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दीवाली पर खर्च हुआ जमकर अब कैसे लाएं बजट पटरी पर

अधिक लागत वाले क्रेडिट कार्ड ऋण को जल्दी से चुकाने के उपाय करें या उसे कम ब्याज दर वाले कर्ज में बद
बिंदिशा सारंग /  11 06, 2022

मुंबई की एक कंपनी में बतौर सहायक  निदेशक काम करने वाले 32 वर्षीय जे चौधरी (बदला हुआ नाम) ने इस साल शानदार दीवाली मनाई। उन्होंने जल्द ही शुरू होने वाले अपने यूट्यूब चैनल के लिए 79,000 रुपये का मिररलेस डिजिटल एसएलआर कैमरा और 43,000 रुपये के श्योर एसएम7बी माइक समेत कई गैजेट खरीदे। भारी छूट देखकर वे अपने परिवार के लिए तोहफे खरीदे बगैर भी न रह सके।

उन्होंने यह सब सामान क्रेडिट कार्ड, नो-कॉस्ट ईएमआई और बाय नाउ पे लेटर (बीएनपीएल) सुविधा के तहत खरीदे। मगर आसान उधारी और अधिक खर्च के कारण उनकी आर्थिक हालत गड़बड़ हो गई है। अब उनकी कुल आय का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा ईएमआई में ही जा रहा है।

दीवाली पर ऐसे ही खर्च के कारण चौधरी की तरह कई अन्य लोगों की वित्तीय स्थिति भी चरमरा गई है। बैंकबाजार डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी आदिल शेट्टी ने कहा, 'त्योहारी सीजन के दौरान जोश-जोश में ज्यादा चीजें खरीदना आम बात है। नो-कॉस्ट ईएमआई और लो-कॉस्ट ईएमआई जैसे विकल्प भी खरीदारी के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं। ऐसे में जरूरत से अधिक खर्च करना आसान हो गया है।'

अपने बजट का रखें ध्यान

सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि आपका खर्च किस हद तक बढ़ गया है। एसोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के बोर्ड सदस्य विशाल धवन ने कहा, 'पिछले 24 से 36 महीनों के बैंक विवरण एवं क्रेडिट कार्ड विवरण के जरिये आप अपने सामान्य खर्च एवं त्योहारी सीजन में किए गए खर्च की तुलना कर सकते हैं।' 

हाथ रोककर करें खर्च 

कम खर्च के उपायों के साथ आर्थिक स्थिति को सुधारने की कोशिश करें। फिनसेफ के संस्थापक निदेशक मृण अग्रवाल ने कहा, 'अगले कुछ हफ्तों के लिए जीवनशैली से जुड़े गैर जरूरी खर्च पर लगाम लगाएं।' इसमें कुछ महीने लग सकते हैं। अपने क्रेडिट कार्ड को आसान पहुंच से दूर रखने और शॉपिंग साइटों पर दर्ज किए गए कार्ड को हटाने जैसे उपायों के साथ खर्च करने की इच्छा पर अंकुश लगाएं। वित्तीय योजना बनाने वाली फर्म हम फौजी इनीशिएटिव के सीईओ और बाजार नियामक सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार संजीव गोविल ने कहा, 'बाहर खाना खाने, छुट्टी में सैर सपाटे पर जाने  आदि गैर-जरूरी खर्च में कटौती करें।'

ग्रेस पीरियड के लिए पूछें

क्रेडिट कार्ड कंपनी या अन्य उधारदाताओं से ग्रेस पीरियड के बारे में पूछने से न हिचकिचाएं। गोविल ने कहा, 'कुछ ऋणदाता ब्याज लगाने से पहले कर्ज चुकाने के लिए आपको समय दे सकते हैं, जबकि कुछ ऋणदाता कम ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं।'

कुछ ऋण खाते के प्रावधान लचीले हो सकते हैं। इससे आपको कर्ज चुकाने में सहूलियत हो सकती है। गोविल ने कहा, 'पहले उन ऋण खातों की अदायगी पर ध्यान दें जिनके प्रावधान लचीले नहीं हैं।'

क्रेडिट कार्ड की उधारी को पहले चुकाएं

क्रेडिट कार्ड के जरिये ली गई उधारी की अदायगी पर ध्यान केंद्रित करें क्योंकि वह सबसे महंगा कर्ज होता है। इस पर ब्याज 36 से 42 फीसदी तक वसूला जाता है। शेट्टी ने कहा, 'अपने क्रेडिट कार्ड के कर्ज को ईएमआई में बदलने का प्रयास करें।' क्रेडिट कार्ड ईएमआई पर ब्याज दरें 15 से 20 फीसदी के दायरे में होती हैं। ऐसे में ऋण को ईएमआई में बदलने से आपको काफी राहत मिल सकती है। इसके अलावा आप अपने रिवार्ड पॉइंट को भुनाने और कैशबैक दावा करने पर भी विचार कर सकते हैं। 

धवन ने कहा, 'यह भी देखें कि क्या आप पर्सनल लोन या बीमा पॉलिसी पर कर्ज जैसे सस्ते ऋण का उपयोग कर सकते हैं।' अग्रवाल ने कहा कि आप गोल्ड लोन या सावधि जमा पर भी कर्ज लेने का विचार कर सकते हैं।

यदि आपके पास इक्विटी म्युचुअल फंड जैसे निवेश हैं तो पता लगाएं कि आपको उनसे कितनी आय होती है और उसकी तुलना ऋण की ब्याज अदायगी से करें। यदि रिटर्न की दर कम हो तो आपको अपने कुछ निवेश को भुनाकर ऋण चुका देना चाहिए। 

बीएनपीएल ऋण को हल्के में न लें

जब आप बीएनपीएल पर कोई वस्तु खरीदते हैं तो एकमुश्त भुगतान का झंझट नहीं होता है। पूरी रकम को ईएमआई में बदल दिया जाता है। यदि आप बीएनपीएल ऋण सुविधा का उपयोग सावधानीपूर्वक नहीं करेंगे तो आपका ऋण बोझ बढ़ सकता है। हालांकि शुरुआती दिनों में इसकी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होता है लेकिन यदि आप इस सुविधा का उपयोग दो महीने से दो साल के बीच लंबी अवधि के लिए करते हैं तो बाद में वार्षिक ब्याज दर 36 फीसदी तक बढ़ सकती है।

लंबी अवधि के ऋण के लिए इस सुविधा का इस्तेमाल करने से बचें। यदि किसी कारणवश इसकी अदायगी में अधिक समय लग सकता है तो इसके लिए सस्ते विकल्पों का उपयोग करें।

नो-कॉस्ट ईएमआई का समय पर भुगतान करें

नो-कॉस्ट ईएमआई अनिवार्य रूप से व्यापारियों और उधारदाताओं के बीच ब्याज रियायत संबधी योजना है। इसमें ब्याज लागत माफ नहीं की जाती है बल्कि ब्याज लागत का वहन ग्राहक के बजाय, विनिर्माता और व्यापारी करते हैं।

याद रखें कि नो-कॉस्ट ईएमआई विकल्प चुनने पर आपको कुछ छूट नहीं मिलती है, जो अग्रिम भुगतान पर मिल सकती थीं। कभी-कभी ब्याज लागत को भी उत्पाद की कीमत में जोड़ दिया जाता है और फिर उसे ईएमआई में बदल दिया जाता है।

यदि आप अधिक कीमत या अतिरिक्त शुल्क चुकाए बिना नो-कॉस्ट ईएमआई विकल्प के साथ बड़ी खरीदारी करते हैं तो वह अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि ईएमआई का समय पर भुगतान करें ताकि किसी भी अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।

निवेश किए गए पैसे को खर्च में निकालने से बचें

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के मुताबिक निवेशकों ने सितंबर में अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) खातों से 6,578 करोड़ रुपये निकाले जो 11 महीनों में सबसे अधिक है। इसमें से कुछ रकम मकान के डाउन पेमेंट में खर्च हो गई जबकि एक बड़ा हिस्सा त्योहार से पहले के खर्च में चला गया।

धवन ने कहा, 'दीवाली की खरीदारी जैसे कार्यों के लिए एसआईपी को भुनाने से बचें क्योंकि यह सेवानिवृत्ति, बच्चों की शिक्षा आदि लंबी अवधि के खर्च के लिए होते हैं।' यदि आपने ऐसा कुछ किया है तो उसकी भरपाई करें। धवन ने कहा, 'ऋण की अदायगी के बाद अपना एसआईपी निवेश बढ़ाने की कोशिश करें ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।'

आगे की योजना बनाएं

त्योहार के दौरान अधिक खर्च होने से लघु एवं मध्यावधि के वित्तीय लक्ष्य को हासिल करने की आपकी क्षमता घट सकती है। इसलिए अगले साल के लिए पहले से योजना तैयार रखें। ऋण अदायगी के लिए अपनी क्षमता के अनुकूल विकल्पों का चयन करें।

Keyword: दीवाली पर खर्च, क्रेडिट कार्ड, नो-कॉस्ट ईएमआई,
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