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हीरा कारोबारियों को सुनाई पड़ने लगी मंदी की आहट

सुशील मिश्र / नई दिल्ली November 17, 2022

रत्न एवं आभूषण उद्योग की अहम कड़ी हीरा उद्योग पर वैश्वक मंदी का असर दिखाई देने लगा है। क्रिसमस नजदीक होने के बावजूद अमेरिकी बाजारों में खास मांग नहीं है जबकि चीन के बाजार अभी भी पूरी तरह से खुले नहीं है जिसके कारण हीरा उद्योग में मंदी का आहट सुनाई देने लगी है। बड़े आकार के हीरों की मांग बुरी तरह प्रभावित हुई है हालांकि छोटे आकार वाले हीरों की मांग अभी भी सामान्य है जबकि लैब में तैयार होने वाले हीरों की मांग में तेज बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।

वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में तेजी से बदलाव को मंदी का संकेत माना जा रहा है। हीरा उद्योग में भी तेजी से बदलाव देखे जा रहे हैं। प्राकृतिक हीरों का कारोबार सिकुड़ रहा है तो  लैब में तैयार हीरों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। रत्न एवं आभूषण उद्योग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक कट ऐंड पॉलिश डायमंड (तराशे हीरे) का निर्यात अक्टूबर महीने में वार्षिक आधार पर डॉलर के हिसाब से 26.12 फीसदी और रुपये के हिसाब से 18.67 फीसदी की गिरावट हुई है। जबकि वजन (कैरेट) के हिसाब से निर्यात में 38.58 फीसदी की कमी आई है। अक्टूबर 2021 में 19175.16 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था जो अक्टूबर 2022 में गिरकर 15594.49 करोड़ रुपया का रह गया। इस साल अक्टूबर में 22.39 लाख कैरेट हीरा का निर्यात किया हुआ जबकि पिछले साल अक्टूबर में 36.45 लाख कैरेट हीरों का निर्यात किया गया था। 

अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2022 के बीच देश 111400.01 करोड़ रुपये कट एवं पॉलिस (तराशे) हीरों का निर्यात हुआ, पिछले साल की सामान्य अवधि में 110675.84 करोड़ रुपये के तराशे हीरों का निर्यात किया गया था। इस तरह रुपये के हिसाब से 0.65 फीसदी की बढ़त देखने को मिल रही है लेकिन डॉलर के हिसाब से इस बीच निर्यात में 5.54 फीसदी और वजट के हिसाब से 22.50 की कमी हुई है। इस साल अप्रैल-अक्टूबर के बीच कुल 156.08 लाख कैरेट तराशे हीरों का निर्यात किया गया जबकि पिछले साल इस दौरान 201.39 लाख कैरेट हीरे देश से बाहर भेजे गए थे।

अक्टूबर 2022 में लैब में तैयार किये तराशे हीरों का निर्यात पिछले साल के अक्टूबर महीने के अपेक्षा रुपये के हिसाब से 34.56 फीसदी, डॉलर के हिसाब से 22.12 फीसदी अधिक हुआ। जबकि अप्रैल-अक्टूबर में रुपये के हिसाब से 63.08 फीसदी और डॉलर के हिसाब से 52.91 फीसदी अधिक हुआ है। इस साल अक्टूबर में लैब डायमंड का निर्यात 1474.38 करोड़ रुपये का हुआ। अप्रैल-अक्टूबर 2022 में इन हीरों का निर्यात बढ़कर 8882.00 करोड़ रुपये हो गया। 

कट पॉलिस डायमंड के प्रमुख निर्यातक नील व्हाइटस एक्सपोर्ट के प्रबंध निदेशक नरेश मेहता कहते हैं कि कारोबार में तेज गिरावट आई है सबसे ज्यादा बड़े साइज (एक कैरेट से ऊपर) के हीरों की मांग प्रभावित हुई है। भारतीय हीरों का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है जहां बड़े साइज के हीरों की मांग लगातार कम हो रही है। लोग शौक पूरा करने के लिए लैब डायमंड खरीद रहे हैं। मेहता कहते हैं कि ग्राहकों की खरीदारी में आया यह बदलाव मंदी आने का स्पष्ट संकेत हैं इसीलिए अब अगले 6 महीना संभलकर कारोबार करने की जरुरत है। हीरों के दाम में गिरावट शुरु हो गई है मांग कम होने के कारण आने वाले समय में कीमतें और कम होगी।

मुंबई डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के सचिव सचिन शाह कहते हैं कि निर्यात मांग में गिरावट के बावजूद छोटे आकार के हीरों की मांग पहले जैसे सामान्य है लेकिन बड़े साइज की मांग बहुत कमजोर हो गई है। कच्चे हीरे के दाम बढ़े हैं जबकि तराशे गए हीरों की कीमतों में गिरावट आ रही है। इसको देखते हुए इस समय स्टॉक कम करने की नीति अपनाई जा रही है ताकि मंदी जैसी स्थिति आने पर कम से कम नुकसान हो। शाह कह रहे हैं कि चीन का बाजार खुल जरुर गया है लेकिन पाबंदियां बहुत ज्यादा है जो कारोबार के लिहाज से सही नहीं है । चीन की स्थिति स्पष्ट होने में अभी 6 महीने का समय लग सकता है, हालांकि खाड़ी देशों से अभी बेहतर निकल कर आ रही है लेकिन अमेरिका का बाजार पूरी तरह से ठंडा है जो उद्योग को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है।
 
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के चेयरमैन विपुल शाह ने कहा कि चीन जैसे भारत के कुछ बड़े बाजारों में अनिश्चितता की  वजह से भारत का निर्यात प्रभावित हो सकता है। इस समय सावधानी बरतते हुए कारोबार करने की जरुरत है। वैश्विक बाजार में ब्याज दर में बढ़ोतरी हो रही है । रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। हमें नहीं पता कि आने वाले समय में चीन का बाजार कैसा होगा। पहली छमाही में कारोबार ठीक था, दूसरी छमाही थोड़ी चुनौतीपूर्ण होगी। लॉकडाउन के कारण चीन का बाजार बाधित है और यह बड़ा बाजार है। चीन में अब बाजार खुल रहे हैं और चीजें बेहतर होनी शुरू हो सकती हैं।

सालाना आधार पर अक्टूबर में रत्न एवं आभूषण उद्योग रुपये के हिसाब से निर्यात 14.64 फीसदी और आयात 16.82 फीसदी की गिरावट हुई है। अक्टूबर में निर्यात 25843.84 करोड़ रुपये का हुआ जबकि पिछले साल अक्टूबर में 30274.64 करोड़ रुपये का हुआ था। आयात 14644.87 करोड़ रुपये से गिरकर 12181.92 करोड़ रुपये हो गया। इस साल अप्रैल से अक्टूबर तक कुल कुल 188183.83 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ जो पिछले साल की सामान्य अवधि की अपेक्षा 7.90 फीसदी अधिक है वहीं आयात में 15.91 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इस साल अप्रैल-अक्टूबर के बीच 125647.14 करोड़ रुपये का आयात हुआ जबकि पिछले साल इस दौरान 108403.92 करोड़ का आयात हुआ था।

गौरतलब है कि भारत से होने वाले चार प्रमुख निर्यातों में रत्न एवं आभूषण शामिल है। इसकी कुल निर्यात में हिस्सेदारी 10 प्रतिशत है। भारत से हीरे, सोने, प्लैटिनम के साथ कृत्रिम गहनों का निर्यात करता है। सितंबर में वृद्धि 17 फीसदी थी और 3.76 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। वहीं अप्रैल सितंबर के दौरान 6.31 फीसदी वृद्धि के साथ 20.58 अरब डॉलर का कारोबार हुआ।  वित्त वर्ष 20 23 के लिए 45.6 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य है।
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