बिजनेस स?टैंडर?ड - बढ़े हुए स्तरों को कायम रखने वाली धारणाएं
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, December 09, 2022 02:50 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

बढ़े हुए स्तरों को कायम रखने वाली धारणाएं

महेश व्यास /  11 17, 2022

भारत में 2022 के त्योहारों का मौसम विदा हो चुका है। गणेश चतुर्थी से शुरू होकर दीपावली पर खत्म होने वाले त्योहारी मौसम में उपभोक्ता धारणाओं को आमतौर पर तेजी से बल मिलता है। नवंबर में उपभोक्ता धारणाओं को कोई मदद नहीं मिली है। दीपावली की सजावट हटाए जाने के बाद चमक फीकी पड़ गई है और त्योहार के कारण दी गई छूट वापस ले ली गई हैं। ऐसे में उपभोक्ता धारणाओं को यह क्या हो गया है? उपभोक्ताओं के टिकाऊ सामान पर खर्च करने के जज्बात को विशेष रूप से क्या हुआ है? क्या ये इरादे धराशायी हो गए, इन इरादों ने कदम पीछे खींच लिए हैं  या वे टिक पाएंगे? 

सीएमआई के तीव्र-आवृत्ति उपभोक्ता धारणाओं के सूचकांक और उनके घटक भविष्य के बारे में कुछ अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। इस क्रम में 6 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह में उपभोक्ता धारणा सूचकांक (आईसीएस) 2.2 फीसदी बढ़ा। यह त्योहार के मौसम के समाप्त होने के बाद पहला सप्ताह था। लेकिन इसके अगले सप्ताह आईसीएस में 3.4 फीसदी की गिरावट आई थी। इस कारण त्योहारी मौसम के महीने अक्टूबर की तुलना में नवंबर के आसपास आईसीएस में 0.65 फीसदी की कमी आ गई थी। सितंबर-अक्टूबर के दौरान आईसीएस में संचयी रूप से 11.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। यह बढ़ोतरी त्योहार के मौसम का असर थी। हालांकि त्योहारी मौसम खत्म होने के एक पखवाड़े बाद यह सूचकांक 0.65 प्रतिशत गिर गया। 

त्योहार का मौसम खत्म होने के बावजूद ये रुझान न धराशायी हुए और न ही कम हुए हैं। ऐसा लगता है कि त्योहारी मौसम में रुझानों का जो स्तर था, अब उस स्तर से भी ज्यादा हो गए हैं। यह फिर से आश्वासन देने वाला है। उपभोक्ता अवधारणाएं कोरोना पूर्व से पहले के स्तर तक तो नहीं पहुंच पाई हैं लेकिन ये धारणाएं निरंतर आगे बढ़ रही हैं। 

दो सप्ताह के आंकड़ों को पढ़ कर कोई रुझान निकालना कुछ जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए बाहरी परिस्थितियों में बदलाव के कारण हमें तेजी से बदलने वाले उपायों पर भी ध्यान रखना चाहिए - अभी भारत में त्योहारी मौसम खत्म हो चुका है। बीते दो हफ्तों के दौरान उपभोक्ताओं ने टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने के अपने उत्साही रुझान को कुछ कम कर दिया है। अक्टूबर 2022 के दौरान 18.4 प्रतिशत परिवार एक साल पहले की तुलना में टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने के लिए अधिक उत्साहित थे। बीते माह के अंतिम सप्ताह-दीपावली वाले सप्ताह-यह अनुपात उछलकर 19.9 फीसदी पर पहुंच गया था। त्योहारी मौसम खत्म होने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह में यह अनुपात गिरकर 19.5 फीसदी पर आ गया था और दूसरे सप्ताह में गिरकर 18.4 फीसदी आ गया। अभी यह उस स्तर पर है, जितना अक्टूबर के माह में था। 

अक्टूबर, 2022 को 18.7 परिवारों ने यह कहा था कि बीते साल की तुलना में उनकी आमदनी अधिक थी। अक्टूबर के अंत तक यह प्रतिशत बढ़कर 19.9 फीसदी हो गया था। नवंबर मध्य के दौरान यह थोड़ा और बढ़कर 19.4 फीसदी हो गया। अभी यह अक्टूबर की तुलना में कहीं बेहतर है। एक ओर बेहतरी वाला आशावादी रुख है तो दूसरी ओर निराशा वाले रुख में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे परिवारों का भी अनुपात बढ़ा है जो टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने को उचित समय नहीं मानते हैं और उनकी आमदनी में भी गिरावट हुई है। हालांकि आधे परिवारों ने कहा कि उनकी सोच में कोई बदलाव नहीं आया है।

ऐसे में शेष परिवारों में 20 फीसदी आशावादी हैं जबकि 30 फीसदी निराशावादी हैं। हम इनके अनुपात में बदलाव का अध्ययन कर रहे हैं। हमने पाया कि अक्टूबर, 2022 की तुलना में इस महीने आमदनी व खर्चे को लेकर दोनों पक्ष आशावाद और निराशावाद बढ़े हैं लेकिन इसमें निराशावाद अधिक बढ़ा है। इसका परिणाम यह हुआ कि वर्तमान आर्थिक स्थितियों का सूचकांक (आईसीसी) अक्टूबर 2022 की तुलना में 13 नवंबर, 2022 को समाप्त सप्ताह तक 1.6 प्रतिशत कम था।

हालांकि आईसीसी में गिरावट आई है और उपभोक्ता अपेक्षाओं के सूचकांक (आईसीई) में कोई बदलाव नहीं आया है। यह महत्त्वपूर्ण है। वर्तमान आर्थिक स्थितियों के खराब होने से परिवारों के नजरिये पर अत्यधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन यह त्योहारी मौसम के खत्म होने के बाद आने वाले हफ्तों में अचानक नहीं हुआ है।

परिवारों में एक बड़ा अनुपात यह मानता है कि भारत में आगामी 12 महीनों की अवधि के दौरान आर्थिक माहौल बेहतरी के लिए बदलेगा। अक्टूबर 2022 की तुलना में नवंबर 2022 के पहले दो सप्ताह में आगामी 12 महीनों के दौरान वित्तीय और कारोबार की स्थितियों में महत्त्वपूर्ण रूप से सुधार होने की धारणाएं बेहतर हुईं। यह अवधारणा सितंबर 2022 के दौरान भी पर्याप्त रूप से बेहतर हुई थी।

यह धारणा अक्टूबर में बेहतर हुई थी और इसे नवंबर में भी बल मिला। करीब 20 फीसदी परिवारों का अब यह मानना है कि  आने वाले 12 महीनों में देश की वित्तीय और कारोबारी स्थितियों में सुधार आएगा। हालांकि अगस्त में ऐसी सोच वाले केवल 10 फीसदी परिवार थे। अभी एक चौथाई लोग यह मानते हैं कि आने वाले समय में स्थितियां खराब होंगी। हालांकि ऐसी सोच वाले लोगों के अनुपात में गिरावट आ रही है।

नवंबर के पहले पखवाड़े में आगामी 12 महीने की अवधि के लिए परिवारों की धारणाओं के परिणाम अत्यधिक परिवर्तनशील रहे थे। नवंबर के पहले सप्ताह में बेहतरी की आस वाले परिवारों के अनुपात में खासी बढ़ोतरी हुई थी जबकि इसमें अगले सप्ताह कुछ गिरावट आई। यह भी संभव है कि नवंबर 2022 में आईसीएस में बढ़ोतरी की दर में कुछ गिरावट आ जाए। यह सूचकांक सितंबर में 7.1 फीसदी बढ़ा था जबकि अक्टूबर में 4.6 फीसदी बढ़ा था। लेकिन बाद में इस बढ़ोतरी में पर्याप्त गिरावट आई थी। यह अपने अक्टूबर के स्तर पर स्थिर रह सकती है। त्योहार का मौसम खत्म होने के कारण सितंबर और अक्टूबर में मिली पर्याप्त बढ़ोतरी को वापस आने की संभावना खत्म हो चुकी है। 

(लेखक सीएमआईई प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्या​धिकारी हैं)

Keyword: उपभोक्ता धारणाओं, गणेश चतुर्थी, दीपावली,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दरों में वृद्धि का चक्र अब थम जाएगा
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.