बिजनेस स?टैंडर?ड - पूरे साल में 7 फीसदी विकास दर की उम्मीद
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पूरे साल में 7 फीसदी विकास दर की उम्मीद

दूसरी तिमाही में 6.1 से 6.3 फीसदी के बीच रह सकती है जीडीपी वृद्धि दर
मनोजित साहा और भास्कर दत्ता / मुंबई 11 18, 2022

मुद्रास्फीति में नरमी के संकेत के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अर्थव्यवस्था की ​स्थिति रिपोर्ट में उम्मीद जताई ​है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.1 से 6.3 फीसदी के दायरे में रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर ऐसा होता है तो पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7 फीसदी रह सकती है। आरबीआई ने अक्टूबर में मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान विकास दर के 7 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया था। 

जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी के आंकड़े इस महीने के अंत तक आएंगे। मौद्रिक नीति की समीक्षा में दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्र और कार्मिकों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया, ‘उच्च आवृ​त्ति वाले संकेतकों के आधार पर दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.1 से 6.3 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान है। अगर यह वृद्धि दर हासिल होती है तो पूरे साल के लिए 7 फीसदी वृद्धि दर प्राप्त की जा सकती है।’ 

रिपोर्ट में कहा गया कि अर्थव्यवस्था में आपूर्ति पक्ष मजबूत हो रहा है। इसके अनुसार, ‘मुद्रास्फीति में कमी के संकेत दिखने के साथ ही घरेलू व्यापक आर्थिक परिदृश्य में मजबूती है, लेकिन यह वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील भी है।’

देश के अक्टूबर महीने में खुदरा मुद्रास्फीति दर घटकर तीन महीने के निचले स्तर 6.77 फीसदी रह गई जो सितंबर में 7.41 फीसदी पर थी। इससे मौद्रिक नीति समिति दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी करने के लिए प्रेरित हो सकती है। इस साल मई से अब तक रीपो दर में 190 आधार अंकों का इजाफा किया जा चुका है, जिससे रीपो दर 5.9 फीसदी पर पहुंच गई है।

स्थानीय मुद्रा में हालिया सुधार पर रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका में मुद्रास्फीति के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा कम रहने से दुनिया भर के बाजारों में तेजी आई। इसका असर रुपये पर भी दिखा। 27 अक्टूबर से 11 नवंबर के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में 2.2 फीसदी की मजबूती आई है, जबकि ब्रिटिश पाउंड की तुलना में रुपया 1.2 फीसदी और यूरो के मुकाबले 0.5 फीसदी मजबूत हुआ है। हाल के समय में रुपये में नरमी की वजह से आयात बिल बढ़ने से घरेलू बाजार में मुद्रास्फीति का दबाव भी बढ़ा है। 

बैंकिंग तंत्र में तरलता की ​​स्थिति पर आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि तरलता की ​स्थिति को सामान्य किया जा रहा है लेकिन यह अभी भी अ​धिशेष ​स्थिति में है। आरबीआई दैनिक आधार पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी खींच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वा​णि​ज्यिक बैंकों की उधारी में वृद्धि हुई है और सेवा, पर्सनल लोन तथा उद्योग एवं कृ​षि ऋण की मांग भी बढ़ी है। बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 16 फीसदी से ऊपर बना हुआ है जो बैंकिंग क्षेत्र की पूंजी की बेहतर ह​स्थिति को दर्शाता है। बैंकों की सकल गैर-निष्पादित आ​स्तियों (जीएनपीए) में लगातार कमी आ रही है और शुद्ध एनपीए घटकर कुल परिसंप​त्ति के 1 फीसदी पर आ गया है।

Keyword: मुद्रास्फीति, जीडीपी वृद्धि,
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