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रिटेल इंफ्लेशन 3 महीने के निचले स्तर पर, लेकिन अप्रैल से दोगुनी हुई गेहूं-चावल की महंगाई दर

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 11 16, 2022

गेहूं की खुदरा महंगाई दर अप्रैल के 9.59 प्रतिशत की तुलना में अक्टूबर महीने में करीब दोगुनी होकर 17.61 प्रतिशत हो गई है, जो अप्रैल में ही बढ़े हुए स्तर पर थी। अन्य प्रमुख अनाज चावल की भी यही कहानी है, जिसकी खुदरा महंगाई दो अंकों में होकर 10.21 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 4 प्रतिशत थी।

इस समय कुल मिलाकर महंगाई दर और खाद्य महंगाई दर घट रही है और यह 3 महीने के निचले स्तर पर है, वहीं गेहूं और चावल की अलग ही कहानी चल रही है। मोटे अनाजों की महंगाई दर अक्टूबर महीने में दोगुने से ज्यादा बढ़कर 12 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है, जो अप्रैल में करीब 6 प्रतिशत थी।

गेहूं और चावल महंगाई दर पर असर डाल रहे हैं, जबकि अन्य अनाज की महंगाई दर अक्टूबर को छोड़कर अन्य महीनों में ऋणात्मक है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में मोटे अनाज व इसके उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है। इस स्थिति में गरीबों का बजट बिगड़ सकता है, लेकिन सरकार ने पहले ही 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त खाद्यान्न 3 महीने के  लिए बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दिया है।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनयम के लाभार्थियों को उनके मासिक कोटा के अतिरिक्त मुफ्त में 5 किलो गेहूं या चावल हर महीने दिया जाता है।

इसके अलावा कोटे वाले गेहूं और चावल के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उदाहरण के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के चावल की कीमत में अप्रैल में कमी आई और उसके बाद सितंबर तक महंगाई दर 1 प्रतिशत से नीचे रही। अक्टूबर में कोई महंगाई नहीं रही है।

पीडीएस वाले गेहूं के मामले में अक्टूबर 2022-23 तक कीमतों में सालाना आधार पर लगातार गिरावट आई है। जो लोग पीडीएस व्यवस्था के बाहर हैं, उनके ऊपर कीमतों की आंच है। इसके अलावा मोटे अनाज के उत्पाद जैसे ब्रेड, बिस्किट पीडीएस के तहत नहीं आते। बैंक आफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि मोटे अनाज के दाम में बढ़ोतरी की कई वजहें हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की पीएमजीकेएवाई योजना के माध्यम से एफसीआई के पास मौजूद अतिरिक्त गेहूं का भंडार खत्म हो चुका है, जिसकी वजह से बाजार में कमी की स्थिति है।

इसके साथ ही धान और गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है, जिससे इस साल कीमत में तेजी रहेगी। उन्होंने कहा, ‘गेहूं के वैश्विक दाम में कमी आ रही है। लेकिन एमएसपी की नई सीमा तय करने के कारण भारत में इसकी कीमत बढ़ी हुई बनी रहेगी।’ उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक धान की पैदावार कम रहेगी। 

सबनवीस ने कहा कि इसके साथ ही पीएमजीएवाई को 3 महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है और बाजार को पता है कि खुले बाजार में कम चावल है, जिसकी वजह से आगे कीमत और बढ़ेगी। इसके अलावा देर से पड़ी दक्षिण पश्चिमी मानसून की फुहारों की वजह से भी मोटे अनाज की कीमत बढ़ने की आशंका है। इसके कारण उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश हुई है।  

एक साल पहले की तुलना में आधा बचा गेहूं का भंडार 

सरकार के गोदामों में गेहूं का भंडार  पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1 नवंबर को घटकर आधा रह गया है। सरकार के सोमवार के आंकड़ों से यह पता चलता है। हालांकि भंडारण आधिकारिक लक्ष्य की तुलना में अभी भी कुछ अधिक है।

सरकार के गोदामों में गेहूं का भंडार इस महीने की शुरुआत में कुल 2.1 करोड़ टन रहा है, जो 1 नवंबर, 2021 के 4.2 करोड़ टन की तुलना में 42 प्रतिशत कम है। 31 दिसंबर को समाप्त तिमाही के दौरान सरकार का गेहूं भंडारण का आधिकारिक लक्ष्य 2.05 करोड़ टन है, जिसकी तुलना में भंडारण अभी  कुछ ज्यादा है। सरकार के भंडारण केंद्रों में गेहूं का भंडारण 1 अक्टूबर को 2.27 करोड़ टन था।

गेहूं के दाम बढ़ने पर सरकार अपने गोदाम से खुले बाजार में इसकी बिक्री करती है, जिससे कीमतों पर काबू पाया जा सके। भंडार कम होने से सरकार की इस क्षमता पर असर पड़ सकता है। सरकार बड़े खरीदारों जैसे आटा मिलों और बिस्कुट बनाने वालों को नियमित रूप गेहूं बेचती है।

भारत विश्व में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। फसल के उत्पादन में आई अचानक कमी के बाद मई में सरकार ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद भारत में गेहूं के दाम बढ़े हैं। पहले की फसल से बाजार में गेहूं की आवक कम हुई है, क्योंकि किसान अपना भंडार बनाए रखना चाहते हैं।     

Keyword: गेहूं, महंगाई दर, चावल,
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