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गोपनीय आईपीओ की राह आसान

खुशबू तिवारी / मुंबई 11 14, 2022

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) गोपनीय आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की चाहत रखने वाली कंपनियों के लिए राह आसान कर रहा है। बाजार नियामक आईपीओ के लिए गोपनीय प्री-फाइलिंग के जरिये संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी और रुझान का आकलन करने की अनुमति देने की तैयारी में है। इससे कंपनियों को आईपीओ के साथ पूंजी बाजार में दस्तक देने से पहले ही संस्थागत निवेशकों की मांग का आकलन करने में मदद मिलेगी।

 उद्योग जगत से लगातार मांग की जा रही थी कि बाजार नियामक सूचनाओं के प्रवाह के मोर्चे पर कहीं अधिक लचीला रुख अपनाए। उद्योग की मांग को ध्यान में रखते हुए बाजार नियामक ने यह पहल की है। इससे पहले परिकल्पना की गई थी कि गोपनीय फाइलिंग ढांचे के तहत कंपनियां केवल नियामक और स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित करेंगी।

हालांकि अंतिम मसौदे में 'टेस्ट द वाटर (टीटीडब्ल्यू)' यानी निवेशकों के रुझान का आकलन करने का प्रावधान जोड़ा गया है। इससे आईपीओ लाने वाली कंपनियों को पहले ही निवेशकों की दिलचस्पी का आकलन करने में मदद मिलेगी। इस मामले से अवगत लोगों ने कहा कि केवल पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए अनुमति दी जाएगी।

 बाजार नियामक की इस पहल से कंपनियों की ऐसी चिंता कम होगी कि आईपीओ जारी करने की तिथि तक अपेक्षित पेशकश के लिए प्रचार-प्रसार संबंधी बाधाओं के कारण कहीं अनिश्चितता की स्थिति न पैदा हो जाए। नए प्रावधान के तहत अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने की भी अनुमति होगी।

इन देशों में गोपनीय फाइलिंग की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। इन देशों के नियामकों ने जारीकर्ता और प्रमुख मैनेजरों को क्यूआईबी जैसे संभावित निवेशकों के साथ मौखिक अथवा लिखित बातचीत करने की अनुमति दी है ताकि पेशकश में उनकी दिलचस्पी का पता लगाया जा सके।

निवेशकों के रुझान का पता लगाने के लिए क्यूआईबी के साथ की गई बातचीत की जानकारी बाजार नियामक के समक्ष प्रस्तुत मसौदा दस्तावेज तक सीमित रहेगी। मसौदा दस्तावेज के बारे में संभावित निवेशकों से कोई अन्य जानकारी साझा नहीं की जाएगी।

पूरे प्रचार-प्रसार के साथ आईपीओ की तैयारी करने वाली कंपनियों द्वारा नए प्रावधान के दुरुपयोग को रोकने के लिए कूलिंग-ऑफ अवधि का प्रावधान होना चाहिए। इसके अलावा नए प्रावधान के तहत की गई बातचीत के आधार पर किसी भी शोध रिपोर्ट के प्रकाशन पर भी रोक होगी।

 निवेश बैंकरों को निवेशकों की एक ऐसी सूची तैयार करने की जरूरत होगी जिसमें गोपनीय फाइलिंग के तहत बातचीत में शिरकत करने वाले निवेशकों की जानकारी हो। सेबी की आपत्तियों के लिए वैधता अवधि को मौजूदा 12 महीने से बढ़ाकर 18 महीने किया जा सकता है। इससे मार्केटिंग और विज्ञापन के लिए जारीकर्ता को पर्याप्त समय मिल सकेगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि नए प्रावधान से अनचाही सार्वजनिक जांच-परख में कमी आएगी और अवसरवादी मुकदमेबाजी की चिंता भी कम होगी।

Keyword: सेबी, आईपीओ,,
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