बिजनेस स्टैंडर्ड - मांग और आपूर्ति के नियम शेयर बाजारों में भी होते हैं लागू
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मांग और आपूर्ति के नियम शेयर बाजारों में भी होते हैं लागू
तकनीकी ज्ञान - वह बिंदु जहां आपूर्ति मांग से अधिक होती है और कीमतों का बढ़ना रुक जाता है वहां कीमतों
विनोद शर्मा /  06 28, 2009

जिस प्रकार मांग और आपूर्ति का नियम जिंदगी के हर कदम पर लागू होता है, उसी प्रकार शेयरों की कीमतें भी मांग और आपूर्ति से प्रभावित होती हैं।

ऐसा कहा जा सकता है कि मांग तेजड़िये और खरीदारी के समतुल्य है। जैसे- जैसे मांग बढ़ती है कीमतें भी बढ़ती है और आपूर्ति बढ़ने पर कीमतें घटती हैं।

समर्थन कहां मिलता है?

जैसे-जैसे कीमतें कम होती हैं वैसे-वैसे खरीदारों का झुकाव खरीदारी की तरफ अधिक होता है और बेचने वालों की बिकवाली की इच्छा कम होती जाती है। वह बिन्दु जहां मांग आपूर्ति से अधिक होती है और कीमतों को घटने से रोकती हैं, समर्थन बन जाती है।

मानव व्यवहारों की वजह से ही समर्थन और प्रतिरोध की मौजूदगी बनी हुई है। कई वैसे निवेशक जिन्होंने किसी खास शेयर को निवेश के लिए चुन लिया है तब निवेश करने से कतरा सकते हैं जब कीमतों में गिरावट का दौर शुरू हो गया हो।

एक बार जब कीमतें बढ़नी शुरू हो जाती हैं तो वे अफसोस करना शुरू करते हैं। वे कीमतें कम होने के समय खरीदारी नहीं करते और फिर ठान लेते हैं कि अबकी बार कीमतें जब फिर से उसी स्तर पर पहुंचेंगी तो खरीदारी करेंगे।

अगर, उस स्तर पर खरीदारी की मांग आपूर्ति की तुलना में अधिक होती है तो फिर से कीमतों में तेजी आएगी। यहां मनोविज्ञान लागू होने लगता है। कीमतों में जितनी मजबूती आती है समर्थन स्तर की महत्ता उतनी ही बढ़ती जाती है।

समर्थन का स्तर हमेशा वही बना रहे या उस स्तर से नीचे नहीं जाए, ऐसा नहीं है। समर्थन स्तर से नीचे गिरावट आना इस बात का संकेत है कि बिकवाली का एक नया दौर शुरू होने वाला है और खरीदारी में दिलचस्पी घट गई है।

समर्थन स्तर एक बार टूटने के बाद, दूसरा समर्थन निचले स्तर पर बनाया जाता है। कभी-कभार कीमतों में काफी अधिक अस्थिरता देखी जाती है और इंट्रा-डे कारोबार में समर्थन कीमतें समर्थन स्तर से नीचे चली जाएं तो उसे समर्थन स्तर का टूटना नहीं मानते हैं। इसे हम  'व्हिपसॉ' कहते हैं।

प्रतिरोध क्या है?

जैसे-जैसे किसी शेयर की कीमतें बढ़ती हैं, वैसे-वैसे बिकवाली करने वालों का झुकाव बेचने के प्रति बढ़ता जाता है और खरीदार कीमतों के उच्च स्तर पर खरीदारी नहीं करना चाहते। वैसा बिन्दु जहां आपूर्ति मांग से अधिक होती है और कीमतों का बढ़ना रुक जाता है वहां कीमतों की वृध्दि में प्रतिरोध उत्पन्न होता है।

प्रतिरोध कीमतों का वह स्तर है जहां बिकवाली की वजह से कीमतों का बढ़ना लगभग रुक सा जाता है। जैसे ही कीमतें प्रतिरोध स्तर से नीचे आती हैं तो वैसे निवेशक जो कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी की आशा रखे होते हैं इस बात को समझने लगते हैं कि वे शेयरों को बेचने से चूक गए हैं।

और जब कीमतें बढ़ कर प्रतिरोध स्तर तक पहुंचती हैं तो वे उस समय बेचने पर विचार करते हैं। इससे वैसे सभी निवेशकों की वजह से दबाव बनता है तो पहले शेयर खरीदने से चूक गए हैं। इससे प्रतिरोध स्तर का टूटना मुश्किल बन जाता है।

प्रतिरोध स्तर का महत्व तब और बढ़ जाता है जब उस स्तर से कीमतें कई बार गिर जाती हैं। समर्थन की तरह ही जरूरी नहीं कि प्रतिरोध का स्तर भी बरकरार रहे या न टूटे। प्रतिरोध स्तर के टूटने का मतलब है कि तेजड़ियों ने मंदड़ियों को पछाड़ दिया है। प्रतिरोध स्तर से कीमतों का ऊपर जाना खरीदारी में एक नई दिलचस्पी औरया बिकवाली की तरफ रुझान कम होने का संकेत देता है।

समर्थन और प्रतिरोध में संबंध

जब कीमतें समर्थन स्तर को तोड़ कर नीचे खिसक आती हैं तो वह प्रतिरोध स्तर बन जाती हैं। इसी प्रकार अगर कीमतें प्रतिरोध स्तर से अधिक बढ़ जाती हैं तो प्रतिरोध स्तर समर्थन स्तर में बदल जाता है। इंट्रा-डे कारोबार में समर्थन और प्रतिरोध स्तर का टूटना महत्वपूर्ण नहीं होता। सही मायने में प्रतिरोध स्तर या समर्थन स्तर के टूटने के लिए क्रमश: कीमतों को उससे ऊपर या नीचे बंद होना होता है।

लेखक अनाग्रम कैपिटल के निदेशक और शोध प्रमुख हैं।

Keyword: Demand & Supply rule is applicable in also Share Markets,
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