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GM mustard: सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने से पहले फील्ड ट्रायल के तहत छह प्लॉट पर हो चुकी थी बोआई

भाषा / नई दिल्ली 11 14, 2022

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसंधान केंद्र DRMR ने सुप्रीम कोर्ट में जैव प्रौद्योगिकी नियामक GEAC के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दायर किये जाने से कुछ दिन पहले ही पैदावार के मूल्यांकन के मकसद से खेत परीक्षण के छह प्लॉटों में genetically modified (GM) सरसों के हाइब्रिड DMH-11 की बोआई कर दी थी। 

Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) ने DMH -11 को ‘पर्यावरण परीक्षण के लिए जारी’ करने की अनुमति दी थी जिसे अदालत में चुनौती दी गई है। 

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक नियामक संस्था GEAC ने 18 अक्टूबर की अपनी बैठक में ICAR की देखरेख में परीक्षण, प्रदर्शन और बीज उत्पादन के लिए DMH-11 बीज को पर्यावरणीय परीक्षण के लिए जारी करने की सिफारिश की थी। 

DMH-11 एक हाइब्रिड बीज किस्म है - जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय में Centre for Genetic Manipulation of Crop Plants द्वारा विकसित किया गया है। इसको पर्यावरणीय परीक्षण के लिए जारी करने के फैसले ने वैज्ञानिकों, किसानों और कार्यकर्ताओं के बीच काफी नाराजगी है। 

GM विरोधी गुट ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। रैपसीड-सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR) के निदेशक पी के राय ने कहा, ‘हमें 22 अक्टूबर को बीज मिले और तीन नवंबर को शीर्ष अदालत में एक मामला सूचीबद्ध किया गया। इस अवधि के बीच उपज के मूल्यांकन के लिए इन बीजों को पहले ही बोया जा चुका था।’ DRMR को दो किलोग्राम DMH-11 बीज मिले थे। अनुसंधान निकाय ने आठ खेत परीक्षण वाले भूखंडों में से प्रत्येक में 50 ग्राम बीज के उपयोग की योजना बनाई थी, लेकिन यह केवल छह स्थानों पर ही इसे लगा सका। 

उन्होंने कहा कि तीन नवंबर को मामले की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने के बाद से अन्य दो स्थानों पर इसकी बोआई नहीं हुई। 

उन्होंने कहा कि खेत परीक्षण के अलावा दो प्रदर्शन भूखंडों में 600 ग्राम बीज पहले ही बोए जा चुके हैं। राय के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी मुख्यालय वाले ICAR के एक निर्देश के बाद DMH -11 बीजों का रोपण किया गया था। उन्होंने कहा, ‘तीन नवंबर के बाद से कोई और बुवाई नहीं की गई है।’ 

खेत परीक्षण के उद्देश्य के बारे में बताते हुए, राय ने कहा कि आज तक बीज विकसित करने वालों ने भारत में कुछ स्थानों पर संरक्षित वातावरण में DMH -11 हाइब्रिड बीज का जैव सुरक्षा अनुसंधान परीक्षण (BRL) -II ही किया है। BRL-II का परीक्षण नियंत्रित वातावरण में किया गया था। अब इसके पर्यावरण परीक्षण के लिए जारी किये जाने के साथ, कई स्थानों पर उपज के प्रदर्शन का पता लगाने के लिए DRMR की देखरेख में खुले मैदानों में इसका परीक्षण किया जाएगा। 

यह पूछे जाने पर कि क्या दावा सही है कि DHM-11 पारंपरिक किस्मों की तुलना में 25-30 प्रतिशत बेहतर पैदावार देता है, राय ने कहा, ‘डीएमएच-11 का भारत में उपज प्रदर्शन के लिए कभी परीक्षण नहीं किया गया है। खेत परीक्षण पूरा किए बिना यह कहना मुश्किल है कि यह जीएम हाइब्रिड किस्म मौजूदा किस्मों से बेहतर है।’ 

उपज का मूल्यांकन तीन मौसमों के दौरान तीन स्तरों पर किया जाता है। पहला स्तर 'इंस्टेंट हाइब्रिड ट्रायल' (IHT) है, जबकि दूसरा और तीसरा एडवांस हाइब्रिड ट्रायल -1 (AHT-I) और एडवांस हाइब्रिड ट्रायल- II (AHT-II) है। 

उन्होंने कहा कि यदि उपज प्रदर्शन आईएचटी स्तर पर विफल रहता है और निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता है, तो अगले स्तर के परीक्षण नहीं किए जाते हैं। 

उन्होंने कहा कि ICAR उपज प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए सख्त निर्धारित मानदंडों का पालन करता है। उन्होंने कहा कि यदि DHM-II तीनों परीक्षणों को मंजूरी देता है, तो GM हाइब्रिड बीज किस्म वाणिज्यिक स्तर पर जारी किये जाने के लिए अधिसूचना को तैयार होता है। ये फैसला उचित वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद किया जाता है। 

राय ने कहा कि डीआरएमआर DHM-11 की उपज के संदर्भ में प्रदर्शन की तुलना में तकनीक को लेकर ज्यादा चिंतित है। 

उन्होंने कहा, ‘एक वैज्ञानिक और रैपसीड सरसों अनुसंधान निदेशालय के रूप में मैं इसे एक ऐसी तकनीक के रूप में देख रहा हूं जिसका उपयोग हम उच्च उपज वाली किस्मों को विकसित करने के लिए कर सकते हैं।’ 

उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, यदि कोई मौजूदा किस्म 28-29 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज देती है, तो इस तकनीक का उपयोग करके उच्च उपज देने वाले संकरों में परिवर्तित किया जा सकता है। 'गिरिराज', 'पायनियर 45S46' और RBM-19 देश में उगाई जाने वाली सरसों की प्रमुख और संकर किस्में हैं। देश में लगभग 80-90 लाख हेक्टेयर भूमि पर सरसों की खेती की जाती है। 
Keyword: GM MUSTARD, ICAR, DRMR, Indian Council of Agricultural Research, Dhara Mustard Hybrid, DMH-11,
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