बिजनेस स?टैंडर?ड - आगे भी बेहतर कर संग्रह की आस
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आगे भी बेहतर कर संग्रह की आस

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली 11 14, 2022

वित्त वर्ष 2024 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह में 14 से 17 फीसदी वृद्धि का हो सकता है लक्ष्य

चालू वित्त वर्ष में बजट अनुमान से 1 से 1.5 लाख करोड़ रुपये ज्यादा रह सकता है कर संग्रह
चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने 14.2 लाख करोड़ रुपये रखा है प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य
1 अप्रैल से 10 नवंबर तक मिला बजट अनुमान का 61.31 फीसदी प्रत्यक्ष कर राजस्व
अगले वित्त वर्ष में जिंसों के दाम घटने और छंटनी से प्रभावित हो सकता है प्रत्यक्ष कर संग्रह

चालू वित्त वर्ष में कर प्रा​प्तियां बेहतर रहने के मद्देनजर केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2024 में प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को बरकरार रख सकती है।

वित्त मंत्रालय चालू वित्त वर्ष के संशो​धित अनुमान और वित्त वर्ष 2024 के बजट अनुमान पर काम कर रहा है। इसके प्रारं​भिक आंतरिक आकलन के अनुसार अगले वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 2023 के बजट अनुमान 14.2 लाख करोड़ रुपये से 14 से 17 फीसदी अ​धिक रहने का लक्ष्य तय करने की संभावना तलाशी जा रही है।

एक वरिष्ठ सरकारी अ​धिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘बजट तैयार करने की कवायद के तहत आंतरिक आकलन की प्रक्रिया जारी है। कर संग्रह का लक्ष्य नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि पर निर्भर करेगा क्योंकि मुद्रास्फीति में नरमी से अगले साल जीडीपी वृद्धि भी नरम हो सकती है। ऐसे में प्रत्यक्ष कर संग्रह की वृद्धि भी सीमित रह सकती है।’ अगर सकल कर राजस्व नॉमिनल जीडीपी वृद्धि की तुलना में ज्यादा बढ़ता है तो कर संग्रह में इजाफा हो सकता है। वित्त वर्ष 2023 के बजट अनुमान में नॉमिनल जीडीपी 11.3 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया था लेकिन वास्तविक नॉमिनल जीडीपी वृद्धि कीमतों में तेजी से कहीं ज्यादा रहने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2023 में सरकार को उम्मीद है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह के संशो​धित अनुमान को बढ़ाया जाएगा और यह बजट लक्ष्य से 1 लाख करोड़ से 1.5 लाख करोड़ रुपये अ​धिक रह सकता है।

1 अप्रैल से 10 नवंबर के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (रिफंड समायोजित करने के बाद) 8.71 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे साल के प्रत्यक्ष कर संग्रह के बजट अनुमान का 61.31 फीसदी है।

उक्त अ​धिकारी ने कहा कि बाह्य चुनौतियों और जिंसों के दाम बढ़ने के बावजूद अभी तक कॉर्पोरेट कर संग्रह पिछले साल की समान अवधि से 22 फीसदी ज्यादा रहा है। यह भारतीय उद्योग जगत के मुनाफा मार्जिन में सतत वृद्धि और कोविड के बाद सुधार को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा स्पष्टता 15 दिसंबर को अग्रिम कर संग्रह की तीसरी किस्त के भुगतान बाद आएगी।

कर संग्रह में ज्यादा वृद्धि से केंद्र को राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को जीडीपी के 6.4 फीसदी पर रखने में मदद मिलेगी। अ​धिकारी ने कहा, ‘ज्यादा स​ब्सिडी, विनिवेश में उम्मीद से कम प्रा​प्तियां और कुछ उत्पादों पर शुल्क में कटौती जैसे कुछ जो​खिम हैं लेकिन कर प्रा​प्तियों में उछाल से इसकी काफी हद तक भरपाई हो सकती है।’

वित्त वर्ष 2023 में प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 14.20 लाख करोड़ रुपये रखा गया था, जिनमें से 7.2 लाख करोड़ रुपये कॉर्पोरेट कर से और 7 लाख करोड़ रुपये व्य​क्तिगत आयकर और प्रतिभूति लेनदेन कर सहित अन्य मदों से आने का अनुमान लगाया गया था। 10 नवंबर तक कॉर्पोरेट आयकर की वृद्धि दर 22.03 फीसदी रही जबकि व्यक्तिगत आयकर में 40.64 फीसदी का इजाफा हुआ।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘जिंसों के दाम बढ़ने के बावजूद कॉर्पोरेट कर संग्रह में उल्लेखनीय वृ​द्धि हुई है। अगर आने वाले महीनों में जिंसों के दाम और घटते हैं तो कंपनियों की बिक्री बढ़ने से मार्जिन में सुधार होगा और अगले साल भी कॉर्पोरेट कर संग्रह बढ़ेगा।’

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘कंपनियों के मुनाफे पर दूसरी तिमाही में असर पड़ा है इसलिए आगे प्रत्यक्ष कर संग्रह की वृद्धि धीमी रह सकती है। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों की छंटनी से व्यक्तिगत आयकर संग्रह भी प्रभावित हो सकता है।’

Keyword: वित्त वर्ष 2024, प्रत्यक्ष कर संग्रह, बजट अनुमान, छंटनी, प्रारं​भिक आंतरिक आकलन, नॉमिनल जीडीपी,
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