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एसआईपी निवेश 13 हजार करोड़

एसआईपी निवेश बढ़ने के बाद भी ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में निवेश अक्टूबर में 13 फीसदी घटा
अभिषेक कुमार / मुंबई November 11, 2022

म्युचुअल फंड योजनाओं में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिये निवेश अक्टूबर में लगातार चौथे महीने बढ़कर पहली बार 13,000 करोड़ रुपये के पार निकल गया जबकि इक्विटी योजनाओं ने हालिया आंकड़ों के बराबर पहुंचने में संघर्ष किया।

एसआईपी के जरिये मजबूत निवेश के बावजूद अक्टूबर में ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में शुद्ध‍ निवेश मासिक आधार पर 33 फीसदी घटकर 9,400 करोड़ रुपये रह गया, जो एकमुश्त रकम के निवेश में अहम गिरावट का संकेत देता है। पैसिव में शुद्ध‍ निवेश मासिक आधार पर  25 फीसदी घटकर 10,261 करोड़ रुपये रहा। उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों  से यह जानकारी मिली।

एम्फी के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, म्युचुअल फंड निवेशकों ने माह दर माह सतत योगदान के जरिए सुदृढ़ता का प्रदर्शन किया, जिससे इक्विटी की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) और खातों की संख्या में बढ़ोतरी हुई।

कोविड बाद के काल में बाजार की चाल से एसआईपी निवेश अप्रभावित रहा है। यह कोविड पूर्व अवधि के 8,000 करोड़ रुपये के मुकाबले अक्टूबर 2022 में बढ़कर 13,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। खुदरा निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को पहले तो बाजार में तेजी की वजह बताई गई और अब बाजार एक साल से एक  दायरे में बना हुआ है। उद्योग के आला अधिकारी और म्युचुअल फंड वितरकों का मानना है कि निवेशक अब परिपक्व हो गए हैं और इक्विटी बाजार में होने वाले उतारचढ़ाव को मौका मानते हैं।

आनंद राठी वेल्थ की प्रमुख (म्युचुअल फंड) श्वेता रजनी ने कहा, पिछले कुछ महीनों के शुद्ध‍ निवेश के आंकड़े  स्पष्ट बताते हैं कि निवेशक परिपक्व हो गए हैं क्योंकि इक्विटी बाजार में अल्पावधि के झंझावात के बावजूद शुद्ध‍ रूप से इक्विटी की खरीदारी जारी है।

यू​नियन ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीईओ जी प्रदीपकुमार ने कहा, म्युचुअल फंड उद्योग अभी बेहतर स्थिति में है क्योंकि खुदरा निवेशकों के मजबूत निवेश ने उतारचढ़ाव  कम किया है और कम उतारचढ़ाव से उद्योग को ज्यादा ​निवेश आकर्षित करने में मदद मिल रही है।

विदेशी निवेशकों ने वित्त वर्ष 2023 में भारतीय बाजार से  रिकॉर्ड निवेश निकासी की है। हालांकि इस निकासी से बाजार धराशायी नहीं हुआ, जैसा कि कुछ साल पहले होता था क्योंकि देसी संस्थागत निवेशक व खुदरा निवेशक इक्विटी की खरीद व म्युचुअल फंडों के जरिए  निवेश से रकम लगातार झोंकते रहे।

प्रदीपकुमार के मुताबिक, देसी निवेशकों से इस तरह के  समर्थन  से बाजार को अहम गिरावट से बचाने में मदद मिली और म्युचुअल फंडों को अपने साथ नए निवेशक  जोड़ने में भी मदद मिली।

हालांकि तस्वीर उतनी गुलाबी शायद नहीं है, जैसा कि सकल एसआईपी निवेश के आंकड़े बताते हैं। सितंबर तक के उपलब्ध एसआईपी निवेश के शुद्ध‍ आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों ने पिछले कुछ महीनों में अपने एसआईपी खातों से खासी  रकम निकाली भी है। सितंबर में निवेशकों ने एसआईपी खातों से 6,578 करोड़ रुपये निकाले, जो पिछले 11 महीने का सर्वोच्च स्तर है।

अग्रणी वितरकों के मुताबिक, ज्यादा निवेश निकासी की वजह त्योहारी सीजन, बढ़ती महंगाई व आवास कर्ज पर  ईएमआई में इजाफे के कारण बढ़ा खर्च है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद डेट फंडों में शुद्ध निवेश अक्टूबर में नकारात्मक बना रहा। लॉन्ग ड्यूरेशन व गिल्ड फंडों में शुद्ध‍ निवेश को छोड़ दें तो सभी अन्य गैर-नकदी डेट फंडों से खासी निकासी हुई।

डेट फंडों में निवेशकों की दोबारा दिलचस्पी हो सकती है क्योंकि हालिया महीनों में ब्याज दरों में हुई बढ़ोतरी से डेट फंडों का यील्ड टु मैच्योरिटी अल्पावधि वाले फंडों मसलन लिक्विड फंडों के लिए 6 से 7 फीसदी हो गया है जबकि लॉन्ग ड्यूरेशन फंडों मसलन कॉरपोरेट बॉन्ड फंडों के लिए 7 से  8 फीसदी।

अगर फंड प्रबंधन के खर्च को लेकर चलें तो भी लॉन्ग ड्यूरेशन फंडों में वाईटीएम 6.5 फीसदी से ऊपर बैठता है, जो अग्रणी बैंकों की तरफ से एफडी पर दिए जा रहे ब्याज से ज्यादा है।

Keyword: म्युचुअल फंड, एसआईपी, पंजीकरण, निवेश,
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