बिजनेस स्टैंडर्ड - अमरूद किसानों की उम्मीदों में घुन
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अमरूद किसानों की उम्मीदों में घुन
ग्लोबल वार्मिंग से वक्त से पहले पके अमरूद, बारिश नहीं होने से लग गए कीड़े और बीमारियां
विष्णु पाण्डेय / कानपुर July 21, 2009

वैश्विक स्तर पर हो रही तापमान वृद्धि से तो पहले से ही कई दिक्कतें पैदा हो रही हैं।

ऊपर से मॉनसून में देरी ने इन समस्याओं को और बढ़ा दिया है। मध्य उत्तर प्रदेश में अमरूद उत्पादक फिलहाल इन दोनों समस्याओं से ही जूझ रहे हैं।

बढ़ते तापमान की वजह से इस साल अमरूद की फसल वक्त से पहले ही तैयार हो गई। लेकिन फसल पर्याप्त नहीं हो पाई और मॉनसून में देरी ने बाकी की कसर पूरी कर दी। वक्त पर बारिश न होने की वजह से हजारों एकड़ में फैले अमरूद के बगीचों में कीड़े और बीमारियों ने भी तगड़ा हमला बोल दिया है।

फल और सब्जी व्यापारी संघ (एफवीएमए) के अध्यक्ष नवीन चावला ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि  कारोबारियों ने अमरूद के वायदा कारोबार पर 250 करोड़ रुपये का दांव लगाया है लेकिन फसल वक्त से पहले पकने पर मामला गड़बड़ हो गया है। वहीं स्थानीय बाजारों की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है।

चावला का कहना है, 'फल तय वक्त से 25 दिन पहले पक गया और हालात यह हैं कि हमें किसी भी कीमत पर इनको बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।' मॉनसून में देरी से भी फल में कई तरह की बीमारियां और कीड़े लग गए हैं जिसके कारण उत्पादक भी किसी भी कीमत पर फसल बेचना चाह रहे हैं।

अमरूद भारत में चौथा सबसे ज्यादा पैदा होने वाला फल है। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार और आंध्र प्रदेश में भी अच्छी खासी तादाद में अमरूद का उत्पादन होता है। अमरूद उत्पादक इस साल मई में काफी खुश थे। इसकी वजह तय वक्त पर अमरूद की कोंपल फूटना और उसी वक्त हल्की बरसात होना था।

इस वजह से इन उत्पादकों को इस सीजन में बंपर उत्पादन की उम्मीद बंधी थी लेकिन अब इनकी उम्मीदों को पलीता लग चुका है। कन्नौज, फरूक्खाबाद, सिसरागंज, जाजमऊ और कानपुर जैसे स्थानीय बाजारों में अमरूद 60 से 80 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है।

अमरूद की इस हालत के बारे में कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर आर पी कटियार का कहना  है कि दिन में बेहद गर्मी और रात को होने वाली सर्दी की वजह से फल वक्त से पहले पक गया। अनुमान लगाया जा रहा है अगले 15 दिनों में पूरी फसल बगीचों से बाहर आ जाएगी।

हालांकि मंडियों में अमरूद की कीमत भले ही दम तोड़ रही हो लेकिन बिचौलिए इन हालात में भी भारी मुनाफा कमा रहे हैं। दरअसल फु टकर बाजार में अमरूद अभी भी 5 रुपये किलोग्राम के आसपास बिक रहा है और ये बिचौलिए जमकर मुनाफा बना रहे हैं।

पिछले पंद्रह सालों से अमरूद के वायदा कारोबार में लगे राघवेंद्र सिंह का कहना है, 'बाजार में इस तरह का माहौल बन जाना अच्छा नहीं है। इसकी वजह से अमरूद की फसल उगाने वालों और वायदा कारोबारियों दोनों को नुकसान हो रहा है।'

फीके अमरूद

गर्मी की मार और मॉनसून की बेरुखी से मुरझाया अमरूद उत्पादकों का चेहरा
वक्त से पहले पका फल, कम उत्पादन की आशंका
मॉनसून में देर होने से फल में कीड़ों और बीमारियों ने बोल दिया हमला

Keyword: Insects in hopes of guava farmers,
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