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खर्च करने में हिचक रहे हैं देश के उपभोक्ता

महेश व्यास / नई दिल्ली September 08, 2022

भारतीय उपभोक्ताओं ने अगस्त में कम खर्च किया है। पिछले महीने उपभोक्ता धारणा सूचकांक (आईसीएस) में 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। हालांकि उससे पिछले महीने जुलाई में यह सूचकांक 6.7 फीसदी बढ़ा था। इस साल जुलाई तक आईसीएस हर महीने बढ़ा था। लेकिन अगस्त में गिरावट आने के कारण सात महीने की लगातार जारी बढ़ोतरी पर विराम लग गया। सितंबर के पहले सप्ताह में आईसीएस में 3.1 प्रतिशत की अच्छी खासी गिरावट दर्ज हुई। हालांकि परिवार की सोच उपभोक्ता धारणा में तेजी से सुधार के लिए तैयार नहीं दिख रही है।

अगस्त में उपभोक्ता धारणा में कमी काफी हद तक जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के पहले सप्ताह में ही उजागर हुई। इन दो सप्ताहों में आईसीएस में संचयी रूप से 11.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह असाधारण गिरावट थी और इसका प्रभाव अगले दो महीनों पर भी पड़ा। अगस्त के तीन सप्ताहों में आईसीएस में सुधार दिखा था लेकिन यह सुधार बहुत धीमा था। सूचकांक में पहले गिरावट होने के कारण वह पूरी तरह उबर भी नहीं पाया। इसमें कुछ अड़चनें दिखाई देती हैं।

अगस्त में आईसीएस में गिरावट भारत की उपभोक्ता धारणा के हालिया मुश्किल सफर को दर्शाता है। उपभोक्ता धारणा में निश्चित रूप से कमजोरी का रुख रहा था। हालांकि जनवरी से जुलाई 2022 तक के सात महीनों के दौरान इस धारणा में निरंतर सुधार हुआ था। यह जुलाई में सर्वश्रेष्ठ 6.7 प्रतिशत था। जुलाई 2022 के शुरुआती सात महीनों की धारणा में सुधार की विशेषता यह रही कि इसमें मार्च से जून तक इसकी वृदि्ध दर में सिलसिलेवार ढंग से गिरावट का रुख रहा था। जुलाई में तेजी से सुधार हुआ था। हालांकि अब यह लगता है कि उपभोक्ता धारणा में कहीं कमजोरी का रुझान छुपा हुआ था।

हमारा यह विश्वास है कि उपभोक्ता धारणा में गिरावट मुख्यतौर पर दक्षिण पश्चिम मॉनसून के असामान्य रूप से आगे बढ़ने और खरीफ फसल की बोआई देर से होने के कारण हुई थी। अगस्त के आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों की धारणा पर्याप्त रूप से कमजोर हुई हैं। अगस्त में शहरी क्षेत्र में आईसीएस में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अपरिवर्तित रहा। सितंबर के पहले सप्ताह में आईसीएस में शहरी क्षेत्र में 4.7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी। आईसीएस के दो मुख्य अवयव-वर्तमान आर्थिक स्थिति सूचकांक (आईसीसी) और उपभोक्ता धारणा सूचकांक (आईसीई) थे। इनसे उपभोक्ता धारणा में गिरावट के स्रोतों की जानकारी मिलती है। दो क्षेत्रों में धारणाएं अलग दिखती हैं लेकिन इनमें भविष्य को लेकर संशयवादी दबा हुआ रुख प्रतीत होता है।

अगस्त में आईसीसी में 1.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह गिरावट परिवारों की दो धारणाओं की ओर इशारा करती है। पहला, जिन परिवारों ने बीते एक साल में अपनी आमदनी बढ़ने की जानकारी दी थी, उनका अनुपात16.3 प्रतिशत से गिरकर जुलाई में 14 प्रतिशत हो गया था। यह हिस्सेदारी जुलाई में तेजी से बढ़ी थी लेकिन अगस्त में गिरकर अपने स्तर के करीब पहुंच गई थी। दूसरा, टिकाऊ उपभोक्ता सामान पर खर्च करने वाले उपभोक्ताओं का अनुपात तेजी से गिरा जो 14.2 प्रतिशत से गिरकर जुलाई में 10.9 प्रतिशत पर पहुंच गया। इसका मतलब यह है कि जुलाई 2022 की तुलना में टिकाऊ उपभोक्ता सामान पर खर्च करने परिवारों का रुझान अप्रैल 2022 के बाद सबसे कम हो गया है। खर्च पर परिवारों की लगी इस बंदिश के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को पूर्ववर्ती स्तर प्राप्त करने में अड़चनों का सामना करना पड़ा है।

ग्रामीण भारत में वर्तमान आर्थिक स्थिति सूचकांक (आईसीसी) में गिरावट रही। इससे ग्रामीण भारत के गैरजरूरत के सामान खरीदने की प्रवृत्ति को नुकसान पहुंचा। ग्रामीण भारत में आईसीसी की दर में 2.4 प्रतिशत की गिरावट आई। एक साल में आमदनी बढ़ने वाले परिवारों का अनुपात 15.8 प्रतिशत से गिरकर अगस्त में 12.7 प्रतिशत पर आ गया था। हालांकि गैर जरूरत के सामान की खरीदारी की प्रवृत्ति में तेजी से गिरावट आई जो 13.8 प्रतिशत से गिरकर 8.7 प्रतिशत पर आ गई। यह इस दर का जनवरी 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है।

शहरी आईसीसी अलग तरह से आगे बढ़ा और यह थोड़ा सा 0.6 प्रतिशत बढ़ा था। हालांकि शहरी भारत में बीते एक साल के दौरान बड़ी हुई आय में गिरावट आई। लेकिन इस वर्ग का गैर जरूरतमंद सामान की ओर रुझान कम नहीं हुआ। वैसे इसमें बढ़ोतरी की दर में गिरावट आई। आमदनी में बढ़ोतरी वाले परिवार 17.2 प्रतिशत से गिरकर 16.5 प्रतिशत पर आ गए। लेकिन शहरी परिवारों की यह सोच अपेक्षाकृत रूप से बढ़ी कि यह उन्हें टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदना चाहिए। इससे टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने का अनुपात 15 प्रतिशत से थोड़ा बढ़कर अगस्त में 15.5 प्रतिशत हो गया था। टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने का स्तर जून 2021 में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। शहरी परिवारों में टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने की दर में बीते एक साल से सुधार हो रहा है लेकिन इसमें बढ़ोतरी की दर धीमी है और वह भी लगातार गिर रही है।

शहरी भारत भविष्य को लेकर बहुत आशावादी नहीं है। अगस्त के दौरान शहरी भारत में उपभोक्ता धारणा सूचकांक में 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी। इससे पता चलता है कि भविष्य को लेकर तीन संबंधित धारणाओं में गिरावट हुई है। कुछ परिवारों को ही आशा है कि आने वाले सालों में उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। आने वाले समय में वित्तीय और कारोबारी स्थितियां बेहतर होंगी। लोगों को यह भी आस है कि आने वाले पांच सालों में भारत के आर्थिक हालात में सुधार होगा। हालांकि इन तीन मानदंडों पर ज्यादातर परिवारों का विश्वास है कि उनकी स्थितियां और खराब हो सकती हैं। भविष्य के प्रति इस धुंधले नजरिये से टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने की सोच प्रभावित हुई है और इस वर्ग के जोश पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

हालांकि ग्रामीण भारत ने उपभोक्ता धारणा सूचकांक स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। अगले 12 महीनों को लेकर अत्यधिक आशावादी नजरिया नहीं है लेकिन उन्हें यह विश्वास है कि स्थितियां और खराब नहीं होंगी।

अगस्त में आर्थिक स्थिति सूचकांक में गिरावट मात्र 0.5 प्रतिशत थी। ग्रामीण भारत टिकाऊ उपभोक्ता सामान खरीदने से अपने हाथ तेजी से पीछे खींच चुका है। शहरी भारत भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में है और उसकी स्थिति चिंताजनक है। सितंबर के पहले सप्ताह में उपभोक्ता धारणा सूचकांक में 4.7 प्रतिशत की गिरावट इस चिंता को बखूबी बयां करती है।

(लेखक सीएमआईई प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक व मुख्य कार्या​धिकारी हैं)
Keyword: उपभोक्ता, आईसीएस, सूचकांक, आमदनी, आर्थिक, मॉनसून,,
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