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बारिश से खड़ी फसल को नुकसान, किसान हुए हलाकान

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 09 25, 2022

 दक्षिणी-पश्चिमी मॉनसून में उसकी वापसी के दौरान अचानक आई तेजी के कारण उत्तर भारत की अधिकांश जगहों पर पिछले कुछ दिनों से बारिश हो रही है। इससे उत्तर प्रदेश और हरियाणा में धान, बाजरा और ज्वार की खड़ी फसल की कटाई में देरी हो सकती है। साथ ही इससे किसानों को उपज का नुकसान भी हो सकता है।

व्यापारी एवं किसान समूहों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सब्जियों की बोआई देर से हुई थी और बेमौसम बारिश से उन्हें नुकसान हो सकता है। पिछले कुछ दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश के जिन हिस्सों में भारी बारिश हुई है वहां गन्ना जैसी फसलों को भी नुकसान होने की आशंका है।

हालांकि सरसों और गेहूं जैसी शुरुआती बोआई वाली रबी फसलों के लिए यह बारिश बरदान साबित हो सकती है। इससे खेतों में नमी बढ़ेगी और बाजार में इन फसलों की कीमतों में तेजी को देखते हुए किसान बोआई के लिए प्रेरित होंगे।

हरियाणा में राज्य सरकार ने आश्वस्त किया है कि धान की खड़ी फसल को हुए नुकसान के आकलन के लिए अगले कुछ दिनों में एक विशेष सर्वेक्षण किया जाएगा।

अखिल भारतीय चावल निर्यातक संगठन के पूर्व अध्यक्ष विजय ने कहा, 'हरियाणा में इस समय पूसा 1590 चावल किस्म कटाई के लिए तैयार है। इसकी औसत उपज 26 से 27 क्विंटल प्रति एकड़ है। अब फसल पक कर तैयार है लेकिन बारिश के कारण 24 से 36 घंटे तक फसल के भीगने से अंकुरण होने लगा है। इससे उपज प्रभावित हो सकती है।' उन्होंने कहा कि आमतौर पर एक क्विंटल धान से 65 से 67 फीसदी चावल तैयार होता है लेकिन मौजूदा परिस्थिति में ऐसा लगता है यह आंकड़ा घटकर 60 से 62 फीसदी रह जाएगा। ऐसे में किसानों को नुकसान हो सकता है। 

हरियाणा की कई मंडियों में पिछले कुछ दिनों से किसानों का प्रदर्शन हो रहा है। वे सरकार से धान की खरीद तत्काल शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अधिक नमी होने के कारण वे फसल को अधिक समय तक नहीं रख सकते हैं।

पिछले कुछ दिनों से उत्तर भारत में काफी बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 29.7 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य के मुकाबले 889 फीसदी अधिक है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ, बरेली, बिजनौर, एटा, ज्योतिबाफूले नगर आदि जिलों में 25 सितंबर को सामान्य के मुकाबले 500 से 1,000 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। इसी प्रकार, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 25 सितंबर को करीब 41 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य के मुकाबले 2,832 फीसदी अधिक है। पंजाब में 25 सितंबर को करीब 59.3 फीसदी बारिश हुई जो सामान्य के मुकाबले 1,753 फीसदी अधिक है। इसी प्रकार पहाड़ी क्षेत्रों में भी पिछले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश हुई है।

आईग्रेन इंडिया के कमोडिटी विश्लेषक राहुल चौहान ने कहा, 'पश्चिमी उत्तर प्रदेश में थोड़े समय में हुई अत्यधिक बारिश से धान और गन्ने की खड़ी फसलों को नुकसान होगा। इससे ज्वार और बाजरे की उपज भी प्रभावित होगी।'

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के किसानों को इस साल धान की बोआई में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा था। अब अचानक हुई भारी बारिश के कारण फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ जाएगा।

सब्जी उत्पादक किसानों के संगठन वीजीएआई के अध्यक्ष श्रीराम गाढवे ने कहा, 'जहां तक प्याज का सवाल है तो देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है। कम से कम नवंबर तक कीमतों को थामा जा सकता है।'

Keyword: दक्षिणी-पश्चिमी मॉनसून, धान, बाजरा और ज्वार,
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