बिजनेस स?टैंडर?ड - 20 प्रतिशत पूंजी गिरावट के लिए बचाकर रखें
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20 प्रतिशत पूंजी गिरावट के लिए बचाकर रखें

अभिषेक कुमार /  11 24, 2022

मिरई ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी नीलेश सुराणा का कहना है कि एकमुश्त निवेश करने वाले लोगों को अपनी 20 प्रतिशत राशि गिरावट में खरीद के लिए बचाकर रखनी चाहिए। अभिषेक कुमार के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वित्त क्षेत्र फंड प्रबंधकों का पसंदीदा है और उन क्षेत्रों के बारे में भी बातचीत की जो अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

एक साल के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार में तेजी आई है। क्या यह इक्विटी निवेशकों के लिए अच्छे दिन का संकेत है?

भारतीय बाजार मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद मजबूत हैं और उन्हें चक्रीयता और ढांचागत कारकों से मदद मिल रही है। चक्रीयता के संदर्भ में, कई बड़े क्षेत्र वृद्धि की राह पर बढ़ने को तैयार हैं और कंपनियों तथा बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट से आय में सुधार लाने में मदद मिलेगी। ढांचागत तौर पर, भारत में दीर्घावधि वृद्धि के लिए मजबूत और टिकाऊ वाहक हैं। उचित मूल्यांकन को देखते हुए, एसआईपी के जरिये निवेश इक्विटी में दीर्घावधि आवंटन का पसंदीदा विकल्प हो सकता है।

जब पिछले साल बाजार तेजी के दौर से गुजर रहे थे, तो कई निवेशकों ने इक्विटी फंडों से अपनी पूंजी निकाल कर बैलेंस्ड एडवांटेज और अन्य हाइब्रिड योजनाओं में लगाई थी। अब बाजार में बदलाव आया है, तो क्या निवेशकों को अपना पैसा इक्विटी फंडों में लगाना चाहिए?

वृहद अनिश्चितताओं को देखते हुए, बाजार अल्पावधि दृष्टिकोण से उचित दिख रहे हैं। इसलिए, नया निवेश करने की संभावना तलाश रहे निवेशक या तो बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों या एसआईपी के जरिये इक्विटी फंडों में पैसा लगा सकते हैं। हालांकि एकमुश्त निवेश करते वक्त, संभावित गिरावट को ध्यान में रखकर 20 प्रतिशत हिस्सा अलग बचाकर रखें।

 योजनाओं का चयन स्मॉल-कैप श्रेणी में चुनौतीपूर्ण कार्य है। निवेशकों को किस तरह चयन करना चाहिए?

कई पेशेवर सलाहकार, एजेंसियां और वेबसाइट हैं जो सही निवेश योजना का सुझाव देने के लिए विभिन्न मानकों का इस्तेमाल करती हैं। निवेशकों को पिछले निरंतर 5 साल के प्रतिफल, जोखिम ढांचे से संबंधित अनुपात, निवेश प्रबंधक के रिकॉर्ड आदि पर ध्यान देना चाहिए। 

कई वैश्विक बाजारों में भारत के मुकाबले ज्यादा गिरावट आई है। क्या निवेशकों ने अपना अंतरराष्ट्रीय दांव बढ़ाया है?
शानदार वृद्धि की संभावना की वजह से भारतीय बाजार मुख्य दीर्घावधि आवंटन के लिए उपयुक्त बने हुए हैं। जानकार निवेशक करीब 10-15 प्रतिशत निवेश वैश्विक बाजारों में करने पर विचार कर सकते हैं। उन्हें लार्जकैप अमेरिकी फंडों, जैसे एसऐंडपी टॉप-50 ईटीएफ पर ध्यान देना चाहिए। अमेरिकी फंडों में मौद्रिक गिरावट का अतिरिक्त लाभ मिलता है।

वैश्विक निवेशकों की भारत में निवेश को लेकर स्थिति कैसी है?
वर्ष 2022 में, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने उतार-चढ़ाव की वजह से भारतीय बाजार से 22 अरब डॉलर की बिकवाली की और भारत को अपेक्षाकृत महंगा बाजार समझा गया। ऐसा लगता है कि वैश्विक फंड प्रबंधकों ने उभरते बाजार (ईएम) सूचकांक में भारत के भारांक की वृद्धि बढ़ाने में अपना उत्साह घटाया है। एमएससीआई में भारत का भारांक पिछले एक साल में काफी बढ़ गया।

वित्तीय शेयर फंड प्रबंधकों के पसंदीदा रहे हैं। क्या अभी भी इनकी लोकप्रियता बरकरार है?
हां, वित्त क्षेत्र पिछले 1-2 साल के दौरान हमारा पसंदीदा थीम रहा है और अभी भी वह हमारी पसंद बना हुआ है। इन शेयरों में ऋण वृद्धि और उचित मूल्यांकन की वजह से अच्छी तेजी की संभावना है। हम हेल्थकेयर, ऑटो एंसिलियरी और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी पर भी सकारात्मक हैं। 

फंड प्रबंधक के तौर पर, आपकी मौजूदा निवेश रणनीति क्या है?
हमने दो-आयामी नजरिये पर अमल किया है- अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में ज्यादा निवेश और शेष पूंजी आवंटन मजबूत वैल्यू वाले व्यवसायों से जुड़ा हुआ है। हमारी नकदी सभी फंडों में 3 प्रतिशत से कम बनी हुई है।
 
Keyword: एकमुश्त निवेश, मिरई ऐसेट इन्वेस्टमेंट,
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