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बैंकों ने ईयू, यूके के नियामकों से की बात

रिजर्व बैंक ने विदेशी नियामकों को सीसीआईएल का लेखा परीक्षण देने का अधिकार देने से मना किया था
भास्कर दत्ता व मनोजित साहा / मुंबई 11 17, 2022

भारत में कारोबार कर रहे यूरोप के बैंक कारोबार में अड़चन खड़ी होने की आशंका के बीच अपने-अपने देशों के नियामकों से संपर्क साधने में जुट गए हैं। यूरोप के नियामक द्वारा ​क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) की मान्यता वापस लेने के कारण इस तरह की बाधा खड़ी हो सकती है। 

यूरोपीय सिक्योरिटी ऐंड मार्केट्स अथॉरिटी (ईएसएमए) ने अक्टूबर के अंत में सीसीआईएल सहित भारत के छह ​क्लियरिंग हाउस की मान्यता वापस ले ली थी। ये ​​क्लियरिंग हाउस सरकारी बॉन्डों और ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप के लिए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म मुहैया कराते थे। समझा जाता है कि रिजर्व बैंक ने विदेशी नियामकों को सीसीआईएल का लेखा परीक्षण और निरीक्षण करने का अधिकार देने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद ईएसएमए ने यह फैसला किया था। भारत में बीएनपी परिबा, क्रेडिट एग्रीकोल, क्रेडिट सुइस, डॉयचे बैंक और सोसियाते जेनेराली सहित कई यूरोप के कई बैंक भारत में अपने कारोबार का संचालन कर रहे हैं। बॉन्ड और ओआईएस कारोबार में ब्रिटेन के बैंक जैसे स्टैंडर्ड चार्टर्ड और बार्कलेज खासी भूमिका निभाते हैं।

एक सूत्र ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘यूरोप के बैंक अब बीओई और ईएसएमए (यूरोपीय सिक्योरिटी ऐंड मार्केट्स अथॉरिटी) के समक्ष भी अपनी आवाज उठा रहे हैं। वे बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर संपर्क में हैं। संभव है कि प्रा​धिकरण ने बाजार को खत्म करने के इरादे से काम नहीं किया हो लेकिन उनके इस काम से बाजार खत्म हो जाएगा। स्रोत के मुताबिक, ‘बाजार के संदर्भ में बात की जाए तो ‘एस्टरॉइड’ (एएसटीआरओआईडी) कम करना बंद कर देगा।

हमें इसके पड़ने वाले प्रभाव का सटीक अंदाजा नहीं है लेकिन इससे सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रभाव पड़ेगा। यदि सीसीआईएल ही एकमात्र प्लेटफॉर्म हो जो सरकारी प्रतिभूतियों को मंजूरी देता है तो ऐसी प्रतिभूतियों का कारोबार ठप हो जाएगा। इस मामले को हल करने के लिए कोई रास्ता निकालना ही होगा।

सभी यूरोपीय बैंक अपने नियामकों से संपर्क में हैं।’‘एस्टरॉइड’ वह प्लेटफॉर्म है जहां से ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप किए जाते हैं और यह सीसीआईएल के रुपये के डेरिवेटिव से संबंधित है। ओआईएस ऐसा डेरिवेटिव उत्पाद है जिसका इस्तेमाल मुख्य तौर पर सरकारी बॉन्ड से जुड़े जोखिम से बचने के लिए किया जाता है। इसके अलावा ओआईएस ब्याज दरों पर अपना नजरिया भी पेश करता है। मार्केट में विदेशी बैंक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

नियामक के साथ बातचीत कर रहे एक सूत्र ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘आरबीआई विदेशी बैंकों से स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस समस्या की वजह वह नहीं है। आपको उनसे कहना चाहिए जिन्होंने यह काम किया है। आरबीआई ने कहा कि यूरोपीय संघ के नियामक ने एकतरफा फैसला किया है। इसलिए विदेशी बैंकों को अपने नियामकों के पास जाकर इस मुद्दे को हल करना चाहिए।’ इस मामले पर पक्ष जानने के लिए आरबीआई को ईमेल भेज गया लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया। 

सूत्र ने कहा, ‘भारत में कारोबार का संचालन कर रहे विदेशी बैंक अपने मुख्यालयों से अनुरोध करेंगे और वे अपने नियामकों से बातचीत करें। नियामक इससे संतुष्ट हो या नहीं लेकिन विदेशी बैंक के मुख्यालय निश्चित रूप से इस मुद्दे को उठाएंगे। यह भारत के लिए विचित्र समस्या है क्योंकि भारत में विदेशी बैंकों का मजबूत उपस्थिति है।’ 

ईएसएमए ने छह संगठनों से मान्यता वापस ली है। इनमें क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, द इंडियन क्लियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड , द एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड, द मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज क्लियरिंग, द इंडिया इंटरनेशनल क्लियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड और एनएसई आईएफएससी क्लियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड हैं।  

Keyword: यूरोप के बैंक, यूरोपीय संघ (ईयू), वित्तीय बाजार, आरबीआई,
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