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कांग्रेस: मल्लिकार्जुन खरगे बनेंगे तारणहार?

आदिति फडणीस /  11 01, 2022

यह एक 'गलती' थी जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया। कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार संभालने से पहले मल्लिकार्जुन खरगे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट गए थे। लेकिन उनकी कार वीवीआईपी प्रवेश द्वार के बजाय वीआईपी प्रवेश द्वार  पर गई जहां से समाधि तक पैदल चलना आसान है।

 प्रबंधकों ने उन्हें रुकने के लिए कहा ताकि कार उन्हें सही प्रवेश द्वार की तरफ ले जा सके। खरगे ने कहा, ‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।’ और वह उतरने के लिए तैयार हो गए। उनके स्टाफ ने धीरे से कहा, ‘आपको बहुत चलना होगा।’ लेकिन खरगे ने उन्हें एक तरफ होने को कहा और वह केवल वीआईपी होने का विकल्प चुनते हुए समाधि के लिए लंबे रास्ते की ओर बढ़ गए। नए कांग्रेस अध्यक्ष के हर कदम पर नजर रखने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह छोटी सी बात भी अपने आप में एक बड़ा संकेत दे रही थी कि वह भी उनके ही जैसे हैं और उनमें से ही एक हैं। इसके बाद ऐसे और भी कदम उठाए गए।

 खरगे की औपचारिक नियुक्ति की घोषणा के बाद उनके आवास, 10 राजाजी मार्ग पर कार्यकर्ताओं का आना बंद नहीं हुआ। दोपहर के भोजन के लिए अवकाश लेने के बजाय, खरगे ने लोगों के बीच बैठने और  उनके साथ खाने का फैसला किया। वहां मौजूद एक कार्यकर्ता ने कहा, 'ऐसी चीजें पहले कभी नहीं हुईं।’ पार्टी में शीर्ष पद पाने के बाद खरगे द्वारा किए गए पहले कुछ ट्वीट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने के लिए या गांधी परिवार की प्रशंसा करने के लिए नहीं, बल्कि एक सामान्य कार्यकर्ता के शोक संतप्त परिवार के साथ सहानुभूति जताने के लिए था।

 पार्टी के बाहर कुछ ही लोग ही महिला कांग्रेस की एक युवा पदाधिकारी साई अनामिका को जानते थे जो अपने निजी कारणों से पार्टी से अलग हो गई थीं लेकिन फिर भी एक सक्रिय पार्टी कार्यकर्ता थीं। उन्हें लगभग एक सप्ताह से डेंगू बुखार था और हो सकता है कि वह ठीक हो जातीं लेकिन उन्हें अस्पताल में भर्ती होने में देरी हो गई और फिर कुछ जटिलताओं के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

महिला कांग्रेस के प्रतिक्रिया देने से पहले ही खरगे ने उनके निधन पर शोक जताते हुए एक ट्वीट किया और उनसे जुड़ी बातें याद कीं कि किस तरह से उन्होंने पार्टी में योगदान दिया था। भारतीय युवा कांग्रेस की ईशिता सेधा ने कहा,  ‘पार्टी अध्यक्ष ने अनामिका दीदी को याद किया!’

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। उनकी नियुक्ति के बाद, कांग्रेस कार्यसमिति सहित पार्टी निकायों के लंबित चुनाव नए सिरे से कराने के लिए नए अध्यक्ष के मार्गदर्शन के लिए एक संचालन समिति का गठन किया गया था। तथाकथित बागी नेताओं के समूह जी-23 के एक भी सदस्य को इस समिति में जगह नहीं मिली। इसमें शशि थरूर को भी जगह नहीं मिली जो अध्यक्ष पद के लिए उनके बड़े प्रतिद्वंद्वी थे।

हालांकि उनका अपना सम्मान है। खरगे के एक समर्थक ने कहा,  ‘उन्हें थरूर को समिति में रखना चाहिए था। इससे इनकी उदारता का पता चलता।’ हालांकि यह सिर्फ कार्यकर्ताओं की बात है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए खरगे इस पद के लिए उपयुक्त व्यक्ति हैं।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी ने कहा, 'खरगे के पास कांग्रेस जैसी पार्टी को चलाने के लिए जरूरी अनुभव है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में विभिन्न पदों पर काम किया है। वह विधायक, विपक्ष के नेता और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। अपने आत्मविश्वास से वह प्रेरित करते हैं और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखते हैं।’ इन बातों का लब्बोलुआब यह है कि क्या वास्तव में उसके पास सभी को साथ ले जाने की क्षमता है। वह उस दिशा में कितनी मेहनत करने के लिए तैयार है। उनके समर्थकों के पास एक योजना है।

 आने वाले दिनों में खरगे सप्ताह में कम से कम दो दिन 24, अकबर रोड स्थित कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय में बैठे नजर आएंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं की सौ समस्याएं हैं जिनमें, स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी, पार्टी सहयोगी के कामकाज के बारे में शिकायतें, किसी राज्य में भारतीय जनता पार्टी के कामकाज के बारे में बात आदि करना शामिल है और उन्हें उम्मीद है कि पार्टी उन्हें सुनेगी और जवाब देगी। लेकिन पार्टी कार्यालय में पार्टी महासचिव भी कम ही आते हैं।

 पार्टी अध्यक्ष तो इससे भी कम ही पार्टी कार्यालय में नजर आते हैं। पार्टी के एक समर्थक का कहना है, ‘सभी पार्टी कार्यकर्ता इधर-उधर भटक रहे हैं और उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि उन्हें अपनी समस्या किसके पास लेकर जाना है। एक बार जब खरगे पार्टी कार्यालय में बैठना शुरू कर देंगे, तब अन्य लोग भी इसका अनुसरण करेंगे। हम रोस्टर भी लगा सकते हैं, ताकि एक या दो महासचिव हमेशा एक निश्चित समय पर पार्टी कार्यालय में मौजूद रहेंगे।’

 योजना का एक हिस्सा यह भी है कि कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संपर्क में रहेंगे। खरगे ने पूर्वोत्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं के एक समूह से कहा, ‘मैं परामर्श करने की परंपरा और सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करता हूं। लोग मेरा अनुसरण करें इसमें मेरा कोई विश्वास नहीं है बल्कि मैं यह चाहता हूं कि वे मेरे साथ चलें। हम साथ मिलकर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री  पृथ्वीराज चव्हाण कहते हैं गांधी परिवार के साथ उनके रिश्ते को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। एक कार्यकर्ता कहते हैं, ‘संतुलन रखना पड़ेगा।’ तथ्य यह है कि जब उन्हें पार्टी प्रमुख के रूप में नियुक्ति का प्रमाण पत्र दिया जा रहा था, तब बाहर 'राहुल गांधी जिंदाबाद' के नारे लग रहे थे जो अपने आप में ही एक अलग कहानी बयां करती है। उनके समर्थकों का कहना है कि इस बात की संभावना कम है कि सोनिया गांधी किसी भी तरह का 'हस्तक्षेप' करेंगी बल्कि वह केवल 'मार्गदर्शन' करेंगी। लेकिन राहुल के नेतृत्व और  खासकर उन लोगों के नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाया जा सकता या नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है जिनके बने रहने से उन्हें फायदा है। 

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष पवन कुमार बंसल ने कहा, ‘देश और पार्टी के लिए गांधी परिवार का योगदान अतुलनीय है।’ उन्होंने कहा, ‘हम देश के लिए उनके बलिदान को नहीं भूल सकते हैं। सोनिया पार्टी अध्यक्ष पद पर नहीं रहना चाहती थीं। हम सभी ने राहुल से पार्टी अध्यक्ष के रूप में वापसी करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने दृढ़ता से 'नहीं' कहा है। अब, हमने व्यापक अनुभव वाले व्यक्ति में अपना विश्वास जताया है।’ 

आगे बहुत चुनौतियां बहुत हैं। लेकिन तात्कालिक स्तर पर क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर संतुलन बिठाने की कड़ी को दुरुस्त करना है। कांग्रेस अध्यक्ष का ताल्लुक कर्नाटक से हैं। सबसे ज्यादा नजर आने वाले पार्टी महासचिव केरल से हैं। संगठन में वास्तव में उत्तर भारत का कोई प्रमुख चेहरा नहीं है। एक पार्टी कार्यकर्ता ने कहा, 'दक्षिण में हमारी पहले से ही मौजूदगी है। हमें दरअसल उत्तर भारत पर ही ध्यान देना है।’

Keyword: कांग्रेस अध्यक्ष , मल्लिकार्जुन खरगे, राजघाट, वीआईपी प्रवेश द्वार,
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