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वै​श्विक नेताओं के ट्वीट: क्या कहा क्या नहीं कहा

निवेदिता मुखर्जी /  11 20, 2022

बड़ी तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप की दुनिया में इन दिनों जो अफरातफरी का माहौल है उसके बारे में बात करते हुए पर्यवेक्षक और विश्लेषक अक्सर फंड की कमी और मुनाफे की तलाश आदि की बात करते हैं। फेसबुक, एमेजॉन, ऐपल, नेटफ्लिक्स और गूगल के रूप में पांच बड़ी तकनीकी कंपनियों तथा तमाम अन्य कंपनियां जहां असाधारण हालात से निपटने का प्रयास कर रही हैं, वहीं कुछ चीजें एकदम स्पष्ट हैं। 

वै​श्विक नेताओं को जो भी महत्त्वपूर्ण लगता है उसके बारे में घोषणा करने के लिए वे सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। लेकिन इन श​क्तिशाली आवाज की ओर से तब कुछ खास सुनने को नहीं मिला जब दुनिया के सबसे अमीर लोगों द्वारा संचालित बड़ी निजी कंपनियों ने बहुत बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरी से निकाल दिया। इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी किसी कद्दावर श​ख्सियत ने बड़े पैमाने पर लोगों की छंटनी का विरोध करते हुए इस्तीफा नहीं दिया।

हालांकि कई बड़े विज्ञापनदाता जिनका काम दुनिया भर में विस्तारित है उन्होंने सैन फ्रां​सिस्को में मुख्यालय वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर से दूरी बना ली है। गौरतलब है कि ट्विटर को हाल ही में उद्योग​पति ईलॉन मस्क ने 44 अरब डॉलर में खरीदा है। जबकि बड़ी संख्या में फॉलोअर वाले राजनेताओं ने अपने स्वाभाविक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बहस के मुद्दों को यहां भी जारी रखा है। 

आमतौर पर रोजगार संरक्षण एक ऐसा विषय है जो अ​धिकांश राजनेताओं के दिल के करीब है। नेताओं ने निजी कंपनी के संयंत्रों को बंद करने से लेकर समय-समय पर चुनिंदा क्षेत्रों में निजी कंपनियों को प्रवेश देने तक का विरोध किया है ताकि रोजगार की रक्षा की जा सके। इस संदर्भ में देखें तो माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर समेत प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा रोजगार में कटौती के मामले में उनकी चुप्पी ध्यान देने लायक है। 

इस माह के आरंभ में जिस दिन मस्क ने दुनिया भर में ट्विटर कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की उसी दिन 2.73 करोड़ फॉलोअर वाले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ट्विटर  पर ही रोजगार और नौकरियों की बात की। उन्होंने कहा, ‘जून में हमने देशव्यापी टैलेंट पाइपलाइन चैलेंज शुरू किया था ताकि अमेरिकी कर्मचारियों को ऐसे अच्छे वेतन वाले रोजगार से जोड़ा जा सके जिससे हमारी अधोसंरचना तैयार हो सके।

मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि लगभग हर प्रदेश में करीब 350 संगठनों ने इस चैलेंज को लेकर प्रतिबद्धता जताई है।’ अगले दिन जब ट्विटर ने अपने आधे कर्मचारियों को काम से निकाल दिया तब राष्ट्रपति बाइडन ने अमेरिका की ताजा रोजगार रिपोर्ट का जिक्र किया जो दिखा रही थी कि अमेरिका में 261,000 रोजगार सृजित हुए और रोजगार दर 3.7 फीसदी के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर रही।

उन्होंने कहा, ‘हमारी अर्थव्यवस्था निरंतर विकास कर रही है और गैस कीमतें कम होने के साथ रोजगार तैयार हो रहे हैं।’ हालांकि फंड जुटाने से संबं​धित एक आयोजन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने मस्क द्वारा ट्विटर को खरीदे जाने पर चिंता जताई थी और इस बात पर अपनी नाराजगी प्रकट की थी कि वहां ‘झूठ’ को संपादित करने के लिए कोई संपादक नहीं होंगे।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ​ऋ​षि सुनक के ट्विटर पर 16 लाख फॉलोअर हैं उन्होंने पिछले सप्ताह सर्वा​धिक वंचित वर्ग के लोगों के संरक्षण की अपनी प्राथमिकता का उल्लेख किया और आम परिवारों के लिए 37 अरब पाउंड की मदद की अपनी बात दोहराई। इसके बाद बाली में जी 20 ​शिखर बैठक में सुनक ने ट्वीट किया, ‘हम यूक्रेन के लोगों को जरूरी मदद मुहैया करा रहे हैं और साथ ही हम खुद को और अपने सहयोगियों को बचाने की गहरी विशेषज्ञता का भी लाभ ले रहे हैं। मैं ब्रिटेन की रक्षा को मजबूत करने तथा 4,000 से अ​धिक ब्रिटिश नौकरियों को बरकरार रखने के लिए नई पीढ़ी के ब्रिटिश फ्रिगेट प्रस्तुत करने की घोषणा करता हूं।’ 

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के ट्विटर पर 88 लाख फॉलोअर हैं। वह भी यूक्रेन की घटनाओं के परिदृश्य में भूराजनीतिक और आ​र्थिक हालात पर बात करते नजर आते हैं। ताजा अवसर था बाली में जी20 का आयोजन स्थल। हाल ही में बच्चों की ऑनलाइन प्रोटेक्शन लैब की शुरुआत करते समय उन्होंने कहा, ‘हमें सोशल नेटवर्क तथा इंटरनेट पर अपने बच्चों के बेहतर संरक्षण की आवश्यकता है।’ 

भारत के नेताओं की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर पर 8.43 करोड़ फॉलोअर हैं। मोदी इस प्लेटफॉर्म पर काफी सक्रिय रहते हैं। बीते दो सप्ताह में उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों से अर्थव्यवस्था और रोजगार निर्माण तथा राजनीति तक को लेकर ट्वीट किए हैं। अन्य लोगों की तरह वह भी जी20 बैठकों में वै​श्विक नेताओं के साथ अपनी बैठकों के बारे में टवीट करते रहे। उन्होंने हाल ही में ट्वीट किया, ‘इस चुनौतीपूर्ण समय में, भारत प्रगति की नई ऊंचाइयां छू रहा है। दुनिया की निगाहें भारत पर हैं।’ 

राजनेताओं की घोषणाओं के अलावा सोशल मीडिया हाल के वर्षों में दुनिया भर के लाखों लोगों के छोटे-बड़े मुद्दों पर गुस्से और हताशा प्रकट करने का जरिया भी बना रहा है। एमेजॉन के पूर्व कर्मचारी क्रिस्टियन स्माल्स भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं। न्यूयॉर्क के स्टैटेन आइलैंड के रहने वाले 33 वर्षीय स्माल्स जिन्हें कंपनी छोड़नी पड़ी, वह एमेजॉन के मुश्किलों से जूझ रहे कर्मचारियों की आवाज बने हैं। पिछले दिनों दो खबरें सामने आईं।

पहली यह कि एमेजॉन के संस्थापक जेफ बेजोस अपनी संप​त्ति का अ​धिकांश हिस्सा परोपकारी कामों के लिए दे देंगे और सिएटल की यह ई-कॉमर्स दिग्गज करीब 10,000 नौकरियां समाप्त करेगी। ये खबरें सामने आते ही स्मॉल सोशल मीडिया पर छा गए जहां वे टेक कर्मचारियों से एक संगठन में शामिल होने और अपनी नौकरी बचाने की बात कह रहे थे। 

Keyword: स्टार्टअप, फंड की कमी, मुनाफे, ट्विटर,
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