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Women's Entrepreneurship Day: भारत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी तय करना है लंबा रास्ता

तिरुमय बनर्जी / नई दिल्ली 11 18, 2022

 Syska Group की कार्यकारी निदेशक ज्योत्सना उत्तमचंदानी को मोबाइल एक्सेसरीज डिवीजन का प्रमुख बनने पर कुछ अलग तरह की चुनौती का सामना करना पड़ा था। सिस्का समूह की 30 वर्षीय कार्यकारी निदेशक ज्योत्सना के मुताबिक, 'हमारा बिक्री व वितरण का फैमिली बिजनेस है। इसके बिक्री विभाग में करीब 4,000 कर्मचारी हैं और उनमें से ज्यादातर पुरुष हैं। ऐसे में डिवीजन का प्रमुख बनने पर मेरे लिए पहली चुनौती यह थी कि वे मेरे नेतृत्व को स्वीकारें।'

उन्होंने बताया, 'वे मुझसे अधिक अनुभवी विशेषज्ञ थे और कंपनी में मुझसे पहले कार्य कर रहे थे। उन्हें भारत के बाजार के बारे में मुझसे अधिक जानकारी थी लेकिन मुझे उनका नेतृत्व करना था।' भारत में ज्यादातर महिला मुख्य कार्याधिकारियों (CEOs) के मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती अपने नेतृत्व को स्वीकार कराने की होती है। इसके बाद असलियत में कार्य शुरू होता है।

भारत के श्रम कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। इस मामले में भारत कई देशों से मीलों पीछे है। दक्षिण एशिया में सबसे खराब स्थिति भारत की है। न्यूयॉर्क मुख्यालय स्थित ग्लोबल मैचमेकिंग सर्विस मुहैया कराने वाली 'वाउज फॉर इटर्निटी' की संस्थापक व सीईओ अनुराधा गुप्ता के मुताबिक, 'दुर्भाग्य से स्टार्टअप इकोसिस्टम बेहतर काम नहीं कर रहा है।'

उन्होंने कहा, 'भारत में उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं को केवल 14 फीसदी प्रतिनिधित्व प्राप्त है। इनमें से ज्यादातर स्टार्टअप सूक्ष्म उद्यम व स्ववित्त पोषित हैं। यह इशारा करता है कि महिला उद्यमिता अपनी संभावनाओं तक पहुंचने में असमर्थ है।' उन्होंने कहा, 'मैं निश्चित रूप से कहूंगी कि विचार बदल रहे हैं और अभी भी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।'

अनुराधा गुप्ता की उम्र 48 साल है और उन्होंने 10 साल पहले 2012 में अपनी कारोबार की स्थापना की थी। उन्होंने बताया, 'मैं ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका और भारत में रह चुकी हूं। मेरा कहना यह है कि विश्व में तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ने वाला कोई देश नहीं होता है बल्कि उस देश की महिलाएं होती हैं।' 

उन्होंने कहा, 'हमें महिलाओं को अधिक अवसर मुहैया कराने चाहिए ताकि वे विश्व अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें। महिला उद्यमिता के मामले में अमेरिका निश्चित रूप से अग्रणी है। लेकिन भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं को आगे बढ़ते देखना बेहद अद्भुत होता है। हालांकि लैंगिक विभेद (gender gap) को पाटने की जरूरत है। उचित आधारभूत ढांचा व मदद मिलने पर विश्व स्तर पर भारत सबसे मजबूत होकर उभरेगा।'

उन्होंने कहा, 'मैं और लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनना चाहती हूं। शायद यही कारण है कि मैंने लिंग के आधार पर उद्यमिता को अलग नहीं देखा है। मेरा मानना है कि अर्थव्यवस्था कोई लैंगिक विभेद नहीं करती है। यदि आपने मन में कुछ ठान लेते हैं तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।'

सफलता शायद ही आसानी से आती है, भले ही कोई व्यवसाय शून्य से शुरू किया हो या पुश्तैनी कारोबार संभाल रहे हों। आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट की संस्थापक व चेयरपर्सन नीरजा बिड़ला (51) ने कहा, 'सामाजिक उद्यमिता की अपनी चुनौतियां हैं और उनसे पार पाना होता है।'

जब काम के दौरान महिलाओं को सहानुभूति दिखाने की बात आती है तो महिलाओं के पास प्राकृतिक रूप से बढ़त होती है या नहीं। इस सवाल पर बिड़ला ने कहा, 'बेटी अनन्या बिड़ला से प्रोत्साहन' मिलने के बाद एमपॉवर शुरू किया। एमपॉवर में अनन्या सह-संस्थापक भी है। 

उन्होंने कहा, 'कारोबार को संभालना मुश्किल काम होता है लेकिन कोई भी दिल से काम करने पर सफलता प्राप्त कर सकता है। मानवीय स्पर्श निश्चित रूप से व्यवसाय को उद्देश्य, जुनून और रोडमैप देता है - इससे समाज में असलियत में बदलाव आता है।' मानसिक समस्याओं के बारे में जागरूकता शुरू करने के लिए एमपॉवर शुरू किया गया था और यह मानसिक समस्याओं को हल करने का तरीका बताता है।

दुनियाभर में पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्रा नूयी सहित कई महिला बिज़नेस लीडर ने कई बार खुलासा किया है कि वे अपने ऑफिस के काम की दबाव की वजह से परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाई थीं। नूयी ने कई अवसरों पर अपनी मां के कहे शब्दों को व्यक्त किया था। नूयी की मां उनसे कहती थीं कि वह घर पर सीईओ नहीं बल्कि एक मां, एक पत्नी और एक बहू थीं।

नूयी की तरह बिड़ला भी मानती हैं कि महिलाओं को कई मोर्चों पर एकसाथ भूमिकाएं निभानी होती हैं और उन्होंने कहा, 'सभी मोर्चों पर तालमेल स्थापित करना हमेशा संभव नहीं होता है।' 

उन्होंने कहा,' सभी की आकांक्षाएं और ख्वाब होते हैं, लेकिन महिला ही परिवार को एकजुट रखती है। यह विश्वास करना कि सभी मोर्चों को बराबर से संभाल लिया जाएगा, कुछ आदर्शवादी है। 

उन्होंने कहा, 'अलग-अलग समय पर अलग-अलग भूमिकाओं के लिए ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। आपको जब एक भूमिका पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होता है और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता है तो कई बार अपने को दोषी मानने लगते हैं।'

हालांकि स्थितियां बदलनी शुरू हो गई हैं। ज्यादा से ज्यादा पुरुष बच्चों की देखभाल करने लगे हैं या घर के काम में हाथ बंटाने लगे हैं। साथ ही ज्यादा से ज्यादा महिलाएं कारोबारी उद्यम शुरू कर रही हैं  या अपने जीवनसाथी की तरह विशेषज्ञ बनने के लिए किसी काम में निपुणता हासिल करने लगी हैं। 

उन्होंने कहा, 'महिलाओं के लिए और आकांक्षाओं वाला माहौल बनाने के लिए शिक्षा पद्धति में अनिवार्य रूप से पूरा बदलाव होना चाहिए।'

'वाउज फॉर इटर्निटी' की संस्थापक गुप्ता का विश्वास है कि ज्यादा महिला उद्यमियों को अवसर मुहैया कराने के लिए समाज में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है। 

उन्होंने कहा, 'परिवार के सदस्यों द्वारा महिला को मुहैया करवाई गई मदद सफलता की कुंजी होती है।' उन्होंने कहा,' आत्मविश्वास के साथ बढ़ा करना और अपने सपनों को पूरा करने के लिए बढ़ावा देना जरूरी है। ऐसे में उद्यमिता के लिए आवश्यक गुण खतरा उठाने की क्षमता विकसित हो जाती है।'

महिला उद्यमिता दिवस 19 नवंबर

महिला उद्यमिता दिवस 19 नवंबर को मनाया जाता है। महिला उद्यमिता दिवस का ध्येय दुनियाभर में मुनाफा अर्जित करने वाली महिला उद्यमियों की संख्या में निरंतर वृद्धि को मान्यता देना है। अमेरिका में रहने वाली लेखिका व उद्यमी वेंडी डायमंड ने 2014 में महिला उद्यमिता दिवस की शुरुआत की थी। इस दिवस का ध्येय व्यवसायी महिलाओं के लिए अधिक अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देना है।
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