और स्विस बैंक यूबीएस के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत यूबीएस करीब 5,000 अमेरिकी संदिग्ध कर चोरों के खातों का विवरण उसे सौंपने के लिए तैयार हो गया।

इस समझौते के बाद भारत की तरफ से भी इसी तरह की कार्रवाई करने की मांग उठाई जाएगी। अमेरिकी समझौते के तहत अमेरिकी सरकार को 10-15 अरब डॉलर तक की विदेशी परिसंपत्तियों का ब्योरा सौंपा जाएगा।

यूबीएस तो केवल एक बैंक है, जबकि खबरों के मुताबिक कर चोर सरकार द्वारा घोषित माफी योजना पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। योजना 23 सितंबर को बंद हो रही है। तो आखिर स्विटजरलैंड से भारतीय कर चोरों के बारे में ऐसी सूचना हासिल करने के लिए भारत कोशिश क्यों नहीं कर रहा है?

यह एक महत्वपूर्ण सवाल है क्योंकि एक अनुमान के मुताबिक भारतीयों द्वारा प्रतिवर्ष 4.7 अरब डॉलर से 22.7 अरब डॉलर काला धन बाहर भेजा जाता है। लेकिन अमेरिका-यूबीएस मामले का करीब से अध्ययन करने पर पता चलता है कि यह काम उतना आसान नहीं है जितना कि भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने चुनाव अभियान के दौरान इसे बताया था।

वजह साफ है- यूबीएस मामला अमेरिकी सरकार द्वारा स्विटजरलैंड की सरकार पर दबाव बनाने का मामला नहीं था। यह ऐसा नहीं था कि अमेरिकी कर चोरों के बारे में जानकारी मांगी गई हो और स्विस बैंकों का अमेरिका में परिचालन रोकने की धमकी दी गई हो।

ऐसा अमेरिकी राजस्व सेवा द्वारा की गई लंबी जांच के बाद संभव हो सका, और तब अमेरिकी अदालत में यूबीएस के खिलाफ एक याचिका दायर की गई जिसमें कहा गया था कि यूबीएस अमेरिकी नागरिकों को कर चोरी में मदद कर रहा है। जब यूबीएस ने पाया कि मामला मजबूत है तो उसने सहयोग करने का फैसला किया और उसने निपटान शुल्क के तौर पर 78 करोड़ डॉलर का भुगतान किया।

क्या भारत भी भारतीय नागरिकों द्वारा विदेशों में रखी गई संपत्तियों का ऐसा विवरण हासिल कर सकता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि अमेरिका-यूबीएस समझौता ऐसा नहीं है कि यूबीएस सभी खाताधारकों का विवरण अमेरिकी प्रशासन को सौंपने जा रहा है, और उसके बाद अमेरिकी सरकार यह जांच करेगी कि इनमें से किसने कर चोरी की है।

अमेरिकी कर प्रशासन के प्रयासों की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि राष्ट्रपति ओबामा ने कर चोरी करने वाले और विदेश में धन जमा कराने वाले लोगों का पता लगाने के लिए 800 अतिरिक्त एजेंट और वकीलों की नियुक्ति के लिए कांग्रेस से अतिरिक्त धन की मांग की। इसके विपरीत भारत पूरे मामले को कैसे संभाल रहा है।

अतावियो क्वात्रोकी के खाते को मुक्त करने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप, और आय माफी योजना में बड़ी संख्या में स्वैच्छिक घोषणाएं, इस बात के उदाहरण हैं। ये और कुछ अन्य घटनाएं यह साफ कर देती हैं कि गंभीर कर चोरों तक पहुंचने के लिए सरकार के पास इच्छाशक्ति का अभाव है।

सीएजी की रिपोर्ट में वीडीआईएस के बारे में ब्योरा दिया गया है कि आखिर किस तरह कर चोरों को घोषित किए जा रहे धन पर केवल 3 से 4 प्रतिशत तक कर का भुगतान कर बचने का मौका दे दिया गया और ऐसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। गोपनीयता की स्विस दीवार अपने आप ढहने वाली नहीं है।

Keyword: How will swiss wall collapse,
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