बिजनेस स?टैंडर?ड - 3.1 फीसदी बढ़ा औद्योगिक सूचकांक
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3.1 फीसदी बढ़ा औद्योगिक सूचकांक

असित रंजन मिश्र / नई दिल्ली 11 11, 2022

विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन के कारण सितंबर में भारत का औद्योगिक उत्पादन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3.1 फीसदी बढ़ा है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) सितंबर 2021 में 4.4 फीसदी बढ़ा था जबकि अगस्त 2022 में यह 0.7 फीसदी घट गया था।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आईआईपी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन सितंबर, 2022 में 1.8 प्रतिशत बढ़ा। एक साल पहले की इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.3 प्रतिशत था। समीक्षाधीन अवधि में खनन उत्पादन 4.6 फीसदी और बिजली उत्पादन 11.6 फीसदी बढ़ा।

सितंबर में भारत के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में वृद्धि दर सुधरकर 3 महीने के उच्च स्तर 3.1 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अगस्त में इसमें संकुचन आया था। खनन और बिजली का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। वहीं वैश्विक मंदी और बढ़ी महंगाई की वजह से विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती रही है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों की वृद्धि दर क्रमशः 4.6 प्रतिशत, 1.8 प्रतिशत और 11.6 प्रतिशत रही है।

अगर कोविड के पहले के स्तर से तुलना करें तो सितंबर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और गैर टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं को छोड़कर हर श्रेणी में वृद्धि दर्ज की गई है। 

वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में आईआईपी में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 23.8 प्रतिशत थी। आईआईपी में शामिल 23 उद्योगों  में से 9 उद्योगों में संकुचन आया है, जिनमें तंबाकू, टेक्सटाइल, अपैरल, चमड़ा, लकड़ी, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल उपकरण शामिल हैं। बैंक आफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, ‘सकारात्मक बात यह है कि वाहन क्षेत्र के साथ गैर विद्युत मशीनरी में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसे धातुओं और गैर धातु खनिजों से समर्थन मिला है। साफ है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र  में गति आई है, जिससे मदद मिली है।’

उपभोग पर आधारित उद्योगों, पूंजीगत वस्तुओं में 10.3 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई है,  जो निवेश मांग का सूचक है। वहीं बुनियादी ढांचा से जुड़ी वस्तुओं में 7.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि इसे सरकार के पूंजीगत व्यय से समर्थन मिला है।  बहरहाल उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन (-4.5 प्रतिशत) और गैर उपभोक्ता वस्तु (-7.1 प्रतिशत) सेक्टर में सितंबर महीने में संकुचन आया है और लगातार दूसरे और तीसरे महीने में क्रमशः गिरावट आई है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में मांग कमजोर होने का पता चलता है।

केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थसास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि पूंजीगत वस्तुओं और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। यह उत्साहजनक है। इससे पूंजीगत व्यय चक्र में तेजी का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि भारत की टिकाऊ वृद्धि को गति देने में घरेलू खपत की मांग में सुधार अहम होगा। इस तरह से आईआईपी उपभोक्ता वस्तुओं और गैर उपभोक्ता वस्तुओं में कमजोर मांग चिंताजनक है। आगे चलकर महंगाई कम होने पर हम खपत में सुधार देख सकते हैं।’

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि उच्च संकेतकों से पता चलता है कि अक्टूबर में आर्थिक गतिविधियां सितंबर की तुलना में सुस्त होंगी, क्योंकि त्योहारों के मौसम के पहले तेजी आई थी और त्योहार व छुट्टियों के पहले स्टॉक जमा किया जा रहा था। सबनवीस ने कहा कि वह उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में बेहतर टिकाऊ वृद्धि होगी। सबनवीस ने कहा, ‘यह जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी की तरह खपत में वृद्धि नहीं है। सोने व आभूषण के क्षेत्र में भी मांग बढ़ी है।’

अपनी हाल की रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का अनुमान वित्त वर्ष 23 के लिए 60 आधार अंक घटाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया था।

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले महीने वित्त वर्ष 23 के लिए वृद्धि अनुमान घटाकर 7.2 प्रतिशत से 7 प्रतिशत कर दिया था।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछले महीने मौद्रिक नीति संबंधी बयान में कहा था कि बाहरी भू राजनीतिक तनावों, वैश्विक वित्तीय स्थिति तंग होने और विदेश से मांग में संभावित गिरावट के कारण वृद्धि नीचे जाने का जोखिम है।

Keyword: औद्योगिक उत्पादन, सितंबर,
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