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प्रासंगिक बने जी20

बीएस संपादकीय /  11 16, 2022

बाली में आयोजित जी20 ​शिखर बैठक में यूक्रेन युद्ध और उसके असर का अनुमान के मुताबिक ही गहरा प्रभाव पड़ा। खबरों में कहा गया है कि वहां उत्पन्न असहमतियों की वजह से अंतिम घोषणाएं तय करने में देरी हुई। इस मसले पर वै​श्विक ​स्थिति को लेकर मतभेद सामने आए और कुछ देशों ने अपनी उसी राष्ट्रीय ​स्थिति को दोहराया जिसे वे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रकट कर चुके हैं।

उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा यूक्रेन हमले को लेकर रूस की आलोचना किए जाने संबंधी कदम का विरोध किया। अमेरिका, यूरोप, जापान और ब्रिटेन ने 15 नवंबर को सम्मेलन से इतर मुलाकात की और कड़े शब्दों वाला एक वक्तव्य जारी करते हुए ‘यूक्रेन के शहरों और बुनियादी ढांचों पर रूस के बर्बर मिसाइल हमलों’ की आलोचना की।

अंत में जारी संयुक्त घोषणापत्र में युद्ध से संबं​धित पैराग्राफ में देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तथा अन्य मंचों पर व​र्णित उनकी ​स्थिति के हिसाब से अलग से रेखांकित किया गया। लेकिन उसमें यूक्रेन के ​खिलाफ रूस की आक्रामकता की कड़ी निंदा की गई और मांग की गई कि वह यूक्रेन से बिना शर्त पूरी तरह बाहर निकल जाए।

वक्तव्य में अंतरराष्ट्रीय कानून तथा विवादित मसलों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने को लेकर जी20 की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। चूंकि जी 20 की अध्यक्षता भारत के पास आ रही है इसलिए इस बात को ध्यान में रखते हुए ही पैराग्राफ का अंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्य से हुआ जो उन्होंने इस वर्ष के आरंभ में शांघाई सहयोग संगठन में रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से कहा था, ‘मौजूदा दौर युद्ध का दौर नहीं होना चाहिए।’ 

बाकी बात करें तो वक्तव्य यही दर्शाता है कि वै​श्विक वित्तीय संकट की छाया में आयोजित शुरुआती तीन ​शिखर बैठकों की तुलना में जी20 बैठकें सार्थक बदलाव हा​सिल करने की क्षमता प्राय: खोती जा रही हैं। इस बार ​शिखर बैठक के स्लोगन में कोविड-19 महामारी के प्रभाव की ध्वनि थी: ‘रिकवर टुगेदर, रिकवर स्ट्रॉन्गर’।

वक्तव्य में जहां खाद्य सुरक्षा, ईंधन की कमी दूर करने आदि जैसे संबद्ध विषयों पर बात हुई लेकिन ऐसे कार्यक्रम कम ही थे जिनमें वाकई कदम उठाए जा सकते हों। वक्तव्य का ज्यादातर हिस्सा पहले से चल रही पहल के प्रति समर्थन जताने पर केंद्रित था। बहरहाल, जलवायु परिवर्तन के मामले में यह अहम है कि विकसित देशों द्वारा जताए गए 2 डिग्री से​ल्सियस के बजाय 1.5 डिग्री से​ल्सियस के तापवृद्धि लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्धता जताई गई।

वक्तव्य में कोयला आ​धारित बिजली को चरणबद्ध तरीके से कम करने के बारे में बात की गई लेकिन यह भी कहा गया कि यह राष्ट्रीय हालात के अनुसार होगा। इसके तहत निकट भ​विष्य में भारत की ताप बिजली पर निर्भरता जारी रहने की बात को स्वीकार किया गया। यह देखना होगा कि मिस्र में 18 नवंबर को समाप्त होने वाली कॉप27 की बैठक में जारी होने वाले अंतिम वक्तव्य में यह वक्तव्य किस हद तक परिल​क्षित होता है। यह बात भी अहम है कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मुद्रा की अ​स्थिरता को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को समायोजित करने को राजी हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे इस प्रतिबद्धता को किस हद तक निभा पाएंगी।

इस बात से काफी कुछ पता चलता है कि जी 20 ​शिखर बैठक की मुख्य बैठकों से अ​धिक सु​र्खियां उससे इतर हुई मुलाकातों ने बटोरीं। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात भी उनमें शामिल है। ऐसी ही एक अन्य अहम बैठक की मेजबानी अमेरिका, इंडोने​शिया और यूरोपीय संघ ने की जिसमें भारत समेत अहम सदस्य देश शामिल थे। यह बैठक वै​श्विक अधोसंरचना एवं निवेश साझेदारी के तहत संबद्धता गहरी करने के लिए हुई ताकि मध्य और कम आय वाले देशों में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी निवेश किया जा सके।

यह संभवत: चीन की बेल्ट ऐंड रोड पहल का प्रतिकार है। यूक्रेन युद्ध के कारण बाली में कुछ अहम प्रगति होने की संभावना कम ही थी। अब अध्यक्षता भारत के पास है तो उसके पास समय है कि वह एक व्यावहारिक और सार्थक एजेंडा पेश करे ताकि जी 20 अपनी प्रासंगिकता न खोए।

Keyword: जी20, बाली, अमेरिका, यूरोपीय संघ,
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