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रेवाड़ी के किसानों को आसमान ने रुलाया, धरती ने छकाया
राजीव कुमार / नई दिल्ली August 13, 2009

एक ओर आसमान से बरसात नहीं तो दूसरी तरफ जमीन में खारा पानी। आखिर खेतों में पानी दे तो कहां से?

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के किसानों के सामने इन दिनों यही यक्ष सवाल मुंह बाए खड़ा है। सरकार भी बेबस है। एक फीसदी से भी कम किसानों ने मीठे पानी के लिए जमीन के भीतर 500 फुट का बोरिंग करवा रखा है।

लेकिन इस मीठे बोरिंग के जरिए अपने खेतों में पानी देना आर्थिक रूप से हर किसान के लिए मुमकिन नहीं।  जिले में इस साल बाजरे की 50 फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है। अब तो किसान एवं सरकार ने दोनों ने ही सबकुछ भगवान  पर छोड़ दिया है।

बाजरे के लिए मशहूर रेवाड़ी के कृषि उपनिदेशक चेत राम मोर क़हते हैं, 'इस इलाके की जमीन में भीतर का 70 फीसदी पानी खारा है। बारिश के साथ इस पानी का इस्तेमाल तो खेतों में किया जा सकता है, लेकिन बिना बारिश के नहीं।

गत 23 जुलाई को इलाके में आखिरी बारिश हुई थी। 50 फीसदी से अधिक फसल सूख चुकी है। अब तो किसानों को सरसों की फसल के लिए खेतों को जोतने की सलाह दी जा रही है ताकि सरसों का अधिक उत्पादन हो सके।'

किसान भी मन ही मन हालात से समझौता कर चुके हैं। रेवाड़ी से 11 किलोमीटर दूर राजपुर गांव के बुध राम अब खेत का आसरा छोड़ दूध बेचने लगे हैं। बुध राम के पास पांच बीघा खेत है और उस पर 6,000 रुपये से अधिक का कर्जा हो गया है। अब वह और कर्ज नहीं लेना चाहता।

इसी गांव के दूबे सिंह कहते हैं, 'खेतों में मीठा पानी पटाने का इंतजाम करना अपने लिए कब्र खोदने जैसा है। एक एकड़ खेत में पानी पटाने का खर्च 500 रुपये आता है। फसल को कामयाब बनाने के लिए हर तीसरे दिन पानी पटाने की जरूरत है। यानी कि एक माह तक एक एकड़ खेत में पानी पटाने का खर्च 5000 रुपये आता है।'

बाजरे की कटाई अक्टूबर-नवंबर में शुरू होती है। सितंबर तक पानी पटाने पर एक एकड़ के लिए 10,000 रुपये की लागत आती है। फिर बाजरे को मंडी ले जाने का खर्चा अलग। इसके अलावा एक एकड़ में बुआई करने एवं खाद डालने की लागत 1500 रुपये तक आती है। कुल मिला कर यह खर्च 12,000 रुपये से अधिक का बैठता है।

एक एकड़ खेत में बाजरे का उत्पादन 40 मन यानी कि 16 क्विंटल होता है। इसकी कीमत मंडी में 11,200-11,500 तक मिलती है। कृषि उपनिदेशक मोर कहते हैं, 'सूखे का दौर काफी लंबा खींचता जा रहा है।

पिछले साल अगस्त माह के दौरान इलाके में 200 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गयी थी। इस साल अब तक शून्य बारिश दर्ज की गयी है। हम तो किसानों को यही सलाह दे रहे हैं कि वे अपनी फसल बीमा की प्रीमियम जरूर भरे।'

कृषि निदेशालय का यह भी कहना है कि जो फसल सूख चुकी है उसे खेतों में रखने से कोई फायदा नहीं है। सरसों की अच्छी पैदावार के लिए सूखी फसल को नष्ट कर किसानों को खेतों की जुताई अभी से शुरू कर देनी चाहिए।       

सूखे ने मारा

हरियाणा के रेवाड़ी इलाके में 70 फीसदीपानी खारा
कृषि विभाग के मुताबिक रेवाड़ी में बाजरे की आधी फसल सूख चुकी
पिछले साल अगस्त के दौरान इलाके में 200 मिलीमीटर बारिश
सरकार एवं किसान दोनों हुए बेबस

Keyword: Clouds makes cry, land cheated with rewari's farmers,
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