बिजनेस स?टैंडर?ड - टार्गेट मैच्योरिटी फंडों पर एएमसी का जोर
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टार्गेट मैच्योरिटी फंडों पर एएमसी का जोर

अभी कम से कम 10 अलग-अलग तरह के टार्गेट मैच्योरिटी फंड हैं
अभिषेक कुमार / मुंबई November 08, 2022

फिक्स्ड इनकम के क्षेत्र में टार्गेट मैच्योरिटी फंड निवेश का मुख्य केंद्र बन रहा है, ऐसे में परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां (एएमसी) अलग-अलग तरह के टार्गेट मैच्योरिटी फंड लेकर आ रही हैं ताकि जोखिम-प्रतिफल की बेहतर योजना सामने रख सके। साथ ही प्रतिफल अधिकतम हो और उनकी योजना विभिन्न तरह की पेशकश में टिक सके।

एएए रेटिंग वाली सार्वजनिक कंपनियों की प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले ओपन ऐंडेड डेट फंड के तौर पर पहले शुरू हुए टार्गेट मैच्योरिटी फंड के अब कम से कम 10 किस्में हैं, अगर हम पोर्टफोलियो की परिसंपत्ति मिश्रण पर नजर डालें। अब ये योजनाएं मुख्य रूप से गिल्ट, स्टेट डेवलपमेंट लोन या एएए रेटिंग वाली कॉरपोरेट प्रतिभूतियों में निवेश करती हैं। इसके अलावा योजनाओं की अन्य रेंज भी है, जहां अलग-अलग तरह की ऐसी प्रतिभूतियां हैं मसलन निफ्टी एएए बॉन्ड व एसडीएल, 50: 50 इंडेक्स, क्रिसिल आईबीएक्स 70:30 सीपीएसई व एसडीएल इंडेक्स आदि।

उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए फंड हाउस नई तरह की योजनाएं पेश करने के लिए बाध्य हुए हैं। म्युचुअल फंड के एक आला अधिकारी ने कहा, यहां गलाकाट प्रतिस्पर्धा है। हर एएमसी चाहती है कि उसका वाईटीएम (यील्ड टु मैच्योरिटी) सं​भावित तौर पर सबसे ज्यादा हो ताकि उच्च निवेश आकर्षित किया जा सके, लिहाजा वे प्रयोग करने पर बाध्य हुई हैं। उन्होंने कहा, किस्में हमेशा से ही बेहतर होती हैं, खास तौर से ऐसे देश में जहां खरीदने से पहले दिखाओ का चलन है।

अभी परिसंपत्तियों के अलग-अलग मिश्रण से पिछले रिटर्न या  वाईटीएम में बहुत ज्यादा अंतर नहीं दिखा है, जो भविष्य के रिटर्न का अच्छा संकेतक है। पांच योजनाओं 2025 में परिपक्व हो रही हैं और इनमें से तीन का वाईटीएम 7.36 फीसदी से लेकर 7.5 फीसदी के दायरे में है। यह जानकारी वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों से मिली।

विशेषज्ञों के मुताबिक, विशाखित परिसंपत्तियां भी पोर्टफोलियो में जोखिम घटाने में मदद कर रही है। गिल्ट फंड सुरक्षित होते हैं। सामान्य तौर पर स्टेट डेवलपमेंट लोन, केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों के मुकाबले बेहतर प्रतिफल की पेशकश करते हैं, लेकिन इसके साथ नकदी का जोखिम होता है। इसी वजह से ज्यादातर टार्गेट मैच्योरिटी फंड एसडीएल में अपना निवेश 50 से 60 फीसदी तक सीमित रखते हैं।

इंटरनैशनल मनी मैटर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) राहुल जैन ने कहा, एसडीएल सामान्य तौर पर बेहतर रिटर्न की पेशकश करते हैं, लेकिन ये बहुत ज्यादा तरल नहीं होते। अगर तरलता कमजोर है तो बड़ी निवेश निकासी के समय प्रतिफल को झटका लग सकता है।

निवेश सलाहकारों व विश्लेषकों ने कहा कि टार्गेट मैच्योरिटी फंडों का चयन करते समय खुदरा निवेशकों को परिसंपत्ति मिश्रण पर बहुत ज्यादा विचार नहीं करना चाहिए और ऐसी पेशकश के साथ आगे बढ़ना चाहिए जिसकी मैच्योरिटी उनके निवेश नजरिये के मुताबिक हो।

जैन ने कहा, रिटर्न का अंतर सामान्य तौर पर 20 से 30 आधार अंकों से ज्यादा नहीं होता, चाहे वह एसडीएल हो, गिल्ट हो या फिर एएए पीएसयू। ऐसे में खुदरा निवेशकों को इसमें बहुत माथापच्ची करने की जरूरत नहीं है। रिटर्न में काफी अंतर आ सकता है अगर निवेश की रकम बड़ी हो।

प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स  के संस्थापक विशाल धवन ने कहा, टार्गेट मैच्योरिटी में मैच्योरिटी की तारीख सबसे अहम पहलू है। परिसंपत्ति मिश्रण की अहमियत बहुत ज्यादा नहीं है जब तक कि निवेशकों को जोखिम उठाने की इच्छा न हो और वह सिर्फ सरकारी प्रतिभूतियों के साथ सहज महसूस करता हो।टार्गेट मैच्योरिटी फंड में संभाव्य रिटर्न  की पेशकश की जाती है,अगर निवेशक मैच्योरिटी तक निवेशित रहता है।

Keyword: फिक्स्ड इनकम, मैच्योरिटी फंड निवेश,
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