बिजनेस स?टैंडर?ड - श्रीलंका: राहत पैकेज और संतुलन बिठाने के विकल्प
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, December 02, 2022 09:40 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

श्रीलंका: राहत पैकेज और संतुलन बिठाने के विकल्प

हर्ष वी पंत और आदित्य गौड़ारा शिवमूर्ति /  November 01, 2022

चीन के विस्तारवादी हितों और भारत तथा जापान की सुरक्षा चिंताओं के साथ श्रीलंका मुश्किल स्थिति में दिख रहा है। बता रहे हैं हर्ष वी पंत और आदित्य गौड़ारा शिवमूर्ति 

श्रीलंका ने सितंबर 2022 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ एक अनौपचारिक (स्टाफ लेवल) समझौते को अंतिम रूप दिया। यहां कई महीने तक खाने-पीने के सामान और पेट्रोल-डीजल की किल्लत बनी रही और राजनीतिक अस्थिरता जैसी स्थिति भी देखने को मिली जिसके बाद, 2.9 अरब डॉलर की चार वर्षीय राहत योजना की वजह से निश्चित रूप से श्रीलंका ने राहत की सांस ली होगी। हालांकि, आईएमएफ तक पहुंचने से जुड़ी शर्तें कठिन साबित होंगी,  जिससे श्रीलंका को क्षेत्रीय शक्तियों के हितों के साथ समायोजन करने और संतुलन के खेल बढ़ाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

आईएमएफ समझौते में श्रीलंका सरकार के सामने निम्नलिखित शर्तें रखी गईं हैं जिनमें खर्च में कटौती, करों में वृद्धि, भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतियां, केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता और ऋण तथा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात में कमी जैसी चुनौतियां शामिल हैं। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आईएमएफ चाहता है कि श्रीलंका चीन, जापान और भारत जैसे जिन प्रमुख देशों से कर्ज लेता है, उन देशों से बात करे और अपने ऋणों को पुनर्गठित करने, ऋण से राहत और वित्तीय आश्वासन मांगे।

करीब 51 अरब डॉलर के कुल ऋण संचय के साथ इसमें से चीन का 20 प्रतिशत, जापान का 9 प्रतिशत और भारत का 2 प्रतिशत ऋण बकाया है। श्रीलंका के लिए प्राथमिक चुनौती अपने सबसे बड़े ऋणदाता चीन से रियायतें मांगना होगा। चीन अक्सर उच्च ब्याज दरों और कम शर्तों के साथ बड़े ऋण की पेशकश करता है। श्रीलंका की कुल उधारियों (लगभग 6.5 अरब डॉलर) में 10 प्रतिशत योगदान देने वाला एकमात्र ऋणदाता चीन है और इसके कुल ऋण में इसकी 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। लेकिन किसी भी तरह की राहत पैकेज प्रदान करने की चीन की इच्छा उसके विस्तारवादी हितों के अनुरूप श्रीलंका की क्षमता पर निर्भर करती है।

चीन ने 2020 में श्रीलंका को 2.5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी और 2021 में  चीन ने 1.5 अरब डॉलर मुद्रा की अदला-बदली की थी। हालांकि, 2021 के अंत में उर्वरक सौदे पर असहमति के कारण दोनों देशों के संबंधों में खटास आने के कारण चीन की सहायता की रफ्तार धीमी पड़ गई। चीन ने 2022 में केवल 7.5 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता की पेशकश की और ऋण पुनर्गठन तथा 4 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय सहायता के अनुरोध को रोक दिया है। कई मौकों पर चीन ने अतिरिक्त सहायता के लिए अपने हितों के अनुरूप श्रीलंका को साथ लाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता के सातवें दौर के लिए श्रीलंका पर दबाव बनाना और चीन के जहाज युआन वांग-5 का डॉकिंग प्रकरण इसके कुछ स्पष्ट उदाहरण हैं।

संकट के प्रति भारत का दृष्टिकोण जन-केंद्रित होने के साथ-साथ हितों से संचालित भी है। इन दोनों कारकों की वजह से 2022 में 3.8 अरब डॉलर के साथ श्रीलंका की सहायता करने के लिए भारत मजबूर हुआ। भारत ने कर्ज मुहैया कराने के साथ ही मुद्रा में अदला-बदली, आधुनिकीकरण, निवेश और आपातकालीन स्तर पर मानवीय सहायता की आपूर्ति का विस्तार कर श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होने से रोकने की कोशिश की है।

ऐसा कहा जा रहा है कि हिंद महासागर यह सुनिश्चित करने के किए खतरों से मुक्त है कि भारत पानी के सतह पर मौजूद रहने वाली डॉक सुविधा (जहाजों को टिकाने की सुविधा), एक समुद्री बचाव समन्वय केंद्र की पेशकश करने के साथ ही एक टोही विमान भी दे रहा है। इसके अलावा, भारत ने कई बार श्रीलंका से भारतीय हितों के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखाने के लिए भी कहा है।

नतीजतन श्रीलंका ने जाफना प्रायद्वीप में चीन की ऊर्जा परियोजनाओं को रद्द कर दिया। इसके अलावा भारत को रणनीतिक रूप से अहम त्रिंकोमाली तेल टैंक फार्म के आधुनिकीकरण की परियोजना की पेशकश की और चीनी जहाज को श्रीलंका में रोकने की असफल कोशिश की।

वहीं दूसरी ओर, श्रीलंका का दूसरा सबसे बड़ा द्विपक्षीय कर्जदाता होने के बावजूद जापान ने इस संकट पर अपनी प्रतिक्रिया देने में सतर्कता बरती है। वर्ष 2020 और 2021 में श्रीलंका द्वारा रेल परियोजनाओं और ईस्ट कंटेनर टर्मिनल के निलंबन की वजह से संभवतः इसने काफी सोच-समझकर कदम उठाने के बारे में सोचा है। हालांकि जापान ने भारत के साथ सहयोग करने और श्रीलंका को मानवीय संकट से बाहर निकालने में मदद करने के लिए देर से प्रतिबद्धता जताई और इसने 65 लाख डॉलर की कुल मानवीय सहायता दी है।

इसके अलावा, जापान देश में अपनी सुरक्षा और आर्थिक निवेश के बारे में चिंतित है। हाल के वर्षों में, हिंद-प्रशांत की बढ़ती प्रासंगिकता के साथ, जापान ने रक्षा सहयोग, श्रीलंकाई बंदरगाहों (त्रिंकोमाली और वेस्ट कंटेनर टर्मिनल), और बुनियादी ढांचे के विकास में भी रुचि दिखाई है। इसने देश में अपने प्रभाव को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ साझेदारी की है। मानवीय चिंताओं के साथ इन दांवों ने जापान को कूटनीतिक दृष्टिकोण का प्रस्ताव देने के लिए प्रेरित किया है जिसके मुताबिक यह श्रीलंका को अपने ऋणों के पुनर्गठन में मदद करने के लिए भारत और चीन के बीच बैठकों और सम्मेलनों का समन्वय या मेजबानी कर सकता है

चीन की विस्तारवादी आकांक्षाओं, भारत और जापान की मानवीय चिंताओं और सुरक्षा हितों ने काफी हद तक प्रभावित किया है जिससे यह तय हो सका ये देश श्रीलंका संकट का जवाब कैसे देंगे। हालांकि श्रीलंका की ऋण वार्ता क्या आकार लेगी यह कई कारकों पर निर्भर होगा। यह स्पष्ट है कि  प्राथमिक चुनौती चीन और उसकी विस्तारवादी नीति से मिलेगी।

चीन संभवतः श्रीलंका पर अपने हितों का पालन करने के लिए दबाव डालना जारी रखेगा जो भारतीय प्रभाव और सुरक्षा की कीमत पर होगा। दूसरी ओर, अगर श्रीलंका चीन को तरजीह देना जारी रखेगा तो श्रीलंका को अधिक सहायता देने का आग्रह भारत में कम हो सकता है। डॉकिंग प्रकरण अपने आप में भारत की गहरी आपत्तियों की याद दिलाता है। अगर चीन इसके ऋणों का पुनर्गठन करने से इनकार करता है तो जापान और उसकी शटल-कूटनीति के प्रयास व्यर्थ साबित होंगे। 

श्रीलंका का एक प्रतिनिधिमंडल आने वाले हफ्तों में चीन का दौरा करेगा और ऋण अदायगी पर निम्न-स्तरीय चर्चाओं को बढ़ाएगा ऐसे में क्षेत्रीय व्यवस्था क्रम में काफी कुछ दांव पर लगा है। इन शक्तियों के बीच संतुलन श्रीलंका के लिए एक चुनौती होगी। अगर पहले की तरह किसी भी तरह के अवांछित कदम उठाए गए तब श्रीलंका ने अपने कर्मचारी स्तर के समझौते पर जो कुछ भी हासिल किया है वे सब खत्म हो जाएंगे।

(पंत ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (स्टडीज),  नई दिल्ली के उपाध्यक्ष और किंग्स कॉलेज लंदन में प्राध्यापक हैं। शिवमूर्ति ओआरएफ के स्ट्रैटजिक स्टडीज प्रोग्राम में जूनियर फेलो हैं)

Keyword: आईएमएफ, श्रीलंका, पेट्रोल-डीजल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बीमा के लिए एक ही लाइसेंस से कंपनियों को होगा फायदा
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.