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दाल के आयातित भाव और खुदरा भाव में भारी अंतर
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली August 10, 2009

दाल आयातकों का कहना है कि अरहर की आयातित दाल की कीमतों में तकरीबन 8-10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है। फिर भी बाजार में दाल के भाव तेज है।

निजी आयातकों ने सरकार से उन्हें आयात में 15 फीसदी की सब्सिडी  देने की भी मांग की है। दूसरी तरफ कर्नाटक, महाराष्ट्र जैसी जगहों पर आर्द्रता की कमी के कारण दाल के रकबे में बढ़ोतरी के बावजूद उपज में इजाफे की उम्मीद नहीं की जा रही है।

दाल आयातकों के मुताबिक सरकार दाल का आयात सरकारी एजेंसी के जरिए करती है। इन एजेंसियों को आयात पर 15 फीसदी की सब्सिडी दी जाती है। जबकि निजी आयातकों को सरकार की तरफ से कोई छूट नहीं मिलती।

लिहाजा सरकारी एजेंसी ऊंची कीमत पर भी दाल का आयात आसानी से कर लेती हैं। पल्सेज इमपोर्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी सुरेश अग्रवाल ने मुंबई से बताया कि  निजी आयातक दाल सब्सिडी नहीं मिलने के कारण सरकारी एजेंसियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते हैं।

सरकारी सब्सिडी उन्हें भी मिलती तो दाल के निजी आयात में 80 फीसदी  तक की गिरावट नहीं होती। इन दिनों पिछले दो महीनों के मुकाबले मात्र 15-20 फीसदी दाल का आयात किया जा रहा है। भारत हर साल अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए 25-30 लाख टन दाल का आयात करता है। अरहर दाल का इन दिनों 1200 डॉलर प्रति टन की दर से आयात किया जा रहा है।

आयातकों ने बताया कि इन दिनों अरहर दाल की आयातित कीमत 54 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि मई के दौरान यह 60 रुपये प्रति किलोग्राम थी। दाल को तैयार करने एवं अन्य खर्च लगाकर थोक मंडी में दाल की कीमत 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक बैठती है। अग्रवाल आश्चर्य करते हैं कि फिर भी खुदरा बाजार में 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक दाल की कीमत चली गयी है।

दाल की ऊंची कीमत के कारण इस साल खरीफ के दौरान अरहर, उड़द के साथ मूंग के रकबे में पिछले साल के मुकाबले क्रमश: 24, 4.7 एवं 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। इस साल 31 जुलाई तक कुल 73.58 लाख हेक्टेयर जमीन पर दलहन की बुआई की गयी है जो कि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 9.6 फीसदी अधिक है।

लेकिन दाल आयातकों का कहना है कि दलहर उत्पादक प्रमुख राज्यों में इस साल आर्द्रता की कमी रही। इसलिए रकबे में बढ़ोतरी के अनुपात में उपज में बढ़ोतरी नहीं होगी। आयातकों के मुताबिक अगले माह से अफ्रीकी देशों से अरहर दाल का आयात शुरू हो जाएगा।

उक्रेन एवं कनाडा से सितंबर से पीली मटर का आयात शुरू होगा। तो नवंबर से ऑस्ट्रेलिया से दालों का आयात किया जाएगा। म्यांमार की नयी फसल अब जनवरी में आएगी। भारत में अरहर दाल एवं अन्य दालों की नयी आवक नवंबर से शुरू होगी।  

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