बिजनेस स?टैंडर?ड - सकारात्मक है वि​भिन्न क्षेत्रों में आय की वृद्धि
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सकारात्मक है वि​भिन्न क्षेत्रों में आय की वृद्धि

देवा​शिष बसु /  11 15, 2022

दूरगामी लाभ के साथ छिपी हुई तेजी वाला भारत का बाजार कुछ सकारात्मक संकेत समेटे हुए है। उनमें सबसे अहम है वि​भिन्न क्षेत्रों में आय की वृद्धि। जानकारी दे रहे हैं देवा​शिष बसु

जुलाई के अंत में मैंने एक आलेख लिखकर यह समझाने का प्रयास किया था कि बढ़ती मुद्रास्फीति, ब्याज दरों और धीमी वृद्धि के बीच बाजार का मिजाज कैसा है। ऐसा इसलिए कि एक साथ​ मिलकर ये तीनों कारक वृद्धि को बहुत प्रभावित करते हैं। परंतु शेयर बाजार मजबूत बना हुआ था। अमेरिकी बाजार का अगुआ माने जाने वाला एसऐंडपी 500 सूचकांक जुलाई तक अपने उच्चतम स्तर से केवल 14.3 फीसदी नीचे था।

दूसरा, यह बात भी अच्छी तरह समझी जा चुकी है कि अमेरिका में मामूली संकेत होने पर भी उभरते बाजारों पर उसका गहरा असर होता है। परंतु जैसा कि मैंने उस समय कहा था, भारतीय बाजार अमेरिकी बाजारों की तुलना में मजबूत थे। ऐसे में पारंपरिक समझ की इन दोनों बातों ने भविष्य में क्या रुख अपनाया होगा? जुलाई से अब तक अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने मानक ब्याज दरों में दो बार 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है।

मार्च के 0.25 फीसदी से बढ़कर यह दर अब 3.75 फीसदी हो चुकी है। अत्यंत कम अव​धि में यह अत्य​धिक असाधारण वृद्धि है। अमेरिकी बाजार को झटका लगा है लेकिन वह पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुआ। सितंबर में तेज गिरावट के बाद अक्टूबर में बाजार सुधरा और सुधरकर जून के अंत वाले स्तर पर वापस जा पहुंचा।

ऐसा तब हुआ जब जुलाई, सितंबर और नवंबर में तीन बार 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी हुई। अगर किसी ने किसी सिद्धहस्त निवेशक से यह पूछा होता कि बाजार में तीन महीनों में 225 आधार अंकों की बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने तक अन्य बढ़ोतरी के बीच बाजार की क्या प्रतिक्रिया होगी तो वे शायद गिरावट का अनुमान जता सकते थे।

दूसरे अनुमान का क्या जिसमें माना जाता है कि अमेरिका को छींक भी आए तो भारत जैसे उभरते बाजारों को जुकाम पकड़ लेता है, यानी उनकी हालत बिगड़ने लगती है। यह अविश्वसनीय प्रतीत हो सकता है लेकिन निफ्टी ने मासिक बंदी के आधार पर अपना अब तक का उच्चतम स्तर हासिल किया। ब​​ल्कि वह और अ​धिक तेजी हासिल करने को तैयार नजर आ रहा है।

ऐसी बातें आमतौर पर तेजी वाले बाजार में घटित होती हैं। मीडिया में आपको नए या निरंतरता वाले तेजी के बाजार के बारे में सुनने को मिल सकता है लेकिन वास्तव में ​शेयर कीमतें ही निर्णायक साबित हो सकती हैं। शेयर कीमतों के बारे में सुनने को मिल सकता है। हम इसे ऐसा तेजी वाला बाजार मान सकते हैं जो दरअसल गोपनीय है।

यहां सवाल यह है कि वै​श्विक हालात खराब होने पर भी बाजारों में तेजी का रुख क्यों है? कई लोगों का कहना है कि यह मंदी के बाजार की तेजी है और ऐसा इसलिए है कि बाजार कभी सीधी रेखा में नहीं गिरता है। ऐसे लोगों का मानना है कि जो निवेशक आज खरीदारी कर रहे हैं और कीमतों को बढ़ा रहे हैं वे मूर्ख हैं और उन्हें पता ही नहीं है कि वे क्या कर रहे हैं।

उनका कहना है कि यह मानना बिल्कुल भी तार्किक नहीं है कि उच्च ब्याज दर कारोबार पर नकारात्मक असर नहीं डालेगी। मंदी आना तय है क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख सख्त रहा है और वह तब तक दरें बढ़ाना बंद नहीं करेगा जब तक मुद्रास्फीति नियंत्रित नहीं होती। यही कारण है कि कारोबारी मंदी के कारण बिकवाली देखने को मिलेगी क्योंकि शेयर कीमतें मध्यम अव​धि में आय का अनुसरण करती हैं।

इस बार क्या अलग है? बढ़ती दरों और भूराजनीतिक रुझानों का असर अमेरिका, यूरोप तथा कुछ ए​शियाई देशों में महसूस किया जा सकता है लेकिन क्या भारत के लिए दिक्कत है?  सर्वा​धिक सफल और समझदार निवेशकों में से एक सर जॉन टेंपलटन की मानें तो सर्वा​धिक खतरनाक शब्द हैं- ‘इस बार बात कुछ अलग है।’ परंतु कुछ अलग ढंग से करने की आवश्यकता है। दूरगामी लाभों के साथ भारत का गोपनीय तेजी का बाजार कुछ मजबूत सकारात्मक बातें लिए हुए है।

इनमें सबसे अहम है वि​भिन्न क्षेत्रों के बीच आय में वृद्धि। उदाहरण के लिए यात्रा क्षेत्र में तेजी देखने को मिल रही है। गत वर्ष के उतार-चढ़ाव भरे बाजार में भी इंडियन होटल्स को सबसे अ​धिक लाभ हुआ और उसके शेयर 100 फीसदी बढ़े। कारों, बाइक, आभूषण, घड़ियों और महंगे कपड़ों की बिक्री जोरों पर है। यही कारण है कि महिन्द्रा ऐंड महिन्द्रा (51 फीसदी), टीवीएस मोटर (68 प्रतिशत), आयशर मोटर्स (48 प्रतिशत) और रेमंड्स (183 प्रतिशत) को सबसे अ​धिक लाभ हुआ। दूसरा अहम कारक है इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तुओं की निरंतर बढ़ती हुई बिक्री भी एक दशक के बाद देखने को मिल रही है।

ऐसा रेलवे, सड़क, रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की वजह से हो रहा है। आश्चर्य नहीं कि पिछले वर्ष सबसे अ​धिक लाभ कमाने वालों में एल्कॉन इंजीनियरिंग (132 प्रतिशत), शैफलर (95 प्रतिशत), सीजी पॉवर सॉल्यूशंस (73 प्रतिशत), टिमकेन (53 प्रतिशत) और ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स (48 फीसदी) सबसे बड़े लाभार्थी साबित हुए। तीसरा सबसे बड़ा रुझान रक्षा क्षेत्र में गहरी और बढ़ती रुचि रही है।

ऐसा इसलिए हुआ कि नीतियों में बदलाव आया और स्थानीय खरीद पर जोर दिया जाने लगा। इस बात को मझगांव डॉक ​शिपबिल्डर (203 प्रतिशत),  गार्डन रीच ​शिपबिल्डर (132 प्रतिशत), हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स (96 प्रतिशत), कोचीन ​शिपयार्ड (73 प्रतिशत) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (58 प्रतिशत)  के शेयरों में महसूस किया जा सकता है। आ​खिर में बात करें तो भारतीय बाजारों का चौथा बड़ा कारक रहा है मजबूत ऋण चक्र जिसे छोटे निजी बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा सरकारी क्षेत्र के बैंकों में ऋण व्यवहार को बेहतर बनाने से लाभ मिला है। 

दीर्घाव​धि में देखें तो शेयर वास्तव में मुनाफे में होने वाली वृद्धि के अनुचर होते हैं। परंतु अल्पाव​धि और मध्यम अव​धि के बीच में देखें तो शेयर बाजार चौंकाने वाले घटनाक्रम तथा अनुमानित लाभ की कहानियों को लेकर मजबूत संकेत देते हैं। हम भारतीय बाजार में इन सभी कारकों के मिश्रण को देख रहे हैं। कई ऐसे शेयर हैं जिनकी आय वृद्धि मजबूत है और वहीं ऐसे भी शेयर हैं जहां अनुमानित आय के अ​धिक रहने की उम्मीद है। यह कारण है कि हम इसे छिपी हुई तेजी वाला बाजार कह रहे हैं, भले ही वृहद आ​र्थिक तस्वीर बहुत अ​धिक प्रेरित करने वाली नहीं है। 

(लेखक मनीलाइफडॉटइन के संपादक हैं)
Keyword: मुद्रास्फीति, आरबीआई, ब्याज दरों, कोविड-19,
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