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एलएलपी की ये कठिन डगर
एलएलपी कानून के तहत अब तक सिर्फ71 कंपनियां हुई हैं पंजीकृत
सपना डोगरा सिंह / नई दिल्ली July 21, 2009

वित्त विधेयक, 2009 ने लिमिटेड लाइबलिटी पार्टनरशिप (एलएल-पी) इकाइयों से जुड़े कर ढांचे पर बातों काफी स्पष्ट कर दिया है।

साथ ही, कंपनियों को एलएलपी में बदलने को लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। लेकिन बड़ी फर्में खुद को एलएलपी घोषित करने की जल्दबाजी नहीं दिखा रही हैं।

एक अप्रैल से लागू हुए एलएलपी कानून के तहत अब तक सिर्फ 71 फर्मों ने ही खुद को एलएलपी फर्म के तौर पर पंजीकृत करवाया है। दरअसल, कर और दूसरे मामलों को लेकर सरकार का रुख अब भी साफ नहीं है।

कंपनी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ कंपनियों ने इस बारे में जानकारी भी मांगी थी, लेकिन इससे आगे कुछ हुआ नहीं। साथ ही, चार्टर्ड अकाउंटेट (सीए), कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) और कॉस्ट अकाउंटेट अपने लिए किसी एलएलपी को स्थापित भी नहीं कर सकते हैं। इसके लिए उन संस्थानों के कानून में फेरबदल करना होगा, जो इन पेशेवरों को नियामक संस्था के रूप में काम करती हैं।

एलएलपी की कॉर्पोरेट संस्था होती है और देश के कानून के मुताबिक कोई भी कॉर्पोरेट संस्था ऑडिटिंग का काम नहीं कर सकती है। साथ ही, कोई कॉस्ट अकाउंटेट, किसी सीए या सीएस फर्म में हिस्सेदार भी नहीं हो सकता है। यही कानून सीए और सीएस पर भी लागू होता है।

इसके लिए इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीएआई) कानून, इंस्टीटयूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई), (आईसीएस- आई) कानून और इंस्टीटयूट ऑफ कॉस्ट ऐंड वर्क्स अकाउंटेट्स ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) कानून में भी फेर बदल करना पड़ेगा।

आईसीडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष कुणाल बनर्जी के मुताबिक इंस्टीटयूट ने इस बारे में कानून में फेरबदल के लिए सरकार को पहले ही सुझाव दे दिया है, ताकि कॉस्ट अकाउंटेट दूसरे पेशेवरों के साथ मिलकर एलएलपी फर्मों की स्थापना कर सकें। इसी तरह, आईसीएसआई भी सरकार को इस बाबत अपनी सिफारिशें सौंप देगी।

संस्था के सचिव और सीईओ एन.के. जैन का कहना है कि, 'आईसीएसआई की कॉन्उसिल इस बारे में सावधानी से कदम उठा रहे हैं कि क्या एक सीएस अपनी सेवाएं देने के लिए एलएलपी को स्थापित कर सकता है।' आईसीएआई के अध्यक्ष से बात नहीं हो सकी क्योंकि वे इस वक्त मुल्क से बाहर हैं।

कंपनी मामलों के मंत्रालय के बड़े अधिकारी के मुताबिक सरकार भी इस पहलू पर विचार कर रही है और संसद के अगले सत्र में इन तीनों पेशेवर संस्थानों के कानून में फेरबदल कर रही है। अधिकारी ने कहा कि,'ये तो छोटे फेरबदल हैं।'

वित्त विधेयक, 2009 के मुताबिक किसी कंपनी का एलएलपी में परिवर्तन से कर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, विश्लेषकों के मुताबिक इस पर और स्पष्टता की जरूरत है।

प्राइसवाटरहाउस कूपर्स के कार्यकारी निदेशक हेमल जोबालिया ने बताया कि, 'जो कंपनियां एलएलपी में परिवर्तित होना चाहती हैं, उन्हें परिवर्तन के लिए कर चुकानी पड़ेगी। वित्त विधेयक में इस पर स्पष्टता नहीं है।' साथ ही, जोबालिया के मुताबिक स्टैम्प डयूटी पर भी खर्च करना पड़ेगा।

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