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अब वितरक जुटे बड़े निवेशकों की तलाश में
वंदना और अंजू यादव / मुंबई August 17, 2009

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रवेश प्रभार पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के मद्देनजर वितरक छोटे निवेशकों को अपनी सेवाएं देने से मुकर सकते हैं और उनका जोर अब बड़े निवेशकों के लिए ही हो सकता है।

हालांकि फंड कंपनियों ने अपनी ओर से अपफ्रंट भुगतान शुरू किया है और वितरकों की नुकसान की भरपाई के लिए ट्रेल फीस भी बढ़ा दी है। लेकिन इसके बावजूद वितरकों को लगता है कि यह कदम पर्याप्त नहीं हैं।

सूत्रों का कहना है कि कुछ वितरकों ने पहले से इस बिजनेस मॉडल पर काम करना शुरू कर दिया है और अब उनका लक्ष्य बड़े निवेशक ही होंगे। आईसीआईसीआई डायरेक्ट के प्रमुख (प्रोडक्ट ऐंड डिस्ट्रीब्युशन) विनीत अरोड़ा का कहना है, 'ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर छोटे ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराना थोड़ा मुश्किल होगा। इसी वजह से कुछ वितरक इस रणनीति को अपनाने का फैसला कर सकते हैं।'

इसका मतलब यह है कि कई वितरक वैसे ग्राहकों को सुविधाएं देने में अपनी दिलचस्पी नहीं दिखाएंगे जो सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लांस (सिप) के जरिए कम रकम निवेश करना चाहते हैं। वितरकों को ज्यादा नेटवर्थ वाले ग्राहकों की जरूरत है।

एमके  ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (वितरण) अखिलेश सिंह का कहना है, 'हमारी कोशिश ज्यादा निवेश करने वाले ग्राहकों को सेवा देने की है साथ ही खुदरा निवेशकों को भी हम सेवा देंगे। दरअसल अब वितरण के कुछ हिस्से को सिप से दूर करने की कोशिश हो रही है। हालांकि अभी इस पर पूरी तरह से अमली जामा नहीं पहनाया है। लेकिन बड़े वितरकों के लिए कम निवेश करने वाले ग्राहकों को सेवाएं मुहैया कराना बिजनेस के लिए फायदेमंद नहीं है।'

सेबी के इस कदम के बाद फंड कंपनियां अपफ्रंट कमीशन के तौर पर 0.5-075 फीसदी और सालाना 0.5 फीसदी-1 फीसदी ट्रेल कमीशन का भुगतान कर रही हैं। सिप के लिए अपफ्रंट फीस के बदले हर किस्त के साथ 1 फीसदी कमीशन भी है।

अगर एक निवेशक एक साल तक 3,000 रुपये हरेक महीने सिप के जरिए निवेश करना है तो एक महीने के लिए 1 फीसदी या 30 रुपये होगा और टे्रल कमीशन 0.5 फीसदी की दर से 90 रुपये होगा। यह कुल 450 रुपये प्रति साल है।

इसकी तुलना में समान सिप से वितरकों को हर महीने 2.25 फीसदी की दर से 67.50 रुपये और 0.5 फीसदी या 90 रुपये ट्रेल कमीशन के तौर पर कमाई हुई होती और कुल आय 900 रुपये होती। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि इससे वितरकों की आय में 50 फीसदी तक की कमी है।

ज्यादा मात्रा में निवेश के लिए तकरीबन 1 लाख रुपये से एक वितरकों को 500 रुपये अपफ्रंट फीस और पूरे साल के दौरान ट्रेल कमीशन से 1 फीसदी या 1000 रुपये तक की कमाई होगी। साफतौर पर सारे आंकड़े बड़े निवेश के पक्ष में ही दिखते हैं।

विशेषज्ञों को यह डर है कि जिन खुदरा निवेशकों ने सिप में अपनी दिलचस्पी दिखाई है उन्हें काफी नुकसान हो सकता है क्योंकि वितरकों के लिए इसकी बिक्री से कोई फायदा नहीं दिखने वाला है। फंड कंपनियों ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है।

आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने एक ऑनलाइन मॉडल शुरू किया है जिसकी फीस 30 रुपये या 1.5 फीसदी है जो खुदरा ग्राहकों के लिए बेहद कम है। अरोड़ा का कहना है, 'इस वक्त हम कारोबार पर अपनी निगाह रखे हुए हैं।' जिनके वितरक अब अपनी सेवाएं नहीं देना चाहते है उन खुदरा निवेशकों के लिए यह अच्छी खबर है।

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