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हारी बाजी जीतने का यकीं है इन्हें..
हफ्ते की शख्सियत - सुनील भारती मित्तल, चेयरमैन, भारती एयरटेल
सुरजीत दास गुप्ता /  May 29, 2009

एमटीएन को भारती समूह के साथ जोड़ने की कोशिश समूह के अध्यक्ष सुनील मित्तल ने एक बार फिर शुरू कर दी है। दूरसंचार के वैश्विक परिदृश्य पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए मित्तल कुछ साल से लगातार कोशिश कर रहे हैं।

अभी कुछ हफ्ते पहले जब भारती एयरटेल के उपभोक्ताओं की तादाद 10 करोड़ तक पहुंच गई, तब मित्तल ने पत्रकारों से कहा कि उनके मित्र अखिल (कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक अखिल गुप्ता) देश में और 10 करोड़ ग्राहक बनाने के लिए काम करेगें जबकि इतने ही ग्राहक विदेशों में बनाने के लिए वे स्वयं अमल करेंगे।

गौरतलब है कि इस दक्षिण अफ्रीकी कंपनी (एमटीएन) और एशिया की कुछेक कंपनियों को अधिगृहित करने की मित्तल की योजना पिछले साल सफल नहीं हो सकी। इसके बावजूद मित्तल का यह अंदाजे बयां उनके जोरदार आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है।

सोमवार 25 मई को यह जाहिर हुआ कि 51 वर्षीय मित्तल को कम करके आंकना भूल हो सकती है। कंपनी ने घोषणा की कि उसने एक बार एमटीएन के साथ विलय करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। यदि इन दोनों के बीच करार हो जाता है तो भारती को एमटीएन में 49 फीसदी हिस्सेदारी मिल जाएगी, जबकि एमटीएन और उसके शेयरधारकों को भारती में 36 फीसदी का हिस्सा मिल जाएगा।

फिलहाल भारती दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी और भारत की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी है। एमटीएन के साथ जुड़ जाने से कंपनी के उपभोक्ताओं की तादाद 20 करोड़ के पार चली जाएगी। इस तरह यह कंपनी चाइना मोबाइल और वोडाफोन के बाद दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनियों में शामिल हो जाएगी।

यदि सौदा सफल हो गया तो मित्तल की पहुंच अफ्रीका के 21 देशों में हो जाएगी। केन्या, ईरान और सऊदी अरब में लाइसेंस हासिल करने में मिली नाकामी के बाद ऐसी सफलता का महत्व निश्चित तौर पर काफी बढ़ जाएगा।

पिछले साल एमटीएन के साथ सौदा असफल रहने के बाद उन्होंने बताया था कि यह सौदा इसलिए असफल हो गया कि एमटीएन ने भारती के साथ विलय करने की बजाय भारती को एमटीएन के साथ विलय कराने का जटिल प्रस्ताव रख दिया।

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