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राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर राहत

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 10 10, 2022

प्रत्यक्ष कर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दोनों के संग्रह में तेजी आई है। इससे केंद्र को वित्त वर्ष 23 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.4 प्रतिशत पर रखने के लक्ष्य को लेकर राहत मिली है, भले ही खाद्य औऱ उर्वरक सब्सिडी बढ़ रही है और केंद्रीय उत्पाद शुल्क की वृद्धि दर कम रह सकती है।

अगर 8 अक्टूबर तक के प्रत्यक्ष कर संग्रह, सितंबर तक के केंद्रीय जीएसटी संग्रह और अगस्त तक के केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क के ताजा आंकड़ों को देखें तो सरकार ने अब तक 13.49 लाख करोड़ रुपये कर एकत्र किया है।

चालू वित्त वर्ष के दौरान बजट में कुल 27.58 लाख करोड़ रुपये कर संग्रह का अनुमान लगाया गया था और अब तक का कर संग्रह पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 48.9 प्रतिशत है। अगर राज्यों को सितंबर तक के कर बंटवारे को इसमें शामिल किया जाए, जैसा कि जुलाई में 58,333 करोड़ रुपये दिया गया था, सरकार पहली छमाही में राज्यों को 3.76 लाख करोड़ रुपये राज्यों को देगी। अगस्त में सरकार ने जुलाई की तुलना में कर बंटवारा दोगुना करके 1.17 लाख करोड़ रुपये कर दिया था।

अगर कर विभाजन की राशि को निकाल दिया जाए तो केंद्र सरकार का शुद्ध राजस्व 9.73 लाख करोड़ रुपये होगा, जो सितंबर के सीमा एवं उत्पाद शुल्क संग्रह को छोड़कर भी लक्ष्य के आधे से ज्यादा होगा। बजट में 19.35 लाख करोड़ रुपये कर का अनुमान लगाया गया है और कर संग्रह इसका 50.28 प्रतिशत है।

इसका मतलब यह है कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में लक्षित राजस्व के आधे से ज्यादा का संग्रह कर लिया है, जबकि उत्पाद एवं सीमा शुल्क के आंकड़े अभी आने हैं। कर राजस्व का बड़ा हिस्सा दूसरी छमाही में आता है क्योंकि इसी दौरान त्योहार पड़ते हैं और मार्च में कर भुगतान की मारामारी रहती है। उदाहरण के लिए 2021-22 के दौरान कुल कर राजस्व का 16 प्रतिशत मार्च में आया था।

बहरहाल सरकार ने 2022-23 के बजट में कर के आंकड़ों के अनुमान में बहुत रूढ़िवादी रुख अपनाया था। बजट में कर संग्रह में सिर्फ 1.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था।

कर राजस्व जहां तेज रहा है, वहीं खाद्यान्न व उर्वरक के मोर्चे पर व्यय बढ़ा है। इसके साथ ही तेल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से भी कर संग्रह में कमी आएगी। दिसंबर तक मुफ्त खाद्यान्न देने से खजाने पर 44,762 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। पहले के खर्च के साथ इस विस्तार से सरकार पर खाद्यान्न सब्सिडी का कुल बोझ 1.30 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

बहरहाल कुछ रिपोर्टों के मुताबिक गेहूं की कम खरीद के कारण 70,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। इसलिए खजाने पर असल बोझ 60,000 करोड़ रुपये होगा।

इसके अलावा उर्वरक पर 1.45 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होगा। लेकिन यह गणना अगस्त में कीमतों में तेज गिरावट के पहले की गई थी। गैस की कीमत भी अब स्थिर है। इस तरह से मोटे तौर पर देखें तो खाद्यान्न और उर्वरक सब्सिडी पर अतिरिक्त व्यय 2 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा अधिक होगा। 

अगर जिंस की वैश्विक कीमतें कम होती हैं तो इसमें और कमी आ सकती है। पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से खजाने पर 85,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है, लेकिन इसकी आंशिक भरपाई ईंधन पर अप्रत्याशित लाभ कर से हो जाएगी। इसके अलावा सरकार ने विनिवेश से सिर्फ 24,500 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जबकि पूरे साल का लक्ष्य 65,000 करोड़ रुपये था। बहरहाल आईडीबीआई बैंक बेचकर सरकार यह लक्ष्य पूरा कर सकती है। 

Keyword: जीएसटी, राजकोषीय घाटा,
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