बिजनेस स?टैंडर?ड - त्योहारों में उपभोक्ताओं का मिजाज हुआ बेहतर
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त्योहारों में उपभोक्ताओं का मिजाज हुआ बेहतर

महेश व्यास /  10 13, 2022

उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों ने साल 2022 के त्योहारी मौसम की शुरुआत में उपभोक्ताओं के सामान खरीदने का रुझान बढ़ने का खुशी-खुशी स्वागत किया। गणेश चतुर्थी उत्सव की शुरुआत 31 अगस्त को हुई थी और यह उत्सव 9 सितंबर तक धूमधाम से मनाया गया। भगवान गणेश के उत्सव के दौरान ही ओणम भी मनाया गया। नवरात्र 26 सितंबर से 4 अक्टूबर तक मनाया गया। लिहाजा पूरे देश में सितंबर के दौरान त्योहारों की धूम रही।  

सीएमआईई के उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वेक्षण के मुताबिक सितंबर 2022 में बेरोजगारी की दर गिरकर चार साल के न्यूनतम स्तर 6.3 फीसदी पर पहुंच गई थी और उपभोक्ता अवधारणा सूचकांक 30 माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। सितंबर में यह सूचकांक उछल कर 7.1 फीसदी पर पहुंच गया था।

सबसे महत्त्वपूर्ण यह रहा कि सितंबर में बेरोजगारी की दर ग्रामीण और शहरी सभी क्षेत्रों में गिरी और उपभोक्ता अवधारणा सूचकांक दूरदराज के क्षेत्रों और कस्बों में भी बढ़ा। सितंबर में शहरी उपभोक्ता अवधारणा सूचकांक में 9.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि ग्रामीण उपभोक्ता अवधारणा में 5.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इन दोनों ही क्षेत्रों में उपभोक्ता अवधारणा सूचकांक 30 माह के उच्चतम स्तर पर था।

उपभोक्ता अवधारणा सूचकांक (आईसीएस) के दो हिस्से -वर्तमान आर्थिक स्थितियों का सूचकांक (आईसीसी) और उपभोक्ता अपेक्षाओं का सूचकांक (आईसीई) होते हैं। सितंबर में इन दोनों ही सूचकांकों में बढ़ोतरी हुई। आईसीसी उछल कर 7.9 फीसदी और आईसीई बढ़ कर 6.5 फीसदी पर पहुंच गया था। ये दोनों ही सूचकांक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अच्छे खासे बढ़े थे। वर्तमान आर्थिक स्थितियां दोनों ही क्षेत्रों में तेजी से बढ़ीं। शहरी क्षेत्रों में आईसीसी शानदार ढंग से उछल कर 8.3 फीसदी पर पहुंच गया और इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में आईसीसी का अच्छा प्रदर्शन 7.4 फीसदी रहा था।

सितंबर में सेहत को लेकर परिवारों की सोच काफी बेहतर हुई। यह सोच रोजगार के आंकड़ों में हुई बढ़ोतरी की तर्ज पर ही है। रोजगार की दर शहरी क्षेत्रों में 1.4 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.9 फीसदी बेहतर हुई। इन दरों के बढ़ने से वर्तमान आर्थिक स्थितियों के बारे में सोच भी प्रभावित हुई। इस बारे में आईसीसी में इससे संबंधित एक सवाल भी पूछा गया था। दरअसल परिवारों से एक सवाल यह पूछा गया था कि बीते साल की तुलना में इस साल में हुई वर्तमान आय कैसी है। लिहाजा रोजगार की दर में बढ़ोतरी होने से इस सवाल के जवाब पर सीधा असर पड़ा है। 

आईसीसी में दूसरा सवाल परिवारों से टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने के रुझान से संबंधित था। ऐसा लगता है कि इस त्योहारों के इस मौसम में न ही तो उच्च मुद्रास्फीति और न ही ज्यादा ब्याज दर उपभोक्ताओं के उत्साह को प्रभावित कर पाए हैं। सीपीएसएस सितंबर के दौरान परिवारों में टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने के प्रति बढ़ते रुझान को दर्ज कर चुका है। 

अगस्त 2022 में 10.9 परिवारों का विश्वास था कि बीते साल की तुलना में इस साल टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने का उचित समय था। कोरोना के दौरान लगे लॉकडाउन से पहले यह दर 20-30 फीसदी थी। मार्च, 2020 के बाद यह दर गिरकर एक अंक में आ गई थी। अप्रैल 2022 तक यह दर 10 से 13 फीसदी के बीच आ गई थी।

सितंबर 2022 में यह उछलकर 16.2 फीसदी पर पहुंच गई थी। भारत जब त्योहारी मौसम खत्म करने की ओर बढ़ रहा है, तब यह दर उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। यह स्तर पहुंचना उपभोक्ता सामान कंपनियों के लिए बहुत ही अच्छी खबर है।

एक बार फिर, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने की ओर रुझान बढ़ने लगा है। शहरी भारत में यह विश्वास पनपा कि यह टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने के लिए उचित समय था। इससे ऐसा सामान खरीदने वाले परिवारों में इजाफा हुआ। अगस्त में शहरी क्षेत्रों में 15.5 फीसदी परिवारों का मानना था कि यह टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने के लिए उचित समय है। ऐसे परिवार सितंबर में बढ़कर 18 फीसदी हो गए थे। ग्रामीण भारत में यह बढ़ोतरी निम्न स्तर 8.7 फीसदी से बढ़कर 15.3 फीसदी हो गई। दोनों क्षेत्र मार्च 2020 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर सितंबर 2022 में पहुंच गए थे।

दरअसल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की उम्मीदें बढ़ीं। लेकिन यह ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ी थीं। शहरी क्षेत्र में आईसीई में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में यह बढ़ोतरी मात्र 4.4 फीसदी थी। ग्रामीण भारत इस साल के दौरान अपनी आय को लेकर अधिक आशान्वित नहीं है।

इसका कारण यह है कि खराब बारिश, उत्तर भारत में छोटे खेत और खाद्य उत्पादों के तेजी से बढ़ते उत्पादों पर लगाम लगाने की सरकारी कोशिशों से गांव के लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर चुका है। लेकिन वे अर्थव्यवस्था पर मध्यम अवधि के नजरिये को लेकर अत्यधिक आशान्वित हैं।

हाल के सालों में उपभोक्ताओं के सोचने के तरीके में बदलाव आया है। जनवरी से जून, 2022 तक आईसीएस हर महीने एकल अंक में बढ़ा और यह निरंतर आगे बढ़ता रहा। जुलाई, अगस्त और सितंबर में आईसीएस की बढ़ोतरी की दर अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाली रही। यह दर बढ़ने पर सात फीसदी और सिकुड़न पर 0.5 फीसदी बढ़ी।

सकल आधार पर उच्च उतार-चढ़ाव से महीने की बढ़ोतरी दर बढ़ी। इससे सकल बढ़ोतरी में भी इजाफा हुआ। लेकिन उतार-चढ़ाव के कारण अस्थिरता बढ़ी। इस संदर्भ में सितंबर 2022 आईसीएस में सात प्रतिशत की जोरदार वृद्धि का चौतरफा विकास आश्वस्त करने वाला है।

अक्टूबर की शुरुआत मजबूती के साथ नहीं हुई। आईसीएस 2 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में सिकुड़ कर 0.7 फीसदी हो गया। इसके बाद आईसीएस 10 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह में 3.2 फीसदी हो गया। ग्रामीण भारत में दोनों हफ्तों के दौरान यह दर गिरी जबकि इस अवधि में शहरी भारत ने मजबूत बढ़ोतरी का खाका खींचा।

उपभोक्ताओं का टिकाऊ सामान खरीदने का रुझान तेजी से बढ़ा है। करीब 24 फीसदी परिवारों ने माना कि बीते साल की तुलना में यह साल टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने का बेहतर समय था। लॉकडाउन से पहले यह करीब 30 फीसदी था। हालांकि 30 दिन के मूविंग एवरेज पर कुछ गिरावट के बाद भी यह अप्रैल, 2020 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर कायम है। यह आगामी त्योहार के लिए बहुत ही आशाजनक है।

(लेखक सीएमआईई प्रा लि के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्या​धिकारी हैं)

Keyword: गणेश चतुर्थी उत्सव, त्योहारों, उपभोक्ताओं के सामान,
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