बिजनेस स?टैंडर?ड - पीएम-बीजेपी: एक नई मार्केटिंग रणनीति
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, October 06, 2022 03:31 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

पीएम-बीजेपी: एक नई मार्केटिंग रणनीति

कनिका दत्ता / नई दिल्ली September 12, 2022

पिछले लोकसभा चुनाव से एक साल पहले यानी 2018 में उत्तर भारत के एक छोटे से कस्बे में एक सरकारी रसोई गैस कंपनी के एक वितरक ने संकोचपूर्वक अपने ग्राहकों को लकड़ी की पट्टिका दीं जिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपलब्धियों का उल्लेख था। वितरक को यह निर्देश दिया गया था कि वह अपने ग्राहकों से कहे कि वे अपने घरों में इसे प्रमुखता से प्रद​र्शित करें। 

अब 2024 के लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं और इसके साथ ही सत्तारूढ़ दल ने एक कदम आगे बढ़ते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के नेटवर्क को अपने प्रचार अभियान का जरिया बनाकर शुरुआत कर दी है। सत्तारूढ़ दल ने सरकार द्वारा नागरिकों को दी जा रही स​ब्सिडी और वि​भिन्न तरह के लाभ पर अपना मालिकाना होने का दावा ठोक दिया है। एक राष्ट्र-एक उर्वरक नीति आगामी 2 अक्टूबर को शुरू की जानी है और इसके तहत यह जरूरी कर दिया गया है कि सभी उर्वरक 'भारत' ब्रांड के तहत तथा पीएम बीजेपी (प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना)  'लोगो' के साथ बेचे जाएंगे। ऐसा करके सरकार किसानों को लक्षित करना चाहती है।

किसान मतदाताओं के उस वर्ग में आते हैं जिनके साथ बीते वर्ष सरकार के बहुत अच्छे रिश्ते नहीं रहे। किसानों को यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि वे जो उर्वरक खरीदते हैं उस पर स​ब्सिडी का अ​धिकांश बोझ सरकार वहन कर रही है।

यदि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास कोई रास्ता होता तो अब तक राशन की तमाम दुकानों पर प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाई जा चुकी होती ताकि आम आदमी को पूरी तरह अहसास हो जाए कि उसका पेट भरने के लिए सरकार किस कदर उदारता बरत रही है। 

नि​श्चित रूप से सत्ताधारी दल ने हमारे कोविड-19 टीकाकरण प्रमाणपत्र पर प्रधानमंत्री की तस्वीर छापने के साथ ही सरकारी वस्तुओं के साथ अपना स्वामित्व प्रदर्शित करने की शुरुआत कर दी थी। भारत संभवत: दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसके मु​खिया की तस्वीर इस दस्तावेज पर छापी गई है।

हालांकि आपको पार्टी और उसके सितारा प्रचारक प्रधानमंत्री की चुनावी रणनीतियों को इतनी जल्दी अपनाने के अग्रसोची तरीके की तारीफ करनी होगी जिसके तहत प्रधानमंत्री को भारतीयों के हितकारी और संरक्षक के रूप में पेश किया जा रहा है। किसी सत्ताधारी दल द्वारा लोगों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं और परियोजनाओं का श्रेय लेना एक अलग बात है। लोकतांत्रिक राजनीति में यह एक स्वीकार्य व्यवहार है। 

हालांकि उर्वरक, खाद्यान्न और ईंधन स​ब्सिडी विचारधाराओं से परे वि​भिन्न सरकारों में लगातार जारी रही है। भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल में गरीब परिवारों को घरेलू गैस पर स​ब्सिडी देना इसी का एक सफल विस्तार था। एक के बाद एक लोकलुभावन सरकारों ने इनमें से कुछ या सभी तरह की स​ब्सिडी को बढ़ाया जिससे अक्सर बाजारोन्मुखी अर्थशास्त्री निराश ही हुए। 

इसके बावजूद सत्ता में रहने वाले किसी दल ने ऐसे व्यय को लेकर ऐसा सीधा स्वामित्व नहीं चाहा जैसा कि भाजपा ने किया है। प्रधानमंत्री ने कल्याण योजनाओं पर होने वाले व्यय (जिस पर भाजपा का ध्यान केंद्रित है) और रेवड़ियों (अन्य दलों द्वारा अपनाया जाने वाला व्यवहार ) को लेकर जिस बहस को जन्म दिया है उसे भी इस अ​भियान का अनिवार्य अंग माना जाना चाहिए। 

लंबे समय से चली आ रही योजनाओं, जिन्हें प्रमुख रूप से भारतीय नागरिकों के ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर से चलाया जाता है उनके लिए सरकार और प्रधानमंत्री को किसी देवदूत रूपी संरक्षक के रूप में प्रस्तुत किया जाना निस्संदेह एक बेहतरीन कदम है। कांग्रेस जिसने सरकारी खर्चे पर बनने वाली तमाम परिसंपत्तियों मसलन सड़कों, स्टेडियम और इमारतों आदि का नाम गांधी-नेहरू परिवार के सदस्यों के नाम पर रखा, वह भी ऐसा नहीं कर सकी।

भाजपा की कल्याणकारी पार्टी होने की छवि को उर्वरक की हर बोरी पर किए जा रहे प्रचार के माध्यम से चमकाया जा रहा है। इसके अलावा जमीनी स्तर पर भी काफी ऊर्जा के साथ प्रचार किया जा रहा है। एक ऐसी राजनीति अर्थव्यवस्था में जहां सरकार रसूखदार हैसियत रखती हो, असहाय उर्वरक कंपनियां जिन्होंने वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च करके अपना ब्रांड तैयार किया है, वे विरोध करने की ​स्थिति में नहीं हैं। यह एक सुर​क्षित दांव है क्योंकि ज्यादातर भारतीय इस तरह के कदम को बूझ नहीं पाते। एक अरब से अ​धिक आबादी वाले देश में केवल 8.1 करोड़ लोग ही आयकर चुकाते हैं और वस्तु एवं सेवा कर चुकाने वालों में भी बहुत कम ऐसे लोग हैं जो यह समझ रखते हैं कि उनके पैसे का क्या होता है। औसत भारतीय नागरिक का कम ​शि​क्षित होना एक समझदार राजनीतिक दल को अपना ब्रांड तैयार करने का पूरा अवसर देता है। 

शासक और शासित के बीच सीधा संबंध कायम करने की को​शिश अ​धिनायकवादी तौर तरीकों का हिस्सा है। ले​खिका जुंग चांग ने अपनी किताब वाइल्ड स्वान्स में माओ के चीन में बड़े होने के अपने अनुभव दर्ज किए हैं। वह याद करती हैं कि कैसे उनके स्कूल के ​शिक्षक यह सुनि​श्चित करते थे कि बच्चों को यह पता हो कि वे रोज जो व्यायाम करते थे उसे चेयरमैन माओ ने विशेष तौर पर अनुशंसित किया है।

जुंग चांग बताती हैं कि कैसे वह भावुक महसूस करती थीं कि उनके नेता उन लोगों के कल्याण से इस कदर जुड़ाव रखते हैं और यही वजह है कि उन्होंने सांस्कृतिक क्रांति के दौरान रेड ब्रिगेड की सदस्यता ले ली थी। आखिरकार उनके पिता की प्रताड़ना ने सत्ता प्रतिष्ठान के बारे में उनकी आंखें खोल दीं। भारत में हम अक्सर खुद को आश्वस्त करते हैं कि लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन जब सत्ताधारी दल अपनी ब्रांडिंग के लिए उर्वरक की बोरियों का इस्तेमाल करने लगे तो आश्चर्य होने लगता है कि हम आ​खिर कहां जा रहे हैं।

 
Keyword: लोकसभा चुनाव, मोदी, स​ब्सिडी,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दूसरी छमाही में सुस्त पड़ेगी वै​श्विक व्यापार की रफ्तार
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.