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शराब राजस्व में गिरावट के बीच दिल्ली में पावर प्ले

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली September 18, 2022

 मुफ्त सुविधाएं जारी रखने के लिए अन्य राज्यों की तुलना में दिल्ली आर्थिक रूप से कहीं अधिक समृद्ध है। फिर क्यों उन लोगों को जिन्हें 400 यूनिट तक बिजली सब्सिडी दी जा रही है उन्हें यह चाहिए या नहीं, यह चुनने का निर्णय लिया है।

दिल्ली सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए जो 3,250 करोड़ रुपये का बिजली सब्सिडी का बजट रखा है, उसमें किसी भी तरह की बचत का पता उसके 58 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं द्वारा की गई खपत का आंकड़ा आने के बाद चलेगा। सरकार ने पिछले साल (संशोधित  अनुमान) के 3,039 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में इस वित्त वर्ष 7,601 करोड़ रुपये के अपने राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया है।

हालांकि सरकार हाल के दिनों में अपने राजस्व अनुमान का सटीक पता लगा रही है। 2020-21 में इसने 7,239 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया था, बाद में इसे संशोधित कर 3,770 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा किया था। बाद में यह 1450 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष के रूप में निकला। इसी तरह, इसने 2021-22 में बजट प्रेजेंटेशन के दौरान 1,271 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया था, लेकिन बाद में पहले की तरह 3,039 करोड़ रुपये का राजस्व घाटे के रूप में संशोधित किया था। इसके अलावा, सरकार का 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अधिशेष इस वित्त वर्ष में शराब से होने वाली 9,454 करोड़ रुपये की आय पर टिका हुआ है।

यह राशि हाल के दिनों में एक साल में शराब से होने वाली आय करीब 6,000 करोड़ से 57.6 फीसदी वृद्धि दर्शाती है। सरकार को अनुमान है कि 2022-23 में देसी शराब से 700 करोड़ रुपये और विदेशी शराब से 8,754 करोड़ रुपये की आय होगी। लेकिन, पिछले महीने सरकार द्वारा शराब नीति वापस लेने के बाद इस राशि पर अब संशय है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि वित्त वर्ष  के बाकी 8 महीनों में पुरानी शराब नीति वापस लाने से सरकार के वित्त पर कितना प्रतिकूल असर डालेगी। 

रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 की पहली तिमाही में सरकार को 1,594.84 करोड़ रुपये शराब की बिक्री से जमा किए थे। जिसमे से 980 करोड़ रुपये वापसी योग्य जमा राशि थी। आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज भी मानते हैं कि इस वित्त वर्ष में सरकार को शराब से केवल 6,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। हालांकि, वे यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को सब्सिडी छोड़ने का जो विकल्प दिया है उससे शराब नीति में हुए बदलाव से होने वाली राजस्व हानि से कोई लेना-देना है।

Keyword: मुफ्त सुविधाएं, शराब, राजस्व,
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