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जीएम सरसों की बोआई पर अभी रोक

भाविनी मिश्र, नितिन कुमार और संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 11 03, 2022

 सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह 10 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई होने तक जीएम सरसों की बोआई करने से लोगों को रोके। केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस मामले में नवीनतम तथ्यों को अदालत में पेश करने के लिए सोमवार तक का समय चाहिए।

अदालत के निर्देश से जीएम सरसों की इसी रबी सीजन में बोआई करने की योजना पटरी से उतर सकती है। अदालत ने कहा कि याचियों ने जीएम सरसों को हानिकारक बताया है। याची अरुणा रोड्रिग्स की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि अदालत द्वारा नियुक्त तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने किसी भी खरपतवार नाशक फसल का उपयोग नहीं करने की सलाह दी है। याचिका में कहा गया है कि संशोधित बीज गैर-जीएम सरसों की फसलों को दूषित कर सकते हैं और ऐसे बीजों की बोआई रोक दी जानी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने आज केंद्र सरकार से कहा कि वह 10 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई होने तक जीएम सरसों की बोआई करने से लोगों को रोके। सुनवाई के दौरान केंद्र ने शीर्ष न्यायालय से कहा कि उसे हाल के तथ्यों को सामने रखने के लिए वक्त की जरूरत है और उसे सोमवार तक समय चाहिए।

उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश से चालू रबी सत्र में जीएम सरसों की जल्दी बोआई पर रोक लग सकती है, क्योंकि आदर्श रूप से बोआई अगले 10 से 15 दिनों में बंद हो जाएगी। न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और सुधांशु धूलिया के पीठ ने कहा कि याचियों द्वारा यह कहा गया है कि यह फसल हानिकारक है। याची अरुणमा रोड्रिग्स की ओर से पेश होते हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि न्यायालय द्वारा नियुक्त तकनीकी विशेषज्ञों की समिति (टीईसी) ने किसी खरपतवार नाशक फसल के इस्तेमाल के खिलाफ राय दी थी।

उन्होंने कहा, ‘यह भी कहा गया था कि पूरी नियामकीय व्यवस्था चरमरा गई है और इसमें सुधार करने की जरूरत है।’ भूषण ने कहा कि दुरुस्त की गई व्यवस्था को कम से कम 10 साल वक्त दिए जाने की जरूरत है। उन्होने कहा, ‘इस वक्त भी किसी तरह की जीन संवर्धित किस्म को पर्यावरण संबंधी हरी झंडी के पहले वक्त दिया जाना चाहिए।

2017 में संसद की समिति की रिपोर्ट में भी यही कहा गया है।’ आवेदन में कहा गया है कि संवर्धित बीजों गैर जीएम सरसों की फसल में मिलाया जा सकता है और इसलिए इस तरह के बीज को अभी रोका जाना चाहिए। तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने केंद्र से कहा कि अगली सुनवाई तक बोआई का काम रोका जाए।

याचिका में खरपतवार नाशक फसल का इस्तेमाल न करने की वजह बताई और कहा कि अमेरिका और कनाडा में इस तरह की फसल से सुपर वीड्स उभरे हैं। याचिका में कहा गया है, ‘सिर्फ अमेरिका में सुपरवीड्स ने 2012 तक अनुमानित रूप से 2.4 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल पर कब्जा कर लिया है। भारत में भूमिधारिता बहुत छोटी है, जिसे देखते हुए यह आपदा साबित होगा।’

याचिका में यह भी कहा गया है कि वीडिंग में लगी तमाम महिलाएं रोजगार का वैकल्पिक साधन न मिलने से बेरोजगार हो जाएंगी, अगर इस तरह की फसल आती है। इसमें कहा गया है कि टीईसी की सिफारिशों में एटी फसलों पर प्रतिबंध लगाए जाने की बात कही गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि सरसों के एचटी डीएमएच-11 और इसके एचटी मूल में मिलावट रोका नहीं जा सकता।

याचिका में कहा गया है, ‘हमारे बीज के स्टॉक में मिलावट अपरिहार्य रूप से होगा, जिससे हमारा खाना जहरीला हो जाएगा।’ इस मसले पर बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, ‘न्यायालय ने जीएम सरसों को प्रतिबंधित नहीं किया है बल्कि सिर्फ सुनवाई की अगली तारीख दी है।

इसके बारे में हम विस्तृत ब्योरा दाखिल करेंगे।’ बहरहाल न्यायालय ने अपने आदेश से वैज्ञानिक समुदाय की मौजूदा रबी सत्र में जीएम सरसों की खेती करने की उम्मीदों को अधर में लटका दिया है, क्योंकि बोआई का आदर्श समय नवंबर के अंत तक का होता है।

नैशनल एकेडमी आफ एग्रीकल्चरल साइंस (नास) और ट्रस्ट फार एडवांसमेंट आफ एग्रीकल्चर साइंटिस्टट (टास) के वैज्ञानिकों ने हाल में कहा था कि इस समय करीब 10 किलो डीएमएच-11 बीज उपलब्ध है, जिसमें से करीब 2 किलो पहले ही आईसीएआर के रेपसीड और सरसों महानिदेशालय, भरतपुर को दिया गया है।

Keyword: जीएम सरसों, बोआई,
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