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राष्ट्रीय बचत पत्र भी है निवेश का बेहतर विकल्प

इनमें निवेश सुरक्षित तो रहता ही है, कर में छूट भी मिलती है
अजीत कुमार / नई दिल्ली September 19, 2022

सरकार की छोटी बचत योजनाओं को आम लोग बिना जोखिम निवेश का साधन मानते हैं। इनमें लोक भविष्य निधि (पीपीएफ), सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना और राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। इनमें निवेश सुरक्षित तो रहता ही है, कर में छूट भी मिलती है। 

पीपीएफ में आपकी रकम लंबे समय के लिए फंसती है क्योंकि इसकी लॉक-इन अवधि 15 साल है। इसमें कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। सुकन्या समृद्धि योजना लड़कियों के लिए दीर्घकालीन योजना है और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना तथा एनएससी मध्यम अवधि की निवेश योजनाएं हैं। लेकिन वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में नाम के मुताबिक वरिष्ठ नागरिक ही निवेश कर सकते हैं। मतलब साफ है। लोकप्रिय छोटी बचत यौजनाओं में केवल एनएससी ही है, जिसमें कोई भी भारतीय नागरिक मध्यम अवधि के लिए निवेश कर सकता है।

क्या है एनएससी? 
इस योजना को डाकघर के जरिये चलाया जाता है। कम से कम 1,000 रुपये के निवेश से यह बचत पत्र खरीदा जा सकता है। इसमें अधिकतम कितनी भी रकम का निवेश किया जा सकता है। मगर एनएससी खरीदने के लिए 100 रुपये के गुणक में ही राशि निवेश कर सकते हैं। एनएससी तीन तरह के होते हैं। इकलौते निवेशक के तौर पर आप एनएससी खरीद सकते हैं और नाबालिग या दिमागी तौर पर कमजोर व्यक्ति के अभिभावक बनकर भी इसे खरीद सकते हैं। दूसरी श्रेणी संयुक्त निवेशकों की होती है, जिसमें अधिकतम तीन वयस्क इसमें निवेश कर सकते हैं और परिपक्वता पर राशि भी तीनों को दी जाती है। आखिरी श्रेणी में भी तीन वयस्क मिलकर एनएससी खरीद सकते हैं मगर इसमें परिपक्वता पर राशि किसी एक ही व्यक्ति को मिलती है। 
 
परिपक्वता
बचत पत्र की परिपक्वता अवधि 5 साल होती है यानी खरीदने के 5 साल बाद आपको मूलधन और ब्याज दे दिया जाएगा। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 20 मार्च, 2020 को बचत पत्र खरीदा तो उसे 20 मार्च 2025 को समूची राशि मिल जाएगी।
 
ब्याज
इस योजना पर ब्याज दर हर तिमाही निर्धारित होती है और चालू तिमाही (जुलाई -सितंबर 2022) में सरकार 6.8 फीसदी ब्याज दे रही है। मगर ब्याज साल में एक बार ही इसमें जोड़ जाता है। यह एकबारगी निवेश की योजना है। इसलिए एनएससी खरीदते समय ही निवेशक को पता रहता है कि परिपक्व होने पर उसे कितनी रकम मिलेगी। इसका साफ मतलब है कि जिस समय आप एनएससी खरीद रहे हैं, उस समय सरकार ने उस पर जो ब्याज तय किया है, आपको पांच साल तक उसी दर पर ब्याज मिलेगा। सरकार दर बढ़ाए या घटाए, आपके प्रतिफल पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

 

कराधान

इस योजना में जमा की गई अधिकतम 1.5 लाख रुपए की धनराशि पर आपको धारा 80सी के तहत कर छूट मिलती है। इस पर स्रोत कर कर कटौती (टीडीएस) भी नहीं होती है। इसके उलट बैंक एफडी पर सालाना 40,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये) से ऊपर के ब्याज पर 10 फीसदी टीडीएस का प्रावधान है। इस योजना में हर साल ब्याज भी निवेश कर दिया जाता है, इसीलिए इस पर 80सी के तहत छूट मिलती है। लेकिन आखिरी साल में मिलने वाला ब्याज दोबारा निवेश नहीं किया जाता, इसलिए उस पर कर छूट नहीं मिलती।

यह ब्याज आपकी आय में जुड़ जाएगा और आपको कर स्लैब के हिसाब से उस पर कर देना होगा। इसमें एक बड़ी सहूलियत कर्ज लेते समय पता चलती है। एनएससी को आप कर्ज लेने के बतौर जमानत या रेहन इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि निवेशक की मृत्यु हो जाती है तो एनएससी पंजीकृत नॉमिनी, परिवार के सदस्य या कानूनी वारिस के नाम हो जाता है। 

समय से पहले निकासी 
एनएससी से समय पूर्व निकासी केवल तीन स्थितियों में हो सकती है - एकल निवेशक की मौत होने पर; संयुक्त निवेश में एक या सभी की मौत होने पर; अदालत के आदेश पर और गिरवीदार राजपत्रित अधिकारी द्वारा जब्ती की सूरत में। एनएससी को खरीद के साल भर के भीतर ही भुना लिया गया तो मूलधन ही मिलता है। एक साल के बाद और तीन साल से पहले भुनाया गया तो उतना ही ब्याज मिलेगा, जितना डाकघर बचत खाते पर मिलता है। तीन साल बाद एनएससी तोड़ा गया तो परिपक्वता राशि से कुछ कम भुगतान होता है। 
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