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साइबर सुरक्षा बन रही बड़ी चिंता

रुचिका चित्रवंशी / पणजी 11 14, 2022

पिछले 12 से 18 महीनों के दौरान साइबर खतरों में भारी बढ़ोतरी हुई है
वै​श्विक महामारी से पहले के मुकाबले साइबर खतरे 38 फीसदी तक बढ़ गए हैं
साइबर सुरक्षा अब कंपनियों के बोर्डरूम के एजेंडे में भी अपनी जगह बना ली है

हाल में एक भारतीय लॉजि​​स्टिक्स कंपनी को पता चला कि उसके 400 सर्वरों ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया। हालांकि उन्हें जल्द ही पता चल गया कि वे साइबर हमले के शिकार हो गए हैं लेकिन एक चेतावनी पर किसी का ध्यान नहीं गया था जो करीब तीन सप्ताह पहले ईमेल पर भेजी गई थी।

ईमेल के जरिये हैकर ने कंपनी के सभी डेटा चुराने और सिस्टम को नियं​त्रित करने का दावा करते हुए 25 बिटकॉइन यानी करीब 4.20 लाख डॉलर की फिरौती मांगी थी। बाद में कंपनी ने साइबर विशेषज्ञों को नियुक्त किया और ​स्थिति को संभालने की पहल की गई।

हैकर के सिस्टम को अलग-थलग करने के बाद सभी संभावित डेटा को दोबारा हासिल किया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और कुछ सूचनाओं की चोरी हो गई थी। ऐसे में फिरौती देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं था।

कंपनी ने फोरेंसिक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को इससे निपटने की जिम्मेदारी दी। उन्हें न केवल प्रौद्योगिकी बल्कि कानूनी बारीकियों में भी महारत हासिल होती है। उन्होंने हैक के दायरे में आने वाले विदेशी अधिकारियों के साथ संपर्क किया और फिरौती की रकम को 4 बिटकॉइन तक लाने के लिए हैकर के साथ बातचीत की।

पिछले 12 से 18 महीनों के दौरान साइबर खतरे, विशेष तौर पर रैंसमवेयर के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। वै​श्विक महामारी के बाद अर्थव्यवस्था कहीं अ​धिक डिजिटल हो गई है और ऐसे में साइबर अपराध के मामले भी बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वै​श्विक महामारी से पहले के मुकाबले साइबर खतरे 38 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

ईवाई के पार्टनर (साइबर सिक्योरिटी कंस​ल्टिंग लीडर) मुरली राव ने कहा, ‘डिजिटल इंडिया के विकास के साथ-साथ साइबर हमलों में भी लगातार वृद्धि हुई है।’ कंपनी की साइबर सुरक्षा में खामियों की पहचान करने में हैकर अब कहीं अधिक कुशल होते जा रहे हैं। ऐसे में आश्चर्य की बात नहीं है कि सीईओ के लिए साइबर सुरक्षा चिंता का विषय है और अब उसने बोर्डरूम के एजेंडे में भी अपनी जगह बना ली है।

डेलॉयट के लीडर (साइबर) गौरव शुक्ला ने कहा, ‘पहले यह एक प्रौद्योगिकी जो​खिम था जो अब एक कारोबारी जो​खिम बन चुका है।’

​स्विस रे इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन के अनुसार, रैनसमवेयर के मामलों और उनकी गंभीरता में हाल के वर्षों में जबरदस्त तेजी आई है। वै​श्विक 2020 साइबर हमलों के कारण करीब 945 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। चार प्रमुख वै​श्विक सलाहकार फर्म अपने साइबर सुरक्षा प्रभाग का विस्तार कर रही हैं। साथ ही वे कंपनियों को साइबर हमलों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए नई रणनीतियां भी तैयार कर रही हैं। हैकरों से पूरी तरह सुर​क्षित होने का कोई रास्ता नहीं है। ईवाई ने अपने ग्राहकों को साइबर सुरक्षा के लिए ‘शून्य अथवा मामूली भरोसा नीति’ अपनाने की सलाह दी है।

राव ने कहा, ‘ई-कॉमर्स और डिजिटल एंटरप्राइजेज को प्रौद्योगिकी-प्रौद्योगिकी और मानव-प्रौद्योगिकी मेल के मामले में सतर्क रहना चाहिए। साथ ही उन्हें लेनदेन में डिजिटल विश्वास सिद्धांत यानी शून्य अथवा मामूली भरोसा नीति पर अमल करना चाहिए।’

पीडब्ल्यूसी के पार्टनर शिवराम कृष्णन ने कहा, ‘ग्राहकों की अब केवल यह सुनने में दिलचस्पी नहीं है कि उन्हें क्या करना चाहिए बल्कि वे चाहते हैं कि कोई उनके लिए वही करे जो उन्हें करना चाहिए।’

कई साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अब ऐंड्रॉयड या आईओएस उपकरणों में खास विशेषज्ञता के साथ अपनी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। डेलॉयट अपनी साइबर सुरक्षा टीम में क्षेत्र विशेष के लिए खास विशेषज्ञता तैयार करने की कोशिश कर रही है। वह हरेक क्षेत्र के लिए धमकियों का एक प्रोफाइल तैयार कर रही है। उसका कहना है कि ऊर्जा एवं तेल क्षेत्र की जरूरतें बैंकिंग एवं फाइनैंस अथवा प्रौद्योगिकी क्षेत्र से अलग होंगी। उद्योग सूत्रों के अनुसार, कंपनियां अब साइबर सुरक्षा से संबंधित उत्पाद एवं सेवाओं पर 60 से 70 फीसदी अधिक रकम खर्च कर रही हैं। डेलॉयट के शुक्ला ने कहा, ‘सभी संगठनों के लिए साइबर सुरक्षा संबंधी जरूरतें एक जैसी नहीं होती हैं। उद्योग एवं क्षेत्र की जानकारी के साथ साइबर सुरक्षा संबंधी विशेषज्ञता का भविष्य है और हम उसे अगले स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।’

केपीएमजी के को-लीडर (ग्लोबल सिक्योरिटी प्रैक्टिस) अखिलेश टुटेजा ने कहा, ‘हम अपने कुछ बड़े ग्राहकों को साइबर जोखिम से निपटने में मदद करते हैं। भारत में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की हमारी एक सबसे बड़ी टीम है।’

साइबर अपराध एवं चुनौतियां

जालसाजी और एपीआई से संबंधित हमलों से लेकर ‘आपूर्ति श्रृंखला हमले’ तक साइबर अपराध आज कहीं अधिक लक्षित और परिष्कृत हैं। हैकर अब न केवल हमला करने के लिए बल्कि अधिकतम रिटर्न हासिल करने के लिए उपयुक्त समय की भी तलाश करते हैं। उद्योग के विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ‘आपूर्ति श्रृंखला हमले’ कंपनियों के लिए एक दुःस्वप्न बन गए हैं। इसके तहत किसी दूसरी कंपनी या अंतिम उपयोगकर्ता को लक्षित करने के लिए दूसरे या तीसरे पक्ष के सिस्टम को हैक किया जाता है। आंतरिक खतरा भी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। इसमें मूनलाइटिंग वाले कर्मचारी से लेकर असंतुष्ट कर्मचारी या किसी संगठन द्वारा लगाए गए व्यक्ति द्वारा संवेदनशील सूचनाओं में सेंधमारी की कोशिश की जा सकती है।

ईवाई ने अपने साइबर विभाग में 40 फीसदी और डेलॉयट ने 55 फीसदी की वृद्धि की है। पीडब्ल्यूसी को अगले साल तक अपने साइबर सुरक्षा विभाग के दोगुना होने की उम्मीद है। हालांकि उनके लिए कुशल कर्मियों की नियुक्ति एक बड़ी चुनौती है। अधिकतर कंपनियां परिसरों से नियुक्ति के बाद इन-हाउस प्रशिक्षण देने पर जोर दे रही हैं।

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