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एसआईपी निवेश का 80 फीसदी इक्विटी फंडों में

अभिषेक कुमार / मुंबई November 03, 2022

पिछले दो वर्षों में हाइब्रिड व पैसिव फंडों को लेकर ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं की तुलना में खासी दिलचस्पी नजर आई। हालांकि जब बात सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) की बात हो तो ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं की प्रतिस्पर्धी के तौर पर ये नहीं उभर पाए हैं।

सिस्टमै​टिक इन्वेस्टमेंट प्लान के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एसआईपी के जरिए हुए शुद्ध‍ निवेश का 80 फीसदी से ज्यादा सितंबर में ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में चला गया। इसकी तुलना में सिर्फ छह फीसदी पैसिव योजनाओं में और 8 फीसदी हाइब्रिड योजनाओं में गया। सितंबर में शुद्ध‍ एसआईपी निवेश में डेट योजनाओं की भागीदारी महज 2 फीसदी रही।

निवेश सलाहकार उतारचढ़ाव वाली परिसंपत्तियों में एसआईपी के जरिए निवेश की सलाह देते हैं ताकि रुपये की औसत लागत का अधिकतम फायदा उठाया जा सके। इसी वजह से एसआईपी निवेश के लिए इक्विटी ​योजनाएं सबसे ज्यादा तरजीही विकल्प हैं।

निवेशक आम तौर पर इक्विटी बाजारों में नरमी के दौरान एकमुश्त रकम के निवेश के लिए डेट व हाइब्रिड योजनाओं का इस्तेमाल करते हैं। कई वजहों से पिछले कुछ वर्षों के दौरान पैसिव व हाइब्रिड योजनाओं के इर्द-गिर्द काफी बातें हुई हैं।

हाइब्रिड योजनाओं को इक्विटी योजनाओं के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित विकल्प बताया गया था, जब बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। पैसिव योजनाओं को कमजोर प्रदर्शन वाले लार्जकैप फंडों के विकल्प के तौर पर पेश किया गया।

पैसिव योजनाओं की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) मार्च 2021 व सितंबर 2022 के बीच 88 फीसदी बढ़ीं। हाइब्रिड फंडों ने इस अवधि में 44 फीसदी की वृद्धि दर्ज की।

सकल बनाम शुद्ध‍

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों से पता चलता है कि ऐक्विट योजनाओं व अन्य योजनाओं (डेट, हाइब्रिड व पैसिव) में सकल एसआईपी निवेश इस वित्त वर्ष में बढ़ा है।

इक्विटी योजनाओं में सकल निवेश इस वित्त वर्ष में सितंबर तक 6 फीसदी बढ़कर 10,956 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो मार्च में 10,365 करोड़ रुपये था। बाकी ओपन एंडेड योजनाओं के मामले में सकल एसआईपी निवेश में बढ़ोतरी सिर्फ 3 फीसदी रही। ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में शुद्ध‍ निवेश जून में बढ़कर 7,360 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 5,672 करोड़ रुपये रहा था। उसके बाद से हर महीने यह आंकड़ा घटा है और सितंबर में 5,325 करोड़ रुपये रह गया।

म्युचुअल फंड  के अधिकारियों व अग्रणी वितरकों के मुताबिक, एसआईपी के शुद्ध‍ निवेश के कम रहने की वजह त्योहारों के कारण हुई ज्यादा निवेश निकासी है। एम्फी के आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर में निवेशकों ने एसआईपी खातों से 6,578 करोड़ रुपये निकाले। यह 11 महीने का सर्वोच्च आंकड़ा है। 

Keyword: इक्विटी, सिस्टमै​टिक इन्वेस्टमेंट प्लान, एसआईपी,
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