बिजनेस स?टैंडर?ड - भू-जल स्तर रिपोर्ट में भू-जल की सही तस्वीर नहीं: विशेषज्ञ
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, December 07, 2022 09:56 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

भू-जल स्तर रिपोर्ट में भू-जल की सही तस्वीर नहीं: विशेषज्ञ

जल विशेषज्ञों का कहना है कि भू-जल स्तर के आकलन के लिए बनाई गई इकाइयां काफी बड़ी हैं और उनकी संख्या �
रुचिका चित्रवंशी /  11 22, 2022

देश में भू-जल स्तर के ताजा आंकड़ों से रीचार्ज में वृद्धि और निकासी में कमी आने का संकेत मिलता है लेकिन इससे भारत में वास्तविक स्थिति की सही तस्वीर संभवत: नहीं मिलती है। जल विशेषज्ञों का कहना है कि भू-जल स्तर के आकलन के लिए बनाई गई इकाइयां काफी बड़ी हैं और उनकी संख्या भी काफी कम है। ऐसे में सूक्ष्म स्तर की तस्वीर नहीं दिख सकती है।

भारत में गतिशील भू-जल संसाधन की 2022 की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल के दौरान देश भर में कुल वार्षिक भू-जल रीचार्ज में 2020 के पिछले आकलन के मुकाबले 1.29 अरब घन मीटर (बीसीएम) की वृद्धि हुई। जबकि निकालने योग्य कुल वार्षिक भू-जल संसाधनों में भी 0.56 बीसीएम की बढ़ोतरी हुई है।

सिंचाई, घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग के लिए वार्षिक भूजल निकासी में भी इस दौरान 5.76 बीसीएम की कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'मुख्य तौर पर मापदंडों में संशोधन, कुओं की गणना के आंकड़ों में संशोधन और भू-जल व्यवस्था में बदलाव के कारण इस प्रकार के अंतर दिख रहे हैं। '

साउथ एशिया नेटवर्क ऑफ डैम्स ऐंड रिवर्स के हिमांशु ठक्कर ने कहा, 'जमीनी वास्तविकता में कोई बदलाव नहीं हुआ है जिससे अतिरिक्त कमी दिखेगी। वृहद स्तर पर पिछले छह दशकों से वृद्धि की रुझान दिख रहा है। रीचार्ज में वृद्धि से भी समस्या है क्योंकि आर्द्र भूमि और नदी की तलछटी जैसी व्यवस्थाएं नष्ट हो रही हैं।

हमें पुख्ता सबूत चाहिए जो रिपोर्ट में मौजूद नहीं है।' कृषि क्षेत्र भू-जल संसाधनों का प्रमुख उपयोगकर्ता क्षेत्र है। भू-जल की कुल वार्षिक निकासी में सिंचाई की हिस्सेदारी करीब 87 फीसदी है। घरेलू एवं औद्योगिक उपयोग के लिए महज 30.69 बीसीएम भू-जल की निकासी होती है जो कुल निकासी का लगभग 13 फीसदी है।

जल-स्तर की तस्वीर साफ नहीं
कई जल विशेषज्ञों ने आकलन इकाइयों के चयन के संदर्भ में उपयोग की गई पद्धति पर सवाल उठाए हैं। आकलन तालुक अथवा तहसील जैसे प्रशासनिक स्तर पर किए गए हैं और इससे सूक्ष्म स्तर के परिदृश्य का पता नहीं चलता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार या समुदाय द्वारा बनाई जाने वाली किसी भी उपयोग योजना के लिए सूक्ष्म स्तर का डेटा होना आवश्यक है। 

पूर्व जल सचिव शशि शेखर ने कहा, 'भू-जल प्रशासनिक सीमाओं में नहीं बंधता है बल्कि यह आकार-प्रकार एवं जल-स्तर तक पहुंचने की क्षमता पर निर्भर करता है। इसलिए प्रशासनिक सीमाओं के दायरे में किए गए आकलन से सही उद्देश्य पूरा नहीं होगा।' शेखर ने कहा कि भारत भू-जल का सबसे अधिक दोहन होता है और इसलिए भू-जल स्तर के आकलन के लिए देश को एक किलोमीटर लंबी और एक किलोमीटर चौड़ी इकाइयों में विभाजित करना होगा और हरेक इकाई में पीजोमीटर के साथ एक अवलोकन कुआं हो ताकि भू-जल स्तर का निरीक्षण किया जा सके।

उन्होंने कहा, 'इस प्रकार की जानकारियों से मानव एवं मवेशियों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए फसलों के चयन में सरकार और समुदाय को मदद मिलेगी।'अध्ययन में कुल 7,089 आकलन इकाइयों को शामिल किया गया। शेखर ने कहा कि ये आंकड़े सही नहीं हैं क्योंकि इनमें से लगभग आधी इकाइयां तमिलनाडु क्षेत्र में हैं और शेष देश के अन्य हिस्सों को कवर करती हैं। उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु में आंकड़े फिरका स्तर पर जुटाए गए जो तालुक के मुकाबले छोटे हैं।

तमिलनाडु के एक तालुक में कई फिरकों के आंकड़े शामिल हैं। यही कारण है कि आंकड़ों से राज्य में भू-जल स्तर की बेहतर तस्वीर मिलती है।' विशेषज्ञों ने कहा कि प्रत्येक जिले में औसतन 9 आकलन इकाइयां हैं। ठक्कर ने कहा, 'वे मुख्य तौर पर तहसील स्तर की इकाइयां हैं। जाहिर तौर पर ये इकाइयां बड़ी हैं जो निष्कर्ष का प्रभावित कर सकती हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना भी महत्त्वपूर्ण है कि जल भराव वाले क्षेत्रों में कितनी वृद्धि हुई है।

देश में कुल 7,089 आकलन इकाइयों में से 1,006 इकाइयों यानी करीब 14 फीसदी क्षेत्र को अत्यधिक दोहन वाली श्रेणी में रखा गया है। इसी प्रकार 260 इकाइयों यानी करीब 4 फीसदी क्षेत्र को गंभीर श्रेणी में, 885 इकाइयों यानी करीब 12 फीसदी क्षेद्ध को कम गंभीर और 4,780 इकाइयों यानी 67 फीसदी क्षेत्र को सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।

आईआईटी दिल्ली  के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर एके गोसाईं ने भी कहा कि मौजूदा तकनीक कहीं अधिक परिष्कृत हैं और उससे कहीं अधिक सटीक आंकड़े मिल सकते हैं जबकि रिपोर्ट में आंकड़े लगभग में दिए गए हैं। उन्होंने कहा, 'भूमि और मृदा के उपयोग के आधार पर अब आप वास्तविक रीचार्ज के आंकड़े निकाल सकते हैं।'

बहरहाल, जल विशेषज्ञों ने हरेक दो साल बाद किए जा रहे आकलन का स्वागत किया है। उनका कहना है कि समुदायों के बीच ये आंकड़े जारी किए जाने चाहिए ताकि वे भू-जल स्तर के आधार पर अपनी जल उपयोगिता को निर्धारित कर सकें।केंद्रीय भू-जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) साल में चार बार जनवरी, अप्रैल या मई, अगस्त और नवंबर के दौरान भू-जल स्तर की निगरानी करता है।

Keyword: भू-जल स्तर, भू-जल संसाधन,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या देश में व्यापक तौर पर अपनाया जाएगा डिजिटल रुपया
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.