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2024 में भी बड़ा रहेगा विनिवेश लक्ष्य

विनिवेश लक्ष्य वित्त वर्ष 23 के लिए लक्ष्य 65,000 करोड़; एलआईसी व ओएनजीसी के ओएफएस से मिले 24,544 करोड़
श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 11 14, 2022

चालू वित्त वर्ष 2023 में सरकार संभवतः विनिवेश लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगी, हालांकि यह गिरावट मामूली रहने की संभावना है। सरकार को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में हिंदुस्तान जिंक की शेष हिस्सेदारी बिक जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि वित्त वर्ष 24  के बजट अनुमान में विनिवेश लक्ष्य बढ़ा हुआ बना रह सकता है

 क्योंकि कुछ बड़ी संपत्तियों की बिक्री की योजना है। चालू वित्त वर्ष में 65,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा गया है और सरकार ने अब तक 24,544 करोड़ रुपये जुटाए हैं। निजीकरण की प्रमुख योजनाओं में आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी की बिक्री, कंटेनर कॉर्पोरेशन आफ इंडिया (कॉनकोर) और शिपिंग कॉर्पोरेशन आफ इंडिया अहम हैं। 2024 में भी बड़ा रहेगा 

चालू वित्त वर्ष 2023 में सरकार संभवतः विनिवेश लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगी, हालांकि यह गिरावट मामूली रहने की आशंका है। सरकार को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में हिंदुस्तान जिंक (एचजेडएल) की शेष हिस्सेदारी बिक जाएगी, जो करीब 35,000 करोड़ रुपये की होगी।

सरकार के अधिकारियों का कहना है कि वित्त वर्ष 24  के बजट अनुमान में विनिवेश लक्ष्य बढ़ा हुआ बना रह सकता है क्योंकि कुछ बड़ी संपत्तियों की बिक्री की योजना है और उम्मीद की जा रही है कि अगले साल इनकी बिक्री पूरी कर ली जाएगी।

चालू वित्त वर्ष में 65,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा गया है और सरकार ने अब तक 24,544 करोड़ रुपये जुटाए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘विनिवेश प्रक्रिया पर आंतरिक आकलन और अगले वित्त वर्ष के परिदृश्य को लेकर बैठक अगले सप्ताह से शुरू हो रही है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल एचजेडएल की बिक्री हो जाएगी। अगले वित्त वर्ष 2024 के लिए बजट अनुमान में अधिक मूल्य के विनिवेश अहम होंगे, जिनका विनिवेश प्रस्तावित है और उम्मीद है कि इनका विनिवेश अगले साल हो जाएगा।’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संपत्ति की बिक्री का लक्ष्य प्रक्रिया पर चल रही प्रगति और बाजार की स्थिति पर निर्भर होगी। निजीकरण की प्रमुख योजनाओं में आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी की बिक्री, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया अहम हैं।

रणनीतिक क्षेत्र की बिक्री में नियमों का पालन अहम है, जिसमें वक्त लगता है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि हिंदुस्तान जिंक की हिस्सेदारी की बिक्री चालू वित्त वर्ष में पूरी हो जाएगी। मौजूदा बाजार भाव के मुताबिक एचजेडएल में सरकार की हिस्सेदारी करीब 35,000 करोड़ रुपये है।

सरकार को उम्मीद है कि वह आईडीबीआई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 24 में बेचने में सफल हो जाएगी। इसमें दो चरण की प्रक्रिया है, जिसमें क्षमतावान बोलीकर्ता को भारतीय रिजर्व बैंक का ‘फिट ऐंड प्रॉपर’ का मानदंड पूरा करना होगा और उसके बाद उसे वित्तीय बोलियों में शामिल होना होगा।

अक्टूबर महीने में केंद्र सरकार ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए शुरुआती बोली आमंत्रित की थी और 15 दिसंबर तक बोली दाखिल करने को कहा था। विनिवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) इस समय सभी सरकारी उद्यमों की हिस्सेदारी बेचने का मामला देखता है, जो मार्च के अंत तक वित्तीय बोली आकर्षित करने की स्थिति में होगा।

सामान्यतः हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में कम से कम 9 महीने लगते हैं, इसलिए यह सौदा वित्त वर्ष 24 में होने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि सरकार को आईडीबीआई की हिस्सेदारी बिकने से 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मिलने की उम्मीद है।

अन्य प्रमुख बिकवाली कॉनकॉर की है, जिसके लिए रोडशो शुरू होने वाला है और उम्मीद की जा रही है कि एक या दो महीने में बोली आमंत्रित की जाएगी। बहरहाल यह सौदा इस वित्त वर्ष में पूरा होने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि भूमि पट्टा नीति में स्पष्टता का अभी इंतजार है। अधिकारी ने कहा, ‘हम रोडशो शुरू कर रहे हैं और उसके बाद ईओआई पेश करेंगे। उसके बाद प्रक्रिया में 9 से 12 महीने लगेंगे।’

इसके अलावा शिपिंग कॉर्पोरेशन की भी बिक्री अगले साल पूरी होने की संभावना है क्योंकि यह विनिवेश के अंतिम चरण में है। सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों के समूह के  अंतर मंत्रालयी समूह ने सोमवार को आगे की विनिवेश की प्रक्रिया पर बैठक की है, ऐसे में मार्च के पहले रुचि पत्र जारी किया जा सकता है। 

Keyword: विनिवेश लक्ष्य, सरकार,
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