बिजनेस स?टैंडर?ड - फर्मों पर बढ़ेगा अनुपालन का बोझ
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, December 01, 2022 09:17 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

फर्मों पर बढ़ेगा अनुपालन का बोझ

कानूनी विशेषज्ञों ने कहा, सेबी के कई प्रस्ताव ऐसे हैं जिनसे जटिलताएं पैदा हो सकती हैं
खुशबू तिवारी / मुंबई 11 15, 2022

अगर डिस्क्लोजर यानी खुलासा नियमों की नई व्यवस्था से जुड़े बाजार नियामक सेबी के प्रस्ताव लागू होते हैं तो भारतीय कंपनी जगत पर अनुपालन का बोझ कई गुना बढ़ सकता है। ऐसा कानूनी वि​शेषज्ञों का मानना है। बाजार नियामक ने सूचीबद्ध कंपनियों की तरफ से अनुपाल​न किए जाने वाले खुलासा नियमों की मजबूती का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत सूचीबद्ध इकाइयों में नीति में एकरूपता लाने के लिये घटना या मामले के अपेक्षित प्रभाव के आधार पर उसके खुलासे के लिये न्यूनतम सीमा का प्रस्ताव किया गया है।

साथ ही मामले के सामने आने के बाद शेयर बाजारों को इस बारे में जानकारी देने की समयसीमा 24 घंटे से कम कर 12 घंटे करने का प्रस्ताव है। शीर्ष 250 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए मुख्य मीडिया में प्रकाशित उन खबरों की पुष्टि करने या उसका खंडन करने को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव किया गया है, जिसका सूचीबद्ध इकाई पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

सिरिल अमरचंद मंगलदास की पार्टनर व प्रमुख (एमऐंडए) अकिला अग्रवाल ने कहा, यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि ज्यातातर कंपनियां नियमित तौर पर ​वैसी गतिविधियों से जुड़ी रहती हैं, जिनके लिए खुलासा अनिवार्य नहीं होता और इसकी पुष्टि या खंडन समय पूर्व हो सकता है।

 12 नवंबर को जारी चर्चा पत्र में सेबी ने जुर्माना लगाने, जांच  या सत्यापन जैसे नियामकीय कदमों से संबंधित खुलासे से जुड़े डिस्क्रिशनरी एलिमेंट घटाने के लिए कदमों का सुझाव दिया है। इसके तहत किसी कंपनी के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई से खुलासा जरूरी हो सकता है। विशेषज्ञों ने कहा, यह खुलासे की बाढ़ ला सकता है। अग्रवाल ने कहा, चाहे उसकी अहमियत जैसी भी हो, ज्यादातर नियामकीय कार्रवाई में जुर्माने आदि शामिल होते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या खुलासे के जरिये निवे​शकों का हित साधा जाएगा, चाहे मामले की अहमियत जैसी भी हो। 

भारतीय कंपनी जगत को लग रहा है कि प्रस्तावित नए बदलाव  से खुलासे की अनिवार्यता काफी बढ़ जाएगी, चाहे अपेक्षित प्रभाव के लिहाज से एक तय सीमा को वह पूरा न भी करता हो। कई को आशंका है कि जिन बदलावों का सुझाव दिया गया है उनसे अनिवार्य खुलासा और स्वविवेक से होने वाले खुलासे का अंतर धुंधला हो जाएगा। 

कानूनी विशेषज्ञों ने कहा, यह कदम हालांकि पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाला है, लेकिन हर घटनाक्रम या सूचना को सार्वजनिक करने से क्या वास्तव में निवेशकों को मदद मिलेगी।  लूथरा ऐंड लूथरा लॉ ऑफिस इंडिया के पार्टनर हरीश कुमार ने कहा, ‘​यदि ​किसी घटनाक्रम /सूचना का सार्वजनिक खुलासा होता है तो इससे शेयर कीमत प्रभावित हो सकती है।’

इसके अलावा, प्रमुख प्रबंधन कर्मी, वरिष्ठ प्रबंधन या निदेशकों के इस्तीफे की ​स्थिति में, इस्तीफे के पूरे पत्र के साथ साथ संबंधित कारणों का व्यापक तौर पर खुलासा किए जाने की जरूरत होगी। प्रमुख बदलावों के तहत, सेबी ने कंपनियों को खुलासा करने का समय 12 घंटे करने का सुझाव दिया है। यदि इस बारे में बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया हो तो 30 मिनट के अंदर जानकारी का खुलासा करने की जरूरत होगी।
Keyword: सेबी, खुलासा नियमों,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

अच्छे शेयरों के चयन वाला बाजार

Investmentsसवाल जवाब बाजार की नजर इस सप्ताह होने वाली आरबीआई की मौद्रिक बैठक के परिणाम

बाजार हलचल

स्पे​शियल्टी में सुधार आने से सन फार्मा को मिलेगी मजबूत खुराक

आय में बढ़त से तय होगी शेयर बाजार की चाल

पीवीआर के शेयर का बढ़ेगा खुमार!

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.