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विदेश में चुकाया कर तो सबूत के लिए जल्द भेजें फॉर्म 67

ऐसा नहीं किया तो आपके कर रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड में हो सकती है देर
बिंदिशा सारंग /  September 19, 2022

 केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी)   ने विदेश में चुकाए कर के क्रेडिट (एफटीसी) यानी वापसी के नियमों में कुछ दिन पहले ही बदलाव किया है। इन बदलावों से उन करदाताओं को राहत मिलेगी, जो किसी और देश में कर भर आए हैं और यहां उसकी वापसी यानी क्रेडिट चाहते हैं।

क्या है एफटीसी 

विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक को अक्सर वहां हुई आय पर कर भी वहीं चुकाना पड़ता है। दोहरी कर कटौती से बचने के लिए भारतीय कानून में प्रावधान किया गया है, जिसके मुताबिक विदेश में चुकाए गए कर की वापसी के लिए यहां दावा किया जा सकता है। उसी आय पर भारत में जो भी कर बन रहा है, उसमें से विदेश में चुकाया गया कर घटा दिया जाता है। इस तरह की राहत को ही विदेश कर क्रेडिट यानी एफटीसी कहते हैं और यह दो तरह का होता है।

वेद जैन ऐंड असोसिएट्स में पार्टनर अंकित जैन बताते हैं, ‘पहली स्थिति वह होती है, जिसमें किसी भारतीय नागरिक को पेशेवर शुल्क, लाभांश, ब्याज जैसी आमदनी किसी विदेशी पक्ष से होती है मगर भारत में रहते हुए ही होती है। इसमें विदेशी पक्ष दोहरे कराधान से बचाव के समझौते (डीटीएए) के प्रावधानों के मुताबिक कर काट लेती है। विदेशी पक्ष द्वारा काटे गए इसी कर की राशि को एफटीसी कहते हैं।’ दूसरी स्थिति वह होती है, जब भारतीय करदाता किसी दूसरे देश में किराये या पूंजीगत संपत्ति की बिक्री से आय प्राप्त करता है। जैन कहते हैं, ‘इस सूरत में किसी तरह की कर कटौती नहीं होती मगर करदाता को उस देश में कर जमा करना होता है और कर रिटर्न भी दाखिल करना होता है। इस तरह चुकाया गया कर ही एफटीसी बन जाता है।

संशोधन से क्या बदला? 

पुराने नियम के तहत यदि कोई व्यक्ति विदेश में कर चुका देता था तो उसे एफटीसी का दावा करने के लिए भारत में दस्तावेज उपलब्ध कराने और जमा कराने में बहुत दिक्कत होती थी। उन्हें आयकर रिटर्न दाखिल करने की तय तारीख से पहले ही कर भुगतान का सबूत जमा करना पड़ता था। जिन करदाताओं के लिए रिटर्न ऑनलाइन दाखिल करना जरूरी था, उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 139(1) के तहत रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख से पहले ही जरूरी दस्तावेज के साथ फॉर्म 67 पर ब्योरा भी जमा करना होता था।

जैन कहते हैं, ‘विदेशों में वित्तीय सूचना यानी रिपोर्टिंग की अवधि अलग-अलग होती है। इस कारण उन देशों में इस तरह की आय पर कर चुकाए जाने से पहले ही भारत में आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख आ जाती थी। इस वजह से करदाताओं को गलत जानकारी देने या एफटीसी छोड़ देने पर मजबूर होना पड़ता था।' 

आईपी पसरीचा ऐंड कंपनी में पार्टनर मनीत पाल सिंह का कहना है कि सीबीडीटी की नई अधिसूचना ने नियम 128 में संशोधन पिछली तारीख से लागू कर दिया है, जिससे यह लाभ चालू वित्त वर्ष में दाखिल किए गए एफटीसी के सभी दावों पर लागू हो सके यानी  अधिनियम की धारा 139(1) या धारा 139(4) के तहत दिए गए समय के भीतर उपलब्ध हो सके। इसी के अनुसार अब संबंधित कर निर्धारण वर्ष खत्म होने से पहले तक फॉर्म 67 में विवरण जमा किया जा सकता है।

क्या होगा असर? 

इन कर नियमों का पालन करने के लिए करदाताओं के पास अब पूरे एक साल का समय होगा। टैक्समैन के उपमहाप्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, ‘यह संशोधन 1 अप्रैल 2022 से लागू हो गया है और वित्त वर्ष 2022-23 में होने वाले एफटीसी के सभी दावे निपटाने में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। जिन करदाताओं की धारा 139(1) के तहत कर रिटर्न दाखिल करने तारीख पहले ही निकल चुकी है मगर वे फॉर्म 67 जमा नहीं कर पाए हैं उनके पास अब 31 मार्च, 2023 तक का वक्त है।’सिंह कहते हैं कि करदाताओं के लिए यह फायदे की बात है क्योंकि अब एफटीसी के रूप में उन्हें वापस मिलने वाली रकम नहीं डूबेगी।

मगर रहे ध्यान

नियमों में बेशक ढिलाई दे दी गई है मगर इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। आरएसएम इंडिया के संस्थापक सुरेश सुराणा कहते हैं, ‘सीबीडीटी ने फॉर्म 67 जमा करने की समयसीमा बेशक बढ़ा दी है मगर करदाताओं को रिटर्न दाखिल करते समय ही यह जमा कर देना चाहिए। देर की तो रिटर्न की प्रोसेसिंग देर से होगी और आपका रिफंड भी देर से ही आएगा।’ आखिरी वक्त पर फॉर्म 67 जमा करेंगे तो आपको ई-सत्यापन में भी दिक्कत आ सकती है। सुराणा समझाते हैं, ‘अगर आप रिटर्न दाखिल करने के बहुत दिनों बाद फॉर्म 67 जमा कर रहे हैं तो एक बात का ध्यान रखिए।

आपने रिटर्न में एफटीसी की जिस रकम का दावा किया है, आपके फॉर्म 67 में भी वही रकम भरी होनी चाहिए। दोनों में कोई फर्क नहीं होना चाहिए।’एक बार फॉर्म 67 जमा कर दिया तो आप उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकते। सिंह कहते हैं, ‘यह भी ध्यान रखें कि फॉर्म 67 को आयकर विभाग के पोर्टल से ऑनलाइन ही जमा किया जा सकता है।’ नए नियम के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने पिछले दो साल में विदेशी आय की जानकारी नहीं दी है, वह भी अपडेटेड रिटर्न जमा कर एफटीसी के लिए दावा कर सकता है। मगर अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 67 जमा करना ही होगा। अपडेटेड रिटर्न के जरिये एफटीसी का दावा करने पर दस्तावेज दाखिल करने की आखिरी तारीख रिटर्न जमा करने की आखिरी तारीख से पहले या उस तारीख पर ही होती है। 

 
Keyword: सीबीडीटी, एफटीसी, आय,,
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