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छोड़ो कल की बात पुरानी, नए निवेश की लिखिए कहानी
निवेश
अमर पंडित /  07 20, 2009

संसद में बजट पेश होने के बाद शेयर बाजार सर्द पड ग़या और कुछ ही दिनों में बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक 14,900 से फिसलकर 13,400 अंकों के स्तर पर आ गया।

गिरावट का सिलसिला कुछ दिन तक जारी रहा, लेकिन फिर उसके बाद कारोबार में तेजी आई है और यह एक बार फिर 14,300 के अंकों के स्तर पर पहुंच चुका है। अचानक हुई इस या गिरावट या तेजी के पीछे कई कारण गिनाए जा सकते हैं और उनकी व्याख्या भी की जा सकती है। पर क्या मौजूदा तेजी के दौरान वे लोग शेयरों में निवेश कर सकते हैं जो बाजार में उतरने की योजना बना रहे हैं?

सच्चाई यह है कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और खरीदारी के लिए बताए दा रहे कुछ बेवकूफाना स्तर चिंता पैदा करते हैं और अंत में लोग कोई फैसला नहीं कर पाते हैं। जब पिछले साल सितंबर में सेंसेक्स 12,500 अंकों के स्तर पर आया तो बाजार पर नजर रखने वाले एक विश्लेषक का कुछ यूं कहना था 'खरीदारी के लिए यह उपयुक्त समय है और मैं निवेश करने की तैयारी में जुटा हूं।

लेकिन इसके अगले ही कुछ दिनों बाद सेंसेक्स ने फिर गच्चा खाया और और इसमें 40 फीसदी की गिरावट आई। अगर 12,000 का स्तर निवेश करने के लिहाज से बेहतर था तो फिर 8,000 का स्तर खरीदारी के लिए उपयुक्त नहीं है? ज्यादातर इस बात से सहमत होंगे।

लेकिन कई लोग अपनी खरीद को अंजाम नहीं दे पाए क्योंकि कुछ लोग चीख-चीख कह रहे थे कि सेंसेक्स तो 6000 के स्तर तक गिरेगा। अगले कुछ महीनों में निवेशक की यह भावना भी बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ ऊपर नीचे होती रही और बेचारा निवेशक एक रुपया भी निवेश नहीं कर पाया।

शेयर बाजार में निवेश करने वाले कई लोग अभी भी इंतजार में हैं। हर गिरावट पर उनका बस यही कहना है कि बाजार में अगर 10 से 15 फीसदी की गिरावट आए तो निवेश किया जाए। लेकिन बजट के बाद गिरावट के बावजूद ऐसे लोग निवेश नहीं कर पाए हैं। वे अभी भी इंतजार ही कर रहे हैं।

मान लीजिए कि आपने किसी अच्छी कंपनी में 1 लाख रुपये का निवेश किया है और अगले एक साल के दौरान इसमें 40 फीसदी की गिरावट आ जाती है। लेकिन फिर अगले चार साल में आपका निवेश बढ़कर 2 लाख रुपये हो जाता है। तो क्या पांच साल के बाद आप खुश होंगे?

निश्चित तौर पर अधिकांश लोग पांच साल तक सालाना 15 फीसदी के चक्रवृध्दि रिटर्न के साथ खुश होंगे लेकिन पहले साल में अपने निवेश में सेंध देखकर अधिकांश लोगों के चेहरे का रंग जरूर उतर गया होगा। यही वह समय होता है जब लोग तार्किक ढंग से सोचना छोड़ देते हैं और वे बिकवाली या ज्यादा नहीं खरीदने जैसा कदम उठाते हैं और अपने आसपास की बातें सुनकर ही फैसला कर देते हैं।

ऊपर के उदाहरण में एक लाख रुपये के निवेश ने पांच साल की अवधि में प्रति वर्ष 15 फीसदी का प्रतिफल दिया लेकिन क्या सभी निवेशक इतनी ही अवधि में ऐसा रिटर्न हासिल कर पाते हैं? निश्चित तौर पर नहीं, निवेश रिटर्न और निवेशक रिटर्न में बहुत बडा अंतर होता है। बाजार में गिरावट के समय निवेशक दहशत में रहते हैं और निवेश डूबने के डर से बिकवाली करने लगते हैं या फिर इंतजार करते हैं।

दूसरी तरफ ऐसे निवेशक, जिन्होंने बाजार के निचले स्तर पर जाने के बाद भी साहस दिखाकर निवेश किया, एक साल के दौरान उनकेनिवेश पर उन्हें 23 फीसदी रिटर्न मिला। वास्तव में जब आप शेयर बाजार में निवेश करना शुरू करते हैं तो बाजार में गिरावट आने की स्थिति में आपको खुश होना चाहिए क्योंकि गिरावट के समय निचले स्तरों पर आपको अधिक खरीदारी का मौका मिलता है।

यह एक अत्यंत ही सधारण सिध्दांत है लेकिन इसे अमली जामा पहनाना काफी मुश्किल है। निचले स्तर या कहें कि सबसे सस्ते स्तर पर निवेश की नीति एक खास खांचे में ऐसी बांध दी जाती है कि बाजार गिरा हुआ होने के बावजूद लोग इंतजार करते हैं।

तो क्या निचले स्तर पर दीर्घ अवधि के लिए निवेश करना इतना मायने रखता है कि लोग इसके बारे में चिंतित होकर अपनी नींद गंवाते हैं और अक्सर गलत निर्णय कर डालते हैं जिससे शेयर बाजार में आपकी किस्मत गच्चा खा जाती है?

मान लीजिए वर्ष 1991 में उदारीकरण का दौर के समय में आपने निवेश करना सुरू किया। अगर उस समय से निचले स्तर पर आप निवेश करने का साहस दिखाते आए हैं तो 1 जून 2009 तक आपका सालाना चक्रवृध्दि रिटर्न 15.88 फीसदी होना चाहिए।

दूसरी तरफ अगर आपने हर साल ऊपरी स्तर पर निवेश किया होता तो आपका सालाना चक्रवृध्दि रिटर्न 11.78 फीसदी रहा होगा। अगर आप हर साल एक निश्चित तिथि, मान लीजिए 1 जनवरी को , पर निवेश करते रहे हैं तो उस स्थिति में आपका रिटर्न आश्चर्यजनक रूप से 15.77 फीसदी होता। किसी निश्चित तिथि और सबसे निले स्तर की तिथि में निवेश करने पर अंतर प्रति वर्ष मात्र 0.11 फीसदी है।

आइए, इसी साल 9 मार्च के आंकडों पर नजर डालते हैं जब सेंसेक्स इस साल अपने न्यूनतम स्तर पर था। जरा सोचिए, 0.11 फीसदी का मामूली अंतर आपके लिए महत्वपूर्ण है? ज्यादातर निवेशकों का जवाब नहीं होगा।

प्रमुख बातें

सूचकांकों के स्तर को लेकर ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है चाहे 15 या 20 सालों के लिए ही क्यों न हो।

अगर आप एकमुश्त निवेश करने का साहस नहीं जुटा पाते हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। निरंतरता के साथ हर महीने या हरेक तिमाही या अपनी सुविधानुसार निवेश करें। वास्तव में किसी खास तिथि पर किए गए मासिक निवेश पर रिटर्न प्रत्येक साल के निम्नतम स्तर पर किए गए निवेश से प्राप्त प्रतिफल के समान ही होता है।

 पिछले 18 सालों में भारतीय शेयर बाजार ने कई तरह के घोटाले, गिरावट और अन्य दिक्कतें देखी हैं। लेकिन घरेलू और वैश्विक कारणों के बावजूद पिछले 18 सालों में अगर हर साल एक निश्चित तारीख पर निवेश किया होता तो 9 मार्च 2009 को 12.08 फीसदी सालाना का प्रतिफल मिलता।

बाजार कई सालों तक गिरा रह सकता है, लेकिन अगर आपने एक साल में सबसे ऊंचे स्तर पर निवेश किया है तो अंत में अगर आपको कुछ सालों के लिए निचले स्तर पर निवेश करने का मौका मिलता है तो आपको खुश होना चािहए। हमेशा आपको अपना निवेश बढ़ता दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।

भारत जैसे बाजार में निवेश की अपार संभावना है। हाल में ही एक कर विश्लेषक ने योजना आयोग का नाम बदल कर क्रियान्वयन आयोग रखने के बारे में काफी दिलचस्प बात कही है।

जैसे कई आयोग और मंत्रालय योजनाओं को लागू नहीं कर पाते हैं, इसी तरह कई निवेशक भी अपने निवेश को लेकर सही फैसला नहीं कर पाते हैं। निवेश संबंधी योजनाओं को लागू किया जाना खासा महत्वपूर्ण है और इसके लिए अभी उपयुक्त समय है।

लेखक माई फाइनैंशियल एडवाइजर के निदेशक हैं।

Keyword: forget yesterday's talk, write new story of investment,
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