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ग्रीन बॉन्ड का मसौदा कुछ ही दिनों में

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली November 06, 2022

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), बहुपक्षीय संस्थाओं व अन्य हिस्सेदारों के साथ व्यापक विमर्श के बाद अब सरकार अपने 16,000 करोड़ रुपये का पहला ग्रीन बॉन्ड जारी करने की रूपरेखा के साथ अब तैयार है।  

बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक इस ढांचे से सड़कों, रेलवे, शहरी परिवहन और कृषि एवं सामाजिक क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों की हरित और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण किए जाने की संभावना है। उम्मीद की जा रही है कि इस सप्ताह या अगले सप्ताह की शुरुआत में इसका मसौदा आ सकता है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘मसौदे पर काम किया गया है। वित्त मंत्री (निर्मला सीतारमण) और आर्थिक मामलों के सचिव (अजय सेठ) इसकी घोषणा के वक्त के बारे में फैसला करेंगे।’

अधिकारी ने कहा, ‘इस ढांचे में सभी क्षेत्रों का वित्तपोषण शामिल होगा। हम विभिन्न सेक्टर के रूप में इसे हरित तक सीमित करके देख रहे हैं। यहां तक कि अगर कृषि या सामाजिक क्षेत्र की परियोजना हो, तब भी उसे ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर के रूप में देखा जाएगा।’

सूत्रों के मुताबिक कुछ परियोजनाएं जो स्वाभाविक रूप से इसमें शामिल हो सकती हैं, उनमें अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं जैसे सौर, पवन आदि शामिल है और शहरी परिवहन की पहल जैसे सड़क परिवहन का विद्युतीकरण, मेट्रो परियोजनाएं आदि शामिल होंगी। वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही (अक्टूबर-मार्च) के उधारी कैलेंडर के तहत वित्त मंत्रालय ने घोषणा की थी कि वह 16,000 करोड़ रुपये का सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड जारी करेगा।

इसके साथ भारत उन 25 देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनकी सरकारों ने जलवायु को सतत बनाए रखने और ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और पहलों के लिए बॉन्ड जारी किए हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन नितिन गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा था कि सरकार में इस बात पर चर्चा हो रही है कि कुछ कर लाभ दिए जाएं, जिससे इन्हें निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाया जा सके। उन्होंने कहा था, ‘इस मसले पर चर्चा हुई है। यह नीतिगत फैसला है, लेकिन अब तक कुछ भी ठोस फैसला नहीं हुआ है।’अभी यह साफ नहीं है कि इस मसले पर कोई अंतिम फैसला हुआ है या नहीं।

सरकार और रिजर्व बैंक ने विश्व बैंक जैसे बहुपक्षीय निकायों से सहायता की मांग की थी। साथ ही अन्य देशों के ढांचों की जांच की जा रही है, जहां ग्रीन फाइनैंसिंग मार्केट की अच्छी स्थिति है। जुटाया गया यह धन उन परियोजनाओं और पहल में लगाया जाएगा, जिससे भारत सीओपी की प्रतिबद्धताएं पूरी कर सके।

इस कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में भारत ने सीओपी26  के दौरान 2030 तक गैर जीवाश्म ऊर्जा 500 गीगावॉट करने और 2030 तक अपनी ऊर्जा की आधी जरूरतें इससे हासिल करने, कार्बन उत्सर्जन घटाकर 2030 तक 1 अरब टन करने, अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेंसिटी 2030 तक घटाकर 45 प्रतिशत करने और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन की प्रतिबद्धता जताई थी। ज्यादातर देशों के मानकों के मुताबिक हरित बॉन्ड का प्रतिफल बेंचमार्क दरों से थोड़ा कम होता है।

Keyword: आरबीआई, ग्रीन बॉन्ड, सड़कों, रेलवे, शहरी परिवहन,
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