बिजनेस स?टैंडर?ड - उद्यम पूंजी को लेकर नएसिरे से परिकल्पना
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, November 27, 2022 10:35 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

उद्यम पूंजी को लेकर नएसिरे से परिकल्पना

अजित बालकृष्णन /  10 11, 2022

समय आ गया है कि भारत में एक व्यापक एवं लोकतांत्रिक उद्यम पूंजी कोष व्यवस्था की शुरुआत की जाए। बता रहे हैं अजित बालकृष्णन

सूट-बूट से सुस​ज्जित विदेशी नजर आ रहा एक लंबा सा व्य​क्ति अपनी चौड़ी मुस्कान के साथ भीड़ को चीरता हुआ मेरे पास आया और उसने काफी जोरदार ढंग से हाथ मिलाते हुए कहा, ‘आपकी प्रस्तुति शानदार थी। क्या आप अपने कारोबार में वेंचर कैपिटल का निवेश चाहते हैं?’यह घटना सन 1998 में मुंबई के वर्ली के एक सभागार में घटी थी जहां मैंने अपना 30 मिनट लंबा पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन समाप्त ही किया था।

मैंने अपनी प्रस्तुति में बताया था कि कैसे भविष्य में इंटरनेट के जरिये होने वाले कारोबारों का प्रभुत्व होगा। सभागार में करीब 400 से अ​धिक लोग मौजूद थे और मेरी प्रस्तुति के बाद वहां पूरी तरह खामोशी का माहौल था। ऐसे में मैं इस बात को लेकर रोमांचित था कि कम से कम एक व्य​क्ति तो ऐसा है जिसे मेरी बातें समझदारी भरी और काम की लगीं।

परंतु उस वि​शिष्ट नजर आ रहे व्य​क्ति (शायद एक अमेरिकी) ने ‘वेंचर कैपिटल’ यानी उद्यम पूंजी शब्द का इस्तेमाल किया था और आईआईएम में पढ़े होने तथा व्यापक अध्ययन करने के बावजूद मैं इस बात को लेकर सुनि​श्चित नहीं था कि वेंचर कैपिटल इंटरनेट आधारित कारोबार को लेकर मेरी योजनाओं में ठीक बैठेगा या नहीं।

उस दौर में स्टार्टअप शब्द का चलन नहीं था। मैं हक्काबक्का सा खड़ा था और उस व्य​क्ति ने मुझसे कहा, ‘क्या मैं कल आपके दफ्तर में आकर आपसे मिल सकता हूं?’ मैंने अत्यंत विनम्रतापूर्वक हां कहा और उन्हें अपना कार्ड देकर 400 वर्गफुट की उस जगह पर बुलाया जिसे मैं अपना दफ्तर कहा करता था।

 मैं इस बात को लेकर रोमांचित था कि एक विदेशी व्य​क्ति को मेरे इंटरनेट आधारित कारोबार के विचार में दम लगा। आमतौर पर जब मैं भारत में किसी कारोबारी सम्मेलन में ऐसी प्रस्तुति देता और यह कहता कि दुनिया का भविष्य इंटरनेट में निहित है तो लोग मुझे संदेह की  दृ​ष्टि से देखा करते थे।

दलाल पथ के एक शीर्ष रैंकिंग वाले निवेशक ने तो एक बार मुझे कोने में ​बुलाकर मुझसे यह भी कहा था, ‘तुम एक भरोसेमंद और प्रतिभाशाली व्य​क्ति हो, हर जगह घूम-घूमकर इंटरनेट-इंटरनेट मत किया करो क्योंकि इसकी वजह से तुम हंसी के पात्र बनते हो।’ उनके चेहरे के मनोभावों के आधार पर मैं समझ सकता था कि वे पूरी गंभीरता से मुझे यह सलाह दे रहे थे।

 बहरहाल, चीजें एक के बाद एक जुड़ती गईं। वेंचर कैपिटल की पेशकश करने वाला व्य​क्ति (वह एक अमेरिकी ही था जिसका कारोबार सिलिकन वैली में था) मेरे दफ्तर में आया और मुझ पर दबाव बनाया कि मैं अपने कारोबार में एक छोटे से हिस्से के बदले 10 लाख डॉलर के निवेश की पेशकश स्वीकार कर लूं।

अगले दो-तीन वर्षों में वेंचर कैपिटलिस्ट और निजी इ​क्विटी के निवेशक लगातार आए और मुझ पर यह दबाव बनाया कि मैं उन्हें अपने इंटरनेट कारोबार में निवेश करने दूं।

 धीरे-धीरे मुझे पता चला कि एक वेंचर कैपिटल फंड निजी कंपनियों को शेयरों के बदले शुरुआती फंडिंग उपलब्ध कराता है। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई थी जो अभी भी ऐसी कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार है।  अमेरिकी वेंचर कैपिटल फंड प्राय: 10 वर्ष की अव​धि के लिए होते हैं और फंड की अव​धि समाप्त होने के पहले उन्हें या तो अपना निवेश बेचना होता है या फिर उसे सार्वजनिक बाजार में पेश करना होता है।

यदि वेंचर कैपिटलिस्ट ने अपने फंड के सातवें वर्ष में आपके कारोबार में निवेश किया है तो आपके पास उसे परिणाम देने के लिए केवल तीन वर्ष का समय रह जाता है। मुझे समझ में आया कि इसी कम समय की वजह से वेंचर कैपिटलिस्ट निरंतर उद्यमियों पर यह दबाव बनाते रहते हैं कि वे तेज वृद्धि का प्रदर्शन करें। भले ही उस दौरान स्थानीय बाजार (उदाहरण के लिए भारत) काफी धीमी गति से विकसित हो रहा हो।

 मेरी जिज्ञासा वास्तव में यह थी कि इस पूरे विचार के पीछे वास्तविक सोच कैसा था। यह बात सही है हमारे दौर में जैसा कि कुछ लोग मानते हैं ‘वित्तीयकरण’ उतना ही बुनियादी और लाभदायक है जितना कि 18वीं सदी में ‘औद्योगीकरण’ था। औद्योगीकरण यानी विनिर्माण में मशीनों के इस्तेमाल ने कपड़ों को सबके लिए सस्ता और सुलभ बनाया (एक पल के लिए यह भूल जाएं कि इसने भारतीय बुनकरों आदि को बहुत गरीब बनाया)।

विकिपीडिया की प​रिभाषा के हिसाब से देखें तो वित्तीयकरण से तात्पर्य है घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय उद्देश्यों, वित्तीय बाजारों, वित्तीय कारकों और वित्तीय संस्थानों की भूमिका का विस्तार।

 भारत भी वित्तीयकरण की राह पर बढ़ता नजर आता है। भारतीय मीडिया को यूनिकॉर्न स्टार्टअप की कहानियां कहना पसंद है और वह अक्सर बताता है कि कैसे एक और स्टार्टअप एक अरब डॉलर का मूल्यांकन हासिल कर चुका है। जाहिर है ऐसा इसलिए कि किसी न किसी अमेरिकी फंड ने काफी ऊंची कीमतों में इसका एक हिस्सा खरीदा होता है।

इस लेनदेन को बल किन श​क्तियों से मिलता है? एक स्पष्ट बात तो यह है कि ये अमेरिकी फंड ऐसे भविष्य की आकांक्षा कर रहे हैं जिसमें एक अमेरिकी कंपनी अपने निवेश को खरीदकर भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकती है: वॉलमार्ट इसका उदाहरण है जिसने दशकों तक भारत में प्रवेश का असफल प्रयास किया और फिर फ्लिपकार्ट को बढ़ी हुई कीमतों को खरीदकर वह इस को​शिश में कामयाब हुआ।

भारत में कारोबार कर रही लगभग सभी वेंचर कैपिटल फर्म अमेरिकी हैं और उनकी योजना भी वॉलमार्ट जैसी ही है। दो या तीन वर्ष तक अपनी भारतीय निवेश वाली कंपनी पर तेज वृद्धि का दबाव और उसके बाद उसका अ​धिग्रहण करने का प्रयास। वेंचर कैपिटल फंड ने पहले 2000 के दशक में मीडिया में निवेश किया। उसके बाद ई-कॉमर्स और अब वित्तीय सेवाओं में उनका निवेश हो रहा है। परंतु इसका अर्थ यह भी है कि हर चक्र में सीमित स्टार्टअप ही फंड पाते हैं।

क्या भारत में एक अ​धिक लोकतांत्रिक वेंचर कैपिटल व्यवस्था की कल्पना की जा सकती है? इससे मेरा तात्पर्य है भारत भर में हजारों वेंचर कैपिटल फंड का निर्माण करना जो 20 फीसदी हिस्सेदारी के लिए एक करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकें। इससे युवा भारतीय उद्यमियों को कई शानदार विचारों को मूर्त रूप देने में मदद मिलेगी।

देश में ऐसी लोकतांत्रिक वेंचर कैपिटल व्यवस्था बनाने में किस तरह की नीतिगत पहलों की आवश्यकता होगी? पूरी दुनिया पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है और आईटी क्षेत्र जैसे रोजगारपरक क्षेत्र अपना आकार कम कर रहे हैं। ऐसे में हम भारतीयों को इस राह पर जल्दी आगे बढ़ना होगा। 

(लेखक इंटरनेट उद्यमी हैं)
 
Keyword: उद्यम पूंजी, निवेश, वेंचर कैपिटल,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नियमों में संशोधन से बीमा क्षेत्र में बढ़ेगा निवेश
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.