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ग्रामीण रोजगार पर और धन की बौछार
रजत रॉय / कोलकाता June 02, 2009

केंद्र की संप्रग सरकार ने सामाजिक क्षेत्र में आवंटन बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी भी इस बाबत संकेत दे चुके हैं कि सरकार सामाजिक क्षेत्र का बजट बढ़ाएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पहले ही सभी राज्य सरकारों से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) और पिछड़ा क्षेत्र अनुदान फंड (बीआरजीएफ) के तहत मिलने वाले आवंटन से संबंधित प्रस्ताव मांगे हैं।

राज्यों को यह रिपोर्ट मंत्रालय को 15 दिन के भीतर सौंपनी है। पश्चिम बंगाल के पंचायती राज विभाग के मुख्य सचिव दिलीप घोष ने संकेत दिए हैं कि राज्यों को इन योजनाओं के लिए दी जाने वाली रकम में 50 फीसदी का इजाफा किया जा सकता है।

दरअसल अपने पिछले कार्यकाल के दौरान संप्रग ने नरेगा और कम से कम 100 दिन के लिए रोजगार उपलब्ध कराने की योजना शुरू की थी। माना जा रहा है इन योजनाओं ने संप्रग सरकार को केंद्र में फिर से वापसी कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

केंद्र सरकार ग्रामीण इलाकों में गरीबों को उन्हीं के क्षेत्र में न्यूनतम वेतन पर 100 दिन के लिए रोजगार उपलब्ध करा रही है। मार्च 2009 के अंतरिम बजट में नरेगा के लिए 36,214 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इसमें से पश्चिम बंगाल को ही लगभग 1277 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था।

हालांकि कोई भी राज्य गरीबों के लिए 100 दिन का रोजगार मुहैया नहीं करा पाया था, इसीलिए सभी राज्यों के पास केंद्र सरकार द्वारा आवंटित की गई रकम बची हुई है। हालांकि पिछले साल राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु कुछ ऐसे राज्य थे, जहां गरीबों को औसतन 60-70 दिनों के लिए रोजगार उपलब्ध कराया गया।

जबकि इस योजना के तहत राष्ट्रीय औसत सिर्फ 50 दिनों का ही रहा। संप्रग सरकार नरेगा के लिए और धन आवंटित कर इस योजना को सफल बनाने की भरपूर कोशिश कर रही है। इस योजना को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए केंद्र राज्यों को और बेहतर इन्सेंटिव भी दे रहा है।

पिछड़ा क्षेत्र अनुदान फंड (बीआरजीएफ) को सबसे पिछड़े इलाकों में नरेगा और बाकी गरीबी हटाने वाली योजनाओं को लागू करने से पहले बुनियादी सुविधाओं को मुहैया कराना है। देशभर के लगभग 250 जिलों को इस योजना के तहत लाया गया है। पिछले साल इन जिलों को लगभग 6,624 करोड़ रुपये की रकम आवंटित की गई थी।

पश्चिम बंगाल के 11 जिलों को ही बीआरजीएफ के तहत लगभग 1200 करोड़ रुपये दिए गए थे। लेकिन कई राज्यों में बीआरजीएफ राज्यों की जिला स्तरीय योजना का हिस्सा नहीं बन पाई।

दिलीप घोष ने बताया कि राज्य के ज्यादातर हिस्सों में जिला योजना आयोग काम ही नहीं करता है। इसीलिए बीआरजीएफ एक अलग योजना बनकर रह गई और अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाई। लेकिन अब संप्रग सरकार इस योजना को और रकम आवंटित कर इसमें नई जान फूंकने की कोशिश कर रही है।

Keyword: more raining of cash on rural employment,
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